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Chandigarh: निगम में शामिल 13 गांवों की सफाई का काम निजी हाथों में देने की तैयारी, सदन में रखा जाएगा प्रस्ताव

नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 03 Oct 2022 09:02 AM IST
सार

सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था सबसे पहले गांवों से ही शुरू हुई थी। इसके लिए निगम ने बोलेरो गाड़ियां खरीदी थीं लेकिन छोटी व संकरी गलियों के चलते गाड़ियां अंदर नहीं जा सकीं। इस कारण रेहड़ी से घरों से कचरा लाकर गाड़ियों में डाला जाने लगा।

चंडीगढ़ नगर निगम।
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विस्तार

चार साल पहले नगर निगम में शामिल सभी 13 गांवों में सफाई का काम अब निजी हाथों में देने की तैयारी है। अगले दो साल में ज्यादातर नियमित सफाई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए निगम ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों का डाटा तैयार कर लिया गया है। इसे सदन की बैठक में रखकर सफाई का जिम्मा निजी कंपनी के हाथों में सौंपने का प्रस्ताव पेश किया जाएगा।



शहर में दक्षिणी सेक्टरों में सफाई का काम लायंस कंपनी के पास है, वहीं उत्तरी सेक्टरों में सफाई का काम नगर निगम के कर्मचारी करते हैं। वर्ष 2018 में 13 गांवों को नगर निगम में शामिल कर दिया गया था। इस दौरान निगम ने अपने सफाईकर्मियों को वहां लगा दिया लेकिन लोग सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थे। 


सरपंच व्यवस्था खत्म होने के बाद उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं था क्योंकि पार्षदों के पास भी यह क्षेत्र नहीं था। वर्ष 2021 में चुनाव से पहले वार्डों का परिसीमन किया गया। इसके बाद वार्डों के अंतर्गत गांव आ गए। अब पार्षद भी सदन में मुद्दे को जोरशोर से उठाने लगे। ऐसे में अब निगम ने सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर ली है।

टेंडर प्रक्रिया में लायंस कंपनी नहीं ले सकेगी हिस्सा
निगम इस बार एक कंपनी एक काम का नियम लागू करने जा रहा है। ऐसे में लायंस कंपनी इस टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगी। उसके पास पहले से ही दक्षिणी सेक्टरों की सफाई का जिम्मा है। इसके लिए निगम लायंस कंपनी को लगभग पौने चार करोड़ रुपये हर माह देता है। इसमें अपनी मंडी की सफाई व्यवस्था को भी जोड़ा गया है। वहीं, सेक्टर-26 स्थित सब्जी मंडी की सफाई का काम भी लायंस कंपनी के पास है। 

अलग-अलग कचरा लेने की व्यवस्था गांवों से हुई थी शुरू
सूखा और गीला कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था सबसे पहले गांवों से ही शुरू हुई थी। इसके लिए निगम ने बोलेरो गाड़ियां खरीदी थीं लेकिन छोटी व संकरी गलियों के चलते गाड़ियां अंदर नहीं जा सकीं। इस कारण रेहड़ी से घरों से कचरा लाकर गाड़ियों में डाला जाने लगा। कई बार इस व्यवस्था को लेकर लोगों ने निगम की कार्य प्रणाली पर सवाल भी खड़े किए।   
गांव में सफाई व्यवस्था को मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है। काफी संख्या में नियमित सफाईकर्मी अगले दो सालों में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सफाई का काम प्रभावित न हो इसलिए अभी से तैयारी कर रहे हैं। - सरबजीत कौर, मेयर।
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