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Iqbal Singh Laalpura: पहली बार एक सिख बना संसदीय बोर्ड का सदस्य, पंजाब में जमीन मजबूत करने में जुटी भाजपा

सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 18 Aug 2022 02:09 PM IST
सार

पंजाब पुलिस से रिटायर होने के बाद इकबाल सिंह लालपुरा 2012 में भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था। वर्ष 2021 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी सौंपी।

पीएम नरेंद्र मोदी के साथ इकबाल सिंह लालपुरा।
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ इकबाल सिंह लालपुरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब के रोपड़ जिले के रहने वाले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा को संसदीय बोर्ड का सदस्य नियुक्त कर भाजपा ने सिख समुदाय के बीच अपनी पैठ को मजबूत करने के साथ साथ सूबे में अपनी जमीन मजबूत करनी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को अपने संसदीय बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार किसी सिख नेता को जगह दी है। पार्टी की ओर से संसदीय बोर्ड में शामिल ग्यारह सदस्यों में इकबाल सिंह लालपुरा का नाम शामिल है।



इकबाल सिंह लालपुरा पंजाब का जाना माना नाम रहा है। वे पूर्व आईपीएस हैं। रिटायर होने के बाद लालपुरा साल 2012 में बीजेपी में शामिल हुए थे और फिलहाल राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैं। संसदीय बोर्ड में लालपुरा को शामिल किए जाने के पीछे कई राजनीतिक मायने भी हैं। इकबाल सिंह लालपुरा सिख मशनरी के अलावा सिख गुरुओं पर काफी किताबें लिख चुके हैं। 


पंजाब में भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 117 में से सिर्फ दो सीट ही जीती थी और पार्टी बुरी तरह से हाशिये पर चली गई थी। हालांकि चुनावों से पहले भाजपा ने दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान मनजिंदर सिंह सिरसा, पूर्व मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी, पूर्व विधायक फतेहजंग बाजवा समेत काफी सिख नेताओं को पार्टी में शामिल कर लिया था। 

सिखों को साथ जोड़ने में जुटी भाजपा

1- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से श्री गुरु तेगबहादुर जी का 400 साल शहीदी पर्व पर लाल किले से मनाकर सिखों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की तरफ कदम उठाया।
2- प्रधानमंत्री मोदी ने 9 जनवरी, 2021 को सिख समुदाय के हित में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह के चारों बेटों को श्रद्धांजलि देने के लिए 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर यह घोषणा की।
3-प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा शुभ दिन गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर की। उन्होंने अपने संबोधन में क्षमा भाव शब्द का इस्तेमाल किया। 
4- अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप व 46 अफगान सिखों को भी भारतीय वायुसेना के विमान से सुरक्षित भारत लाया गया।
5- अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 05 अगस्त, 2021 को सिख दंगा पीड़ितों के लिए एक पुनर्वास पैकेज की घोषणा की। इसमें प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 3.50 लाख रुपये और घायलों को 1.25 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया। 
6- 1984 के सिख दंगों के आरोपियों को सजा दिलाने, एसआईटी का गठन, 35 वर्षों के बाद सिख दंगों के पीड़ितों को अनुदान राशि भी स्वीकृत की गई।
7- सरकार ने सिखों की काली सूची को खत्म करके उन्हें देश और समाज से जोड़ने का काम किया है। इससे एक सकारात्मक संदेश सिख समुदाय के बीच गया। यूरोप और अमेरिका में कई वर्षों से राजनीतिक संरक्षण लेने वाले 50 हजार से अधिक सिख नौजवानों की चिंता को खत्म किया।  
8- श्री करतारपुर साहब पाकिस्तान गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए कॉरिडोर खोला गया। पीएम मोदी खुद करतारपुर कॉरिडोर पहुंचे और नतमस्तक हुए। 
9- केंद्र सरकार ने देश के धार्मिक दृष्टि से पांच बड़े शहरों के आधुनिकीकरण की योजना बनाई। सूची में अमृतसर का नाम जोड़ा गया, क्योंकि वहां सिख आस्था का प्रतीक, विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर मौजूद है। 
10- केंद्र सरकार ने सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी के 550 वें प्रकाश पर्व के अवसर पर देश ही नहीं पूरी दुनिया में कार्यक्रमों का आयोजन किया। दुनिया के हर देश और देश के हर जिले में इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। 
11- गुरु गोबिंद सिंह जी के 350 वें प्रकाश पर्व के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए और  सम्मान में एक सिक्का भी जारी किया। 
12- 4 मार्च, 2019 को गुजरात के जामनगर में  श्री गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल के नए 750 बेड एनेक्सी को राष्ट्र को समर्पित किया।
13-  पंज तख्त एक्सप्रेस ट्रेन की घोषणा कर सिख संगत को जोड़ा गया। यह ट्रेन श्रद्धालुओं को सिखों के पांचों तख्त के दर्शन कराती है।
14- अमृतसर स्थित गुरुनानक देव विश्वविद्यालय में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटर फेथ स्टडीज की स्थापना की गई। इसके लिए 67 करोड़ रुपये दिए गए।
15- पंजाब के इकबाल सिंह लालपुरा को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का दूसरी बार चेयरमैन नियुक्त किया गया।

लालपुरा को संसदीय बोर्ड में लेकर पंजाब का मान बढ़ाया : चुघ

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ का कहना है कि भाजपा की तरफ से पंजाब जैसे छोटे से प्रदेश से सिख समाज के नेता इकबाल सिंह ललपुरा को संसदीय बोर्ड का चेयरमैन बनाकर पंजाब को बहुत बड़ा मान दिया है। सिख समाज के लिए गर्व की बात है कि लालपुरा संसदीय बोर्ड में भी हैं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन भी। चुघ का कहना है कि पीएम मोदी हमेशा सिख समाज के साथ गहरा रिश्ता कायम कर चलते रहे हैं। यही वजह है कि वह लगातार अपने निवास पर सिख बुद्धिजीवियों के साथ मीटिंग करते रहते हैं और उनकी भावनाओं को समझते हैं। यह पहली बार हुआ है कि जिस लाल किले से श्री गुरु अर्जुन देव जी के लिए फरमान जारी हुआ था, उसी लाल किले में उनका पर्व मनाया गया। हमारे पंजाब के लिए गर्व की बात है कि लालपुरा संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं।

मेरे लिए बड़ी जिम्मेदारी, पूरी करने की होगी कोशिश- लालपुरा

इकबाल सिंह लालपुरा का कहना है कि संसदीय बोर्ड में उनका चुने जाना काफी बड़ी जिम्मेदारी है और इसको निभाना भी होगा। भाजपा ने एक सिख नेता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर पूरी कौम का मान बढ़ाया है। पूरी कोशिश होगी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाऊं।

पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं लालपुरा 

इकबाल सिंह लालपुरा जब पंजाब पुलिस में थे तो उनको जरनैल सिंह भिंडरांवाला को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अप्रैल 1981 में उन्होंने भिंडरांवाला को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। दरअसल, पंजाब को भारत से अलग करने की साजिश रचने वाले जरनैल सिंह भिंडरांवाला ने अपनी गिरफ्तारी के लिए शर्त रखी थी कि सिख धर्म का पालन करने वाला (अमृतधारी) पुलिस अधिकारी ही उसे गिरफ्तार कर सकता है। इसके बाद इकबाल सिंह लालपुरा, एसएसपी जरनैल सिंह और एसडीएम बीएस भुल्लर की तीन सदस्यीय टीम, भिंडरांवाला की गिरफ्तारी के लिए बनाई गई थी। 

1978 में सिखों और निरंकारियों के बीच हुए टकराव में भी वे जांच अधिकारी बनाए गए थे। वे लंबे समय तक पंजाब की सीआईडी में बतौर वरिष्ठ अधिकारी काम चुके हैं। पुलिस में बतौर अधिकारी काम करने के साथ उन्होंने कई किताबें भी लिखीं। वह अब तक 14 किताबें लिख चुके हैं। राष्ट्रपति का पुलिस पदक, शिरोमणि सिख साहित्यकार पुरस्कार और सिख स्कॉलर अवॉर्ड से नवाजे जा चुके लालपुरा ने सिख गुरुओं पर काफी किताबें लिखी हैं।  

रिटायर होने के बाद लालपुरा 2012 में भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था। वर्ष 2021 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी सौंपी। 28 जनवरी 2022 को उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए इस संवैधानिक पद से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा ने पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्हें रूपनगर से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि वह चुनाव हार गए थे। इसके बाद 12 अप्रैल 2022 को अल्पसंख्यक मंत्रालय ने उन्हें दोबारा चेयरमैन नियुक्त किया। 
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