EV: युद्ध के बीच ईंधन की कीमतों में उछाल, क्या इससे बढ़ सकती है इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग?
ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक कारों के बारे में सोचना शुरू कर रहे हैं। वैश्विक घटनाओं की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। लेकिन बिजली के रेट आम तौर पर ज्यादा स्थिर रहते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस ट्रेंड से ईवी की बिक्री बढ़ सकती है। ईवी मालिकों पर लंबे समय तक इसका क्या असर पड़ेगा, यह अभी भी चर्चा का विषय है।
विस्तार
वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में कई वाहन चालकों के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि क्या इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के डेट्रॉइट निवासी केविन केटेल्स ने पिछले साल एक इलेक्ट्रिक एसयूवी खरीदी थी। उस समय उनका फैसला ईंधन की कीमतों से ज्यादा भविष्य की तकनीक को अपनाने की सोच से जुड़ा था। लेकिन अब पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच उन्हें लगता है कि ईवी खरीदना सही निर्णय था।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे इलेक्ट्रिक वाहनों में लोगों की रुचि और बिक्री दोनों बढ़ सकती हैं।
क्या पेट्रोल वाहनों की तुलना में EV मालिक कीमतों से कम प्रभावित होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहनों के चालक वैश्विक संकटों के कारण होने वाले ईंधन मूल्य उतार-चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित होते हैं।
हाल के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत एक महीने में काफी बढ़ गई। इसके उलट घरेलू बिजली दरें आमतौर पर नियामकों द्वारा तय की जाती हैं। इसलिए उनमें अचानक उतार-चढ़ाव कम होता है।
इस कारण ईवी मालिक तेल की कीमतों में आने वाले झटकों से तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित होते हैं।
क्या बिजली की कीमतें भी बढ़ सकती हैं?
हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि बिजली की कीमतें पूरी तरह स्थिर नहीं रहतीं।
बिजली की बढ़ती मांग, नए डेटा सेंटरों की स्थापना और ऊर्जा उत्पादन लागत में बदलाव जैसे कारणों से बिजली दरों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।
फिर भी हाल के समय में प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी उतनी तेज नहीं रही जितनी तेल की कीमतों में देखी गई है। जिससे बिजली उत्पादन लागत पर सीमित प्रभाव पड़ा है।
बिजली की लागत स्थानीय ऊर्जा स्रोतों पर कैसे निर्भर करती है?
किसी भी ईवी को चार्ज करने की लागत काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि स्थानीय बिजली ग्रिड किन ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा करता है।
कई देशों में बिजली उत्पादन के लिए कोयला, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय स्रोतों का मिश्रण उपयोग किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ती है। तो भविष्य में बिजली की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती हैं।
क्या इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ सकती है?
ऑटो उद्योग के विश्लेषकों के अनुसार पेट्रोल की ऊंची कीमतें अक्सर इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को बढ़ावा देती हैं।
उपभोक्ता डेटा का विश्लेषण करने वाले प्लेटफॉर्म एडमंड्स के मुताबिक हाल ही में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के प्रति उपभोक्ताओं की रुचि में बढ़ोतरी देखी गई है।
पिछले वर्षों में जब भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया, तब ईवी और हाइब्रिड वाहनों के प्रति रुचि भी बढ़ी थी।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक बिक्री इस बात पर निर्भर करेगी कि उपभोक्ता लंबे समय में कितनी बचत की उम्मीद करते हैं।
क्या इलेक्ट्रिक वाहन चलाने से वास्तव में पैसे बचते हैं?
ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में ईवी चलाने से ईंधन पर काफी बचत होती है।
पर्यावरण संगठन एनवायरमेंट डिफेंस फंड के अनुसार ईवी मालिक अपने वाहन के पूरे जीवनकाल में ईंधन पर हजारों डॉलर तक की बचत कर सकते हैं।जैसे-जैसे पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं, यह बचत और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्या EV अभी भी महंगे हैं?
फिर भी एक बड़ी चुनौती यह है कि इलेक्ट्रिक कारों की शुरुआती कीमत अक्सर पेट्रोल कारों से ज्यादा होती है।
ऑटो डेटा प्लेटफॉर्म केली ब्लू बुक के अनुसार हाल ही में नई ईवी की औसत कीमत पारंपरिक वाहनों से अधिक रही है।
इसके अलावा कुछ विशेषज्ञ ईवी सप्लाई चेन में चीन के प्रभुत्व को भी रणनीतिक चिंता मानते हैं।
क्या भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा संकट और ईंधन की कीमतों में अस्थिरता जारी रहती है, तो इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा समाधान ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगे।
इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार देशों को ऊर्जा सुरक्षा भी दे सकता है। और लंबे समय में उपभोक्ताओं के लिए लागत कम कर सकता है।
इस वजह से कई विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले वर्षों में ईवी की ओर बदलाव तेज हो सकता है।
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