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TCS: टीसीएस में तीन साल के भीतर इंसानों के बराबर होंगे एआई कर्मचारी; एन चंद्रशेखरन क्यों कहा ऐसा, जानिए सबकुछ

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 09 Jun 2026 01:35 PM IST
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सार

जानिए कैसे टीसीएस अगले तीन साल में अपने इंसानी कर्मचारियों के बराबर एआई एजेंट तैनात करने जा रही है। एन चंद्रशेखरन के इस बड़े एलान का आईटी सेक्टर पर असर समझने के लिए पूरी खबर पढ़ें।

TCS to Have Equal Number of AI Agents and Human Employees in 3 Years: N Chandrasekaran
टीसीएस की वार्षिक बैठक - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हमारी नौकरियां छीन लेगी या फिर व्यापार के नए रास्ते खोलेगी? इस चर्चा के बीच भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने भविष्य की एक बेहद साफ तस्वीर पेश की है। टीसीएस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सोमवार को एक बड़ा एलान करते हुए कहा है कि अगले तीन साल के भीतर कंपनी में इंसानी कर्मचारियों की संख्या के बराबर ही 'एआई एजेंट' या 'एआई वर्कर' काम कर रहे होंगे। यह बयान स्पष्ट करता है कि एआई अब केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं रह गया है, बल्कि यह भविष्य के बिजनेस ग्रोथ का सबसे अहम चालक बन चुका है।

टीसीएस का एआई रेवेन्यू और निवेश कितनी तेजी से बढ़ रहा है?

टीसीएस की 31वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने बताया कि कंपनी अपने इंटरनल ऑपरेशंस, सॉल्यूशन फ्रेमवर्क और एक्सटर्नल ऑपरेशंस में एआई एजेंट्स पर भारी निवेश कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा, "वह दिन दूर नहीं जब टीसीएस में फिजिकल कर्मचारियों के बराबर ही एआई एजेंट काम करेंगे"। वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें, तो पिछले चार तिमाहियों से कंपनी के एआई रेवेन्यू में लगातार 22 फीसदी से ज्यादा की तिमाही वृद्धि  दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही तक कंपनी का सालाना एआई रेवेन्यू 2.5 अरब डॉलर के विशाल आंकड़े तक पहुंच गया है।

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क्या एआई से आईटी सेक्टर को कोई खतरा है या यह एक बड़ा मौका है?

एआई से आईटी सेक्टर में उथल-पुथल की चिंताओं को चंद्रशेखरन ने एक 'गलतफहमी' करार दिया। उन्होंने शेयरधारकों से स्पष्ट तौर पर कहा, "यह कोई बड़ा खतरा नहीं है, बल्कि एंटरप्राइज आईटी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा मौका है"। उन्होंने एआई के दौर में आईटी कंपनियों के लिए विकास के पांच मुख्य अवसरों का उल्लेख किया:

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  • लेगेसी सिस्टम का आधुनिकीकरण: पुराने तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और बिखरे हुए डेटा को एआई के जरिए आधुनिक बनाना।
  • बिजनेस प्रोसेस का नया डिजाइन: सप्लाई चेन और कस्टमर जर्नी जैसे कोर ऑपरेशंस को एंड-टू-एंड एआई से लैस करना।
  • एआई एजेंट्स का प्रबंधन: सुरक्षा, लागत और नियमों के पालन के लिए एआई का गवर्नेंस सुनिश्चित करना।
  • सॉवरेन एआई का उदय: सरकारें और कड़े नियमों वाले संस्थान अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण चाहते हैं। इसे देखते हुए टीसीएस ने भारत और यूरोप में विशेष पहल शुरू कर दी है।
  • फिजिकल एआई: फैक्ट्रियों और गोदामों में एआई रोबोटिक्स का इस्तेमाल। उदाहरण के तौर पर, एक ग्लोबल कृषि कंपनी के गोदाम में खतरनाक परिस्थितियों की निगरानी के लिए चार-पैरों वाले रोबोट का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है।

भविष्य को लेकर टीसीएस की वित्तीय स्थिति और आउटलुक कैसा है?

बाजार में चल रही चिंताओं के बावजूद, टीसीएस का बिजनेस मोमेंटम बेहद मजबूत है। चंद्रशेखरन के अनुसार, "मार्जिन बरकरार है, रेवेन्यू बढ़ रहा है, और नई डील की पाइपलाइन पहले से कहीं अधिक मजबूत है"। आंकड़ों की बात करें तो, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 4.6% बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 8.8% की छलांग लगाकर 52,820 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस पूरे साल में कंपनी की टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 40.7 अरब डॉलर के पार रही।

एआई की दौड़ में सबसे अहम क्या होगा?

जैसे-जैसे इंटेलिजेंस या एआई तकनीक की लागत कम होगी, दुनिया भर की कंपनियां एआई-इनेबल्ड सिस्टम की तरफ तेजी से शिफ्ट होंगी। एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 75% वैश्विक कंपनियां अगले दो वर्षों में अपना टेक्नोलॉजी बजट बढ़ाने वाली हैं, जिसका मुख्य कारण एआई निवेश ही होगा। अंत में चंद्रशेखरन ने एक बहुत अहम बात कही कि एंटरप्राइज एआई की दुनिया में सबसे दुर्लभ संसाधन 'एआई मॉडल' नहीं होगा, बल्कि 'संदर्भ और भरोसा' होगा। अपने ग्राहकों के साथ दशकों पुराने मजबूत रिश्तों और रेगुलेटरी नियमों की गहरी समझ के दम पर टीसीएस इस नई एआई क्रांति का फायदा उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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