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EV Policy: पेट्रोल टू-व्हीलर बंद करने के फैसले पर सवाल... कारण-महंगे हैं ईवी, ज्यादातर कंपनियां बनाती भी नहीं

रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 01 Oct 2022 02:18 PM IST
सार

ईवी पेट्रोल-डीजल से 50 से 60 फीसदी महंगी है। 10-12 लाख से कम की गाड़ियां नहीं हैं। ईवी को लेकर अभी मार्केट भी पूरी नहीं बनी है। बैटरी में आग लगने जैसी कई घटनाओं के बाद लोग भी अभी पूरी तरह से ईवी खरीदने के लिए तैयार नहीं हुए हैं।

Electric Vehicle
Electric Vehicle - फोटो : Pixabay
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विस्तार

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति जारी कर दो साल बाद पेट्रोल टू-व्हीलर को बंद करने का फैसला लिया है। इससे शहर की जनता और ऑटोमोबाइल डीलर्स चिंता में हैं। लोग ईवी के दाम को लेकर चिंतित हैं तो डीलर्स का कहना है कि ज्यादातर नामी कंपनियां अभी ईवी बाइक्स बनाती ही नहीं हैं। अभी मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है। इसे लेकर फेडरेशन ऑफ चंडीगढ़ रीजन ऑटोमोबाइल डीलर्स ने प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित को एक ज्ञापन भेजा है और फैसले की समीक्षा करने की मांग की गई है।



प्रशासन के चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) ने ईवी नीति तैयार की है। पहले साल 35 फीसदी, दूसरे साल 70 फीसदी और उसके बाद सिर्फ ईवी टू-व्हीलर का ही आएलए में रजिस्ट्रेशन करने की बात कही गई है।


फेडरेशन ऑफ चंडीगढ़ रीजन ऑटोमोबाइल डीलर्स के अध्यक्ष रंजीव दहुजा ने कहा कि प्रशासन की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति के कई प्रावधान बहुत अच्छे है। यह लोगों को प्रोत्साहित करेगा कि वह इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदें। ईवी को भी बढ़ावा मिलेगा। इसमें दो साल बाद पेट्रोल टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन को बंद करने की बात कही गई है। ये प्रैक्टिकल नहीं है, क्योंकि वाहनों का प्रोडक्शन कंपनियों के हाथ में है और वह केंद्र सरकार की नीति के अनुसार कार्य करती हैं। वर्तमान में ईवी की मांग और आपूर्ति में काफी अंतर है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने कुल ढाई लाख गाड़ियां बनीं, उसमें सिर्फ 6000 इलेक्ट्रिक थीं। सिर्फ दो फीसदी। प्रशासन को समझना चाहिए कि ईवी का अभी तेज गति से प्रोडक्शन ही नहीं हो रहा है। वह उस पर पाबंदी लगा रहे हैं,
जिस पर डीलर्स का कोई कंट्रोल ही नहीं है।

ईवी की मार्केट अभी तैयार नहीं, बैटरी समेत कई समस्याएं बरकरार

नाम न छापने की शर्त पर शहर के एक अन्य ऑटोमोबाइल डीलर ने बताया कि ईवी पेट्रोल-डीजल से 50 से 60 फीसदी महंगी है। 10-12 लाख से कम की गाड़ियां नहीं हैं। ईवी को लेकर अभी मार्केट भी पूरी नहीं बनी है। बैटरी में आग लगने जैसी कई घटनाओं के बाद लोग भी अभी पूरी तरह से ईवी खरीदने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। मारुति जैसी कंपनियों ने अभी तक अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ी लांच नहीं की है। ऐसे में जनता पर जबरदस्ती क्यों दबाव बनाया जा रहा है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार प्रशासन खुद रजिस्ट्रेशन को बंद नहीं कर सकता। लोगों को इंसेंटिव देकर प्रोत्साहित करना चाहिए। एकाएक पेट्रोल टू-व्हीलर को बंद करने से डीलर्स को भी नुकसान होगा और लोगों पर भी बोझ पड़ेगा। बता दें कि कुछ दिन पहले डीलर्स का एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद से भी मिला था।

ईवी को लेकर मुख्य चिंताएं

  • मांग और आपूर्ति में भारी अंतर
  • इलेक्ट्रिक गाड़ियां डेढ़ गुना महंगी
  • कई कंपनियां ईवी टू-व्हीलर बनाती ही नहीं
  • बैटरी से जुड़ी समस्याएं और पार्ट्स की दिक्कत
  • लोग पूरी तरह अभी भी ईवी को अपनाने के लिए तैयार नहीं

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