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जोर-जोर से रोने की आ रही थी आवाज, लोग पहुंचे तो झूले में मिली मासूम, बेरहम मां-बाप ने लावारिस छोड़ा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 11 Dec 2020 09:11 PM IST
स्नेहालय में मिली बच्ची।
स्नेहालय में मिली बच्ची। - फोटो : अमर उजाला
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अगर घर में बेटी जन्मी है तो लोग इसे लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी माता-पिता हैं, जिन्हें अपनी ही बेटी बोझ लगने लगती है। एक ऐसा ही मामला चंडीगढ़ के मलोया स्थित स्नेहालय के पास आया है, जहां एक छह महीने की मासूम बच्ची को लावारिस छोड़ दिया गया। लोग कह रहे हैं कि ‘ अगर लावारिस ही छोड़ना था तो नौ महीने कोख में क्यों रखा’। मामले की मलोया थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। 
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दरअसल हुआ यूं कि गुरुवार को मलोया स्थित स्नेहालय के बाहर लगे झूले में एक बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। बच्ची की आवाज सुनकर सिक्योरिटी समेत अन्य लोग झूले के पास पहुंचे। झूले में एक मासूम बच्ची रो रही थी। पहले तो आसपास माता-पिता की तलाश की गई लेकिन वहां कोई नहीं मिला। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पर मलोया थाना प्रभारी चिरंजी लाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बच्ची का जीएमएसएच-1 में मेडिकल करवाया। बच्ची स्वास्थ्य है। इसके बाद पुलिस ने कागजी कार्रवाई कर बच्ची को स्नेहालय में सौंप दिया। 



नहीं है सीसीटीवी कैमरा 
बता दें कि मासूम के मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे को खंगालना शुरू किया ताकि बच्ची के माता-पिता का पता चल सके। लेकिन जिस जगह बच्ची को लावारिस छोड़ा गया है, वहां कोई कैमरा नहीं लगा है। यही वजह है कि माता-पिता की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि माता-पिता की तलाश की जा रही है। 

सात वर्ष तक की हो सकती है कारावास
मामले में मलोया थाना पुलिस ने अज्ञात माता-पिता के खिलाफ आईपीसी 317 (शिशु को लावारिस छोड़ना) के तहत मामला दर्ज किया है। इस धारा के अंतर्गत बारह वर्ष से कम आयु के शिशु के पिता या माता होते हुए उसे किसी स्थान में लावारिस छोड़ देने पर सात वर्ष तक की कारावास या जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 

पहले भी मिल चुके हैं लावारिस नवजात
बता दें कि इससे पहले भी मासूम को लावारिस छोड़ने के मामले लगातार सामने आ जा रहे हैं। वर्ष 2017 में सेक्टर-31/32 लाइट प्वाइंट के साथ लगते फुटपाथ पर पांच दिन की नवजात लावारिस हालत में मिली थी। वहीं 2016 में मनीमाजरा स्थित सिविल अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड के सामने कपड़े में लिपटा चार दिन का नवजात मिला था।

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