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Bihar: आरसीपी के बाद नीतीश को लग सकता है एक और झटका, हरिवंश पर भाजपा का बड़ा दांव!

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sun, 14 Aug 2022 01:15 PM IST
सार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नौ अगस्त को जदयू की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में हरिवंश शामिल नहीं हुए थे। उनके करीबी सूत्र ने बताया कि हरिवंश को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बाद से ही चर्चा तेज है कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। 

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण - फोटो : PTI
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विस्तार

पू्र्व राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह के जरिए भाजपा जदूय को झटका देने की तैयारी में थी। हालांकि, इससे पहले ही जदयू ने एनडीए से अलग होकर भाजपा को चारों खाने चित्त कर दिया। इसके बाद से बिहार के समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। जदयू अब राजद के साथ है और बिहार में नई सरकार का गठन भी हो चुका है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अभी भी हार नहीं मानी है। 



खबर है कि आरसीपी सिंह का दांव विफल होने के बाद भाजपा जदयू को झटका देने की तैयारी है। वह राज्यसभा के उपसभापति और जदयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह पर अपना दांव खेल सकती है। 




हरिवंश के इस्तीफे को लेकर चर्चा तेज 
जदयू के भाजपा से अलग होने के बाद से इस खबर ने चर्चा पकड़ ली है कि क्या हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति के पद से इस्तीफा देंगे? दरअसल, हरिवंश को आठ अगस्त, 2018 को राज्यसभा का उपसभापति चुना गया था। उनके नाम का प्रस्ताव भाजपा ही लेकर आई थी और उन्हें कई दलों ने समर्थन भी दिया था। हालांकि, मौजूदा समीकरण को देखते हुए अटकलें हैं कि हरिवंश को लेकर जदयू और भाजपा के बीच तनातनी और बढ़ सकती है। 

हरिवंश के करीबी ने किया खुलासा 
हरिवंश के एक करीबी सूत्र ने बताया है कि जदयू सांसद एक संवैधानिक पद पर हैं और ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं रह जाता है। उन्होंने कहा, उन्हें इस्तीफा क्यों देना चाहिए? इसके बाद से संभावना है कि हरिवंश अपने संवैधानिक पद पर बने रहेंगे। हांलाकि, उन्होंने कहा कि उनके मन में जदयू और नीतीश कुमार को लेकर पूरा सम्मान है। 

संवैधानिक पद पर हैं हरिवंश 
राज्यसभा में उपसभापति एक संवैधानिक पद है। इस पद पर आसीन होने वाले व्यक्ति को इस बात से बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि कौन सी पार्टी सत्ता में है और कौन सी नहीं। उन्हें पद से तभी हटाया जा सकता है, जब भाजपा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए। 

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