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Gas Prices Hiked: गैस के दाम में रिकॉर्ड 40 फीसदी की बढ़ोतरी, अब सीनएसी और पीएनजी की कीमतों पर दिखेगा असर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 30 Sep 2022 08:17 PM IST
सार

सरकार हर छह महीने में 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को गैस की कीमत तय करती है, जो कि अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस सरप्लस देशों में एक साल में एक चौथाई के अंतराल के साथ जारी दरों के आधार पर होती है।

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gas price hike - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

वैश्विक स्तर पर छाए संकट के बीच सरकार ने शुक्रवार को गैस के दामों में रिकॉर्ड स्तर पर 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ के आदेश के अनुसार पुराने क्षेत्रों से उत्पादित गैस के लिए भुगतान की गई दर, जो देश में उत्पादित सभी गैस का लगभग दो-तिहाई है, उसे मौजूदा 6.1 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 8.57 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर दिया गया है। इसका असर साफ तौर पर सीएनजी और पीएनजी उपभोक्ताओं पर दिखेगा। 



रिलायंस ने भी बढ़ाए गैस के दाम 
इसके साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके सहयोगी बीपी पीएलसी संचालित केजी बेसिन में डीपसी डी6 ब्लॉक जैसे कठिन और नए क्षेत्रों से गैस की कीमत 9.92 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 12.6 अमेरिकी डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दी। प्रशासित/विनियमित क्षेत्रों (जैसे मुंबई तट पर ओएनजीसी के बेसिन क्षेत्र) और मुक्त बाजार क्षेत्रों (जैसे केजी बेसिन) के लिए ये उच्चतम दरें हैं। साथ ही अप्रैल 2019 के बाद से दरों में यह तीसरी वृद्धि है और बेंचमार्क अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मजबूती के कारण हुई है। गैस, उर्वरक बनाने के साथ-साथ बिजली पैदा करने के काम भी आती है। इसे सीएनजी में भी बदला जाता है और खाना पकाने के लिए घरेलू रसोई में इस्तेमाल किया जाता है। कीमतों में भारी वृद्धि से अब सीएनजी और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के दामों में भी भारी बढ़ोतरी होगी  जो पिछले एक साल में 70 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।


मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती है गैस कीमतें 
सरकार हर छह महीने में 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को गैस की कीमत तय करती है, जो कि अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस सरप्लस देशों में एक साल में एक चौथाई के अंतराल के साथ जारी दरों के आधार पर होती है। इसलिए 1 अक्टूबर से 31 मार्च की कीमत जुलाई 2021 से जून 2022 तक की औसत कीमत पर आधारित है। चूंकि गैस की उच्च कीमतें संभावित रूप से मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकती हैं, जो पिछले आठ महीनों से आरबीआई के लिए राहत बनी हुई है, सरकार ने मूल्य निर्धारण फार्मूले की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है। योजना आयोग के पूर्व सदस्य किरीट एस पारिख की अध्यक्षता वाली समिति को सितंबर के अंत तक अंतिम उपभोक्ता को उचित मूल्य का सुझाव देने के लिए कहा गया है, लेकिन रिपोर्ट में देरी हो रही है।

सरकार ने 2014 में गैस सरप्लस देशों में कीमतों का इस्तेमाल स्थानीय रूप से उत्पादित गैस के फार्मूले पर पहुंचने के लिए किया था। इस फॉर्मूले के अनुसार दरें कम थीं और कई बार मार्च 2022 तक उत्पादन की लागत से कम थीं, लेकिन इसके बाद दाम तेजी से बढ़े, जो यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद वैश्विक दरों में वृद्धि को दर्शाता है। पुराने क्षेत्रों से गैस की कीमत, जो मुख्य रूप से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे राज्य के स्वामित्व वाले उत्पादकों की है, 1 अप्रैल से दोगुनी से अधिक 6.1 अमरीकी डालर प्रति एमएमबीटीयू हो गई थी।   

 

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