Meta: इंस्टाग्राम ने बचाई खुदखुशी करने जा रहे शख्स की जान, 8 मिनट में पहुंच गई पुलिस, इस फीचर का हुआ इस्तेमाल
Meta Suicide Prevention: तकनीक और पुलिस की मुस्तैदी का एक शानदार उदाहरण यूपी के मेरठ में देखने को मिला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा के एडवांस्ड एआई अलर्ट सिस्टम की मदद से यूपी पुलिस ने सिर्फ 8 मिनट के अंदर आत्महत्या की कोशिश कर रहे एक 25 वर्षीय इंस्टाग्राम यूजर की जान बचा ली।
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अक्सर हम सोशल मीडिया के नुकसान की बात करते हैं, लेकिन क्या हो जब यही टेक्नोलॉजी किसी की जान बचा ले? उत्तर प्रदेश के मेरठ में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा (Meta) के एडवांस्ड अलर्ट सिस्टम और यूपी पुलिस की फुर्ती की वजह से, सिर्फ 8 मिनट के अंदर एक 25 साल के युवक की जान बचा ली गई। आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरी घटना क्या थी और मेटा का यह सुसाइड प्रिवेंशन सिस्टम कैसे काम करता है।
Instagram पोस्ट और Meta का इमरजेंसी अलर्ट
पुलिस के मुताबिक, 7 जून को मेरठ के एक युवक ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो में वह कोई संदिग्ध लिक्विड (जहर) पीता दिख रहा था और उसने कैप्शन में लिखा था, "अब तुम खुश रहना अपनी जिंदगी में।"
मेटा के सिस्टम ने तुरंत इस वीडियो में आत्महत्या के संकेतों को डिटेक्ट कर लिया। शाम 6:53 बजे, मेटा के सिस्टम ने ऑटोमैटिक तरीके से यूपी पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर को एक इमरजेंसी अलर्ट भेजा।
लोकेशन ट्रेसिंग और सिर्फ 8 मिनट में एक्शन
मेटा से अलर्ट मिलते ही पुलिस का टेक-डिपार्टमेंट एक्टिव हो गया। सोशल मीडिया सेंटर ने तुरंत यूजर के मोबाइल नंबर और लाइव लोकेशन को ट्रेस किया। यह जानकारी बिना कोई समय गंवाए मेरठ पुलिस को भेजी गई। पुलिस की टीम मात्र 8 मिनट के अंदर लोकेशन ट्रेस करके युवक के घर पहुंच गई। वहां युवक की हालत गंभीर थी। पुलिस ने उसे तुरंत करीबी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां सही समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।
Meta का सुसाइड प्रिवेंशन सिस्टम कैसे काम करता है?
मेटा सिर्फ पुलिस को अलर्ट नहीं भेजता, बल्कि इसका एक पूरा इकोसिस्टम है जो लोगों की जान बचाने के लिए एक्टिव रहता है। इसके मुख्य फीचर्स इस प्रकार हैं:
- AI की मदद से पहचान: मेटा के एआई मॉडल यूजर्स के टेक्स्ट, इमेज और बर्ताव को रियल-टाइम में स्कैन करते हैं। जैसे ही कोई खुद को नुकसान पहुंचाने वाला संकेत मिलता है, सिस्टम तुरंत यूजर को एप के अंदर ही सुसाइड प्रिवेंशन रिसोर्स और हेल्पलाइन के लिंक भेज देता है।
- पुलिस और कानून प्रवर्तन के साथ सहयोग: भारत में मेटा सीधे राज्य पुलिस विभागों के साथ मिलकर काम करता है। जान का खतरा होने पर सिस्टम यूजर की लाइव लोकेशन और कांटेक्ट डिटेल्स सीधे पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को भेजता है, जिससे पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच पाती है।
- कंटेंट मॉडरेशन: मेटा की नीतियां बेहद सख्त हैं। प्लेटफॉर्म पर सुसाइड नोट्स, खुद को नुकसान पहुंचाने वाली ग्राफिक इमेजेस या तरीके बताने वाले कंटेंट को तुरंत हटा दिया जाता है। ऐसे कंटेंट को सर्च करने से भी ब्लॉक किया जाता है।
- पेरेंटल नोटिफिकेशंस: अगर कोई किशोर बार-बार सुसाइड या डिप्रेशन से जुड़ा कंटेंट सर्च करता है, तो इंस्टाग्राम उन माता-पिता को तुरंत अलर्ट भेजता है जो पेरेंटल सुपरविजन फीचर से जुड़े होते हैं।
- इंडस्ट्री कोलैबोरेशन: मेटा अन्य बड़ी टेक कंपनियों के साथ मिलकर ऐसे खतरनाक कंटेंट के डिजिटल फिंगरप्रिंट शेयर करता है, ताकि उसे बाकी प्लेटफॉर्म्स से भी तुरंत हटाया जा सके।
भारत में Meta के इन-एप रिसोर्स और एजुकेशनल हब
भारत में मेटा के ये सभी टूल्स पूरी तरह से उपलब्ध हैं और इसने अब तक हजारों जानें बचाई हैं। जब भी कोई यूजर डिप्रेशन या सुसाइड से जुड़े शब्द सर्च करता है, तो स्क्रीन पर पॉप-अप मैसेज आते हैं जो उन्हें दोस्तों या एक्सपर्ट्स से बात करने का विकल्प देते हैं।
मेटा सीधे तौर पर सरकारी हेल्पलाइन टेली-मानस (Tele MANAS) और iCall (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के जरिए संचालित) जैसे गैर-सरकारी संगठनों से यूजर्स को जोड़ता है। मेटा सेफ्टी सेंटर पर एक इमोशनल हेल्थ हब है। यहां हिंदी, बंगाली, तमिल और तेलुगु सहित 10 क्षेत्रीय भाषाओं में 'Help a Friend in Need' गाइड उपलब्ध है।
अब तक बच चुकी हैं 3,000 से ज्यादा जानें
यह टेक्नोलॉजी इंसानी जान बचाने में कितनी कारगर है, इसका अंदाजा आप आंकड़ों से लगा सकते हैं। पुलिस के मुताबिक, 1 जनवरी 2023 से 31 मई 2026 तक, मेटा के इन अलर्ट्स और पुलिस के तुरंत एक्शन की बदौलत अकेले उत्तर प्रदेश में 3,011 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
जरूरी सूचना
मानसिक स्वास्थ्य बेहद महत्वपूर्ण है और जान है तो जहान है। अगर आप या आपका कोई परिचित किसी संकट से गुजर रहा है या मन में खुदकुशी के विचार आ रहे हैं, तो तुरंत मदद लें। आप भारत में इन गोपनीय और पेशेवर हेल्पलाइन्स पर संपर्क कर सकते हैं:
- टेली-मानस: 14416 या 108 डायल करें (24/7 उपलब्ध)
- टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज: +91 9152987821 (सोमवार से शनिवार, सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक)
- स्नेहा फाउंडेशन: 044-24640050 (24/7 उपलब्ध)
- जीवनसाथी हेल्पलाइन: 18002333330