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Chandigarh: तीन नोटिस के बावजूद 724 कर्मचारियों ने नहीं दिया संपत्ति का ब्यौरा, अब कार्रवाई करेगा प्रशासन

रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 08 Aug 2022 12:58 PM IST
सार

यूटी प्रशासन के कार्मिक विभाग ने विभिन्न विभागों में कार्यरत ग्रुप-ए, बी और सी के 724 कर्मचारियों को तीसरा और आखिरी मौका 28 जुलाई तक का दिया था, लेकिन उन्होंने अपनी संपत्तियों का ब्यौरा नहीं दिया।

चंडीगढ़ ओपन हैंड
चंडीगढ़ ओपन हैंड - फोटो : file photo
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विस्तार

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने ग्रुप-ए, बी और सी के 16990 कर्मचारियों से उनकी संपत्ति का ब्यौरा मांगा था। इसके लिए तीन मौके दिए गए लेकिन अब तक 724 कर्मचारियों ने यह जानकारी नहीं दी है। इसमें सबसे ज्यादा पुलिस और इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी हैं। प्रशासन ने अब फैसला किया है कि इन्हें अब कोई मौका नहीं दिया जाएगा। इन कर्मचारियों की पहचान कर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रमोशन भी रोकी जा सकती है।



यूटी प्रशासन के कार्मिक विभाग ने विभिन्न विभागों में कार्यरत ग्रुप-ए, बी और सी के 724 कर्मचारियों को तीसरा और आखिरी मौका 28 जुलाई तक का दिया था, लेकिन उन्होंने अपनी संपत्तियों का ब्यौरा नहीं दिया। आदेश के अनुसार कर्मचारियों और अधिकारियों को अपनी चल अचल संपत्ति की पूरी जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर देनी थी। प्रशासन ने इसके लिए सबसे पहले 31 दिसंबर 2021 तक का समय तय किया था लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।


इसके बाद तिथि बढ़ाई गई और 25 अप्रैल 2022 तक सभी कर्मचारियों के नाम एक सर्कुलर जारी किया गया और कहा गया कि वो चल अचल संपत्ति की पूरी जानकारी पोर्टल पर अपडेट करें। इसके बाद भी विभाग ने पाया कि करीब 2000 कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने ब्यौरा नहीं दिया है। उन्हें 28 जुलाई तक का आखिरी मौका दिया गया और सभी विभागों के सचिव, बोर्ड और कॉरपोरेशन के प्रमुख आदि को पत्र लिखा गया। अब तीसरा मौका भी खत्म हो चुका है और अब तक 724 कर्मचारियों ने जानकारी नहीं दी है। इनमें सबसे अधिक चंडीगढ़ पुलिस, प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं। 

इन कर्मचारियों का रुकेगा प्रमोशन

कार्मिक विभाग की सचिव नितिका पवार ने कहा कि संबंधित विभाग उन कर्मचारियों पर नियमों के तहत कार्रवाई कर सकता है जिन्होंने संपत्ति का ब्यौरा अब तक नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र के आदेश के अनुसार प्रमोशन और डेपुटेशन के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस नहीं मिलेगा। वो कर्मचारी ट्रेनिंग प्रोग्राम, सेंसिटिव पोस्ट असाइनमेंट के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। प्रशासन के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जानकारी नहीं देने वालों की पहचान कर नियमों के तहत जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उन्हें प्रमोशन नहीं मिल पाएगा, क्योंकि उस वक्त देखा जाएगा कि इन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है।

प्रशासन में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें

प्रशासन के विभागों में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें आ चुकी हैं। हाल ही में 12 जुलाई को प्रशासन के बिजली विभाग के जेई को सीबीआई ने बिजली मीटर कनेक्शन के एवज में 8000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इससे पहले 18 मई को चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीनियर असिस्टेंट शमशेर सिंह को दस हजार रुपये रिश्वत लेते सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इससे पहले भी कई कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके हैं। इसके अलावा अधिकारियों पर भी आय से अधिक संपत्ति होने के आरोप लगते रहते हैं इसलिए प्रशासन चाहता है कि विभिन्न विभागों में ग्रुप-ए, बी और सी के जितने भी कर्मचारी और अधिकारी हैं उनकी संपत्तियों का ब्यौरा एकत्र कर लिया जाए ताकि जरूरत पर इसे प्रस्तुत किया जा सके। 
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