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DL Rule: 20 साल की जगह 50 साल की उम्र तक वैध होगा डीएल? बदलेंगे गाड़ी ट्रांसफर के नियम, जानें नया प्रस्ताव
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Tue, 09 Jun 2026 03:11 PM IST
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सार
Driving License Validity: सड़क परिवहन मंत्रालय नागरिकों के लिए वाहन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए दो बड़े प्रस्तावों पर काम कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस (DL) की वैधता अवधि को मौजूदा 20 साल से बढ़ाकर सीधे लाइसेंस धारक के 50 वर्ष की आयु तक करने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही वाहन स्वामित्व (Ownership Transfer) और परमिट रिन्यूअल की पूरी प्रक्रिया को भी ऑनलाइन करने की तैयारी है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Transport Department Government of NCT of Delhi DL renewal: वाहन चालकों और वाहन मालिकों के लिए आने वाले समय में कई प्रक्रिया आसान होने वाली है। सरकार ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि को मौजूदा व्यवस्था से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही वाहन स्वामित्व ट्रांसफर और परमिट रिन्यूअल जैसी सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने की तैयारी भी चल रही है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोगों को आरटीओ कार्यालयों के चक्कर से राहत देना और सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
RTO के कई काम हो सकते हैं पूरी तरह ऑनलाइन
नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पर भी हो रहा विचार
मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
- फिलहाल ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता खत्म होने पर उसे रिन्यू करवाना पड़ता है, इसके लिए आवेदक को संबंधित स्थानीय जाेनल ऑफिस या निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना पड़ता है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, दिल्ली सरकार (NCT) के अनुसार, निजी (Private) ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने की तारीख से 20 साल तक या लाइसेंस धारक के 50 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, वैध रहता है।
- वहीं, कमर्शियल, पैसेंजर या मालवाहक वाहनों के लिए जारी ड्राइविंग लाइसेंस को हर तीन साल में रिन्यू कराना जरूरी होता है। इसके अलावा कमर्शियल लाइसेंस धारकों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य है। साथ ही, यदि आवेदक की उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक है, तो रिन्यूअल के समय मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना भी आवश्यक होता है।
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RTO के कई काम हो सकते हैं पूरी तरह ऑनलाइन
- प्रस्तावित बदलावों में वाहन स्वामित्व के ट्रांसफर और परमिट रिन्यूअल जैसी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की योजना भी शामिल है। इसका मतलब यह हो सकता है कि भविष्य में कई जरूरी प्रक्रियाओं के लिए लोगों को RTO कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े और अधिकांश काम ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पूरे किए जा सकें।
- सरकार का मानना है कि इससे नागरिकों के समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी तथा सेवाओं की पहुंच भी बेहतर होगी।
नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पर भी हो रहा विचार
- इसके अलावा सड़क नियमों के उल्लंघन पर नेगेटिव प्वाइंट सिस्टम भी लागू करने की संभावना जताई जा रही है। इसमें अगर किसी चालक की ओर से बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता है, तो उसके लाइसेंस पर नकारात्मक अंक दर्ज किए जा सकते हैं।
- भविष्य में इन अंको काे लाइसेंस के सस्पेंशन या रद्द किए जाने जैसी कार्रवाई से जोड़ा जा सकता है। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना बौर लापरवाह ड्राइविंग पर नियंत्रण करना है।
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो वाहन चालकों को लाइसेंस रिन्यूअल और अन्य RTO प्रक्रियाओं के लिए कम भागदौड़ करनी पड़ेगी।
- ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार से समय की बचत होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी सेवाओं तक पहुंच पहले से अधिक आसान हो सकती है।
- फिलहाल इन प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है। अंतिम नियम लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था कब और किस रूप में लागू की जाएगी।