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Refinancing: ब्याज दरें बढ़ने के दौर में कराएं होम लोन रिफाइनेंसिंग, हो सकती है मोटी बचत

कालीचरण, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 03 Oct 2022 05:41 AM IST
सार

30 सितंबर को केंद्रीय बैंक के रेपो दर में बढ़ोतरी करने के कुछ घंटे बाद ही एसबीआई समेत कई बैंकों ने अपने-अपने कर्ज महंगे कर दिए हैं। अन्य बैंक भी दरें बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिसका असर आपकी ईएमआई पर पड़ेगा।

सांकेतिक तस्वीर।
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार

महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की तरह आरबीआई भी नीतिगत दर में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है। इस साल मई से अब तक रेपो दर में लगातार चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है। तब से अब तक रेपो दर 4 फीसदी से बढ़कर तीन साल के उच्च स्तर 5.90 फीसदी पर पहुंच गई है। यही वह दर है, जिसपर आरबीआई केंद्रीय बैंकों को कर्ज देता है। ऐसे में अगर केंद्रीय बैंक रेपो दर में इजाफा करता है तो बैंक भी होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन जैसे विभिन्न तरह के कर्ज महंगा कर देते हैं।



दरअसल, 30 सितंबर को केंद्रीय बैंक के रेपो दर में बढ़ोतरी करने के कुछ घंटे बाद ही एसबीआई समेत कई बैंकों ने अपने-अपने कर्ज महंगे कर दिए हैं। अन्य बैंक भी दरें बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिसका असर आपकी ईएमआई पर पड़ेगा। अगर आपने होम लोन लिया है तो ब्याज दरें बढ़ने के बाद आपको हर महीने ज्यादा ईएमआई चुकानी पड़ेगी। हालांकि, ब्याज दरें बढ़ने के इस दौर में आप चाहें तो होम लोन रिफाइनेंसिंग से ईएमआई का बोझ घटाने के साथ मोटी बचत भी कर सकते हैं।


क्या है होम लोन रिफाइनेंसिंग
कम ब्याज दर जैसी शर्तों वाला नया होम लोन लेकर मौजूदा होम लोन को चुकाना ही होम लोन रिफाइनेंसिंग है। नया लोन आप मौजूदा या नए बैंक से ले सकते हैं। पुराने लोन को नए लोन के मिले पैसों से बंद करा सकते हैं और नए लोन का पुनर्भुगतान शुरू कर सकते हैं। नए लोन में ब्याज दर कम होगी तो ईएमआई का बोझ भी कम होगा।

कब लेनी चाहिए सुविधा

  • लोन अवधि का पहला आधा हिस्सा खत्म से पहले इसकी रिफाइनेंसिंग बेहतर विकल्प है।
  • यही वह समय होता है, जब ईएमआई में ब्याज की हिस्सेदारी ज्यादा रहती है।
  • लोन तभी रिफाइनेंस कराना चाहिए, जब दूसरा लोन कम ब्याज दर पर मिल रहा हो।
  • साथ ही आपका क्रेडिट स्कोर और कमाई बेहतर हो गई हो।

ऐसे भी कर सकते हैं बचत
मान लीजिए, आपने 8 फीसदी ब्याज दर पर 20 साल यानी 240 महीने के 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है। इस लोन पर आपको 50.37 लाख रुपये का सिर्फ ब्याज चुकाना होगा। इस तरह, 20 साल में आपकी कुल देनदारी 1.37 करोड़ रुपये बन रही है, जिसके लिए आप हर महीने 41,822 रुपये की ईएमआई का भुगतान करते हैं। अब ब्याज दर बढ़ने के बाद आपको ज्यादा ईएमआई चुकानी पड़ेगी।
  • ऐसे में ईएमआई के बोझ से बचने के लिए अपने बैंक से मौजूदा होम लोन को कम ब्याज दर रिफाइनेंस करा सकते हैं।
  • आप चाहें तो दूसरे बैंकों से भी यह सुविधा ले सकते हैं।
  • अगर बैंक 7 फीसदी ब्याज दर पर रिफाइनेंस करता है तो 50 लाख रुपये के होम लोन पर ब्याज का हिस्सा 50.37 लाख से घटकर 43.03 लाख रुपये रह जाएगा। इस तरह, 7.34 लाख रुपये की बचत होगी।
  • अगर आप साल में एक अतिरिक्त ईएमआई जमा करते हैं तो लोन अवधि घटकर 199 महीने रह जाएगी।
  • इसके अलावा, अगर आप स्वेच्छा से ज्यादा ईएमआई चुकाते हैं तो इससे आपके लोन भुगतान की अवधि कम हो जाएगी। मान लीजिए, आप 41,822 रुपये की जगह हर महीने 50,000 रुपये की मासिक किस्त भरते हैं तो आपकी लोन की भुगतान अवधि 240 महीने से घटकर 166 महीने ही रह जाएगी।
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  • अगर आप हर साल बचे लोन का 5 फीसदी हिस्सा अपने नियमित ईएमआई के साथ चुकाते हैं तो आपकी लोन अवधि 240 महीने कम होकर 137 महीने रह जाएगी।

टेबल से ऐसे समझें बचत का गणित
रिफाइनेंसिंग नहीं कराने पर मौजूदा बैंक से नए बैंक से 
लोन रकम (रु.) 25 लाख 25 लाख 25 लाख
ब्याज दर  8 फीसदी 7 फीसदी 7 फीसदी
बची अवधि 9 साल 9 साल 9 साल
ब्याज राशि (रु.) 10,15,053  8,76,695 8,76,695
ईएमआई (रु.) 32,547 31,266 31,266
रिफाइनेंस लागत (रु.)  00 5,000 20,000
शुद्ध बचत (रु.) 00 1,33,358 1,18,358

  
ब्याज दर की तुलना जरूर करें
रिफाइनेंस कराते समय यह जरूर देखें कि आप जिस बैंक से यह सुविधा ले रहे हैं, वह मौजूदा बैंक से कम ब्याज पर कर्ज दे रहा है या नहीं। रिफाइनेंस की एक लागत होती है। अनुमानित बचत अगर लागत से ज्यादा हो, तभी अपना लोन रिफाइनेंस कराने की सोचें। -आदिल शेट्टी, सीईए, बैंक बाजार

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