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अमर उजाला पड़ताल: प्रशासन के दावे झूठे, सुखना चो में गिर रहा गंदा पानी

रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 17 Aug 2022 04:26 PM IST
सार

सुखना की सेहत की दृष्टि से खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला और किशनगढ़ काफी महत्व रखते हैं। ये गांव सुखना लेक के पास हैं लेकिन पिछले 15 वर्षों में इन्हीं गांवों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं। कैंबवाला में अब कई कच्चे अवैध तबेले खुल गए हैं लेकिन उनके यहां से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। 

सुखना चो के पास बनी झुग्गियां।
सुखना चो के पास बनी झुग्गियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

सुखना लेक को साफ रखने का यूटी प्रशासन दावा करता है लेकिन सच्चाई यह है कि सुखना में अभी भी गंदा पानी पहुंच रहा है। कैंबवाला के पास से गुजर रही चो में लगातार गंदा पानी गिराया जा रहा है। चो में सफाई भी नहीं हुई है, जिसकी वजह से झाड़ियां उग आई हैं। कैंबवाला में पुल के पास कुछ पेड़ों को काटकर चो के अंदर गिरा दिया गया है, जो चो के पानी को रोक रहा है। अमर उजाला ने शुक्रवार को कैंबवाला के पास से होकर गुजर रही सुखना चो की पड़ताल की। तस्वीरों में देखिए...




                               झुग्गियां बेला जाने वाले रास्ते पर बनी अवैध डेरियों का गंदा पानी।

किनारे पर बने घर, चो में गिर रहा सीवर का पानी
पड़ताल की शुरुआत कांसल रिजर्व फॉरेस्ट एरिया के मुख्य गेट के पास से हुई। थोड़ा आगे जाने पर देखा गया कि प्राचीन कांसा मंदिर के पास अवैध रूप से कई झुग्गियां बन गई हैं। यहां काफी संख्या में लोग रह रहे हैं। सुखना चो से के मुहाने पर कई कच्चे मकान बना दिए गए हैं। इन मकानों से निकला सीवर का पानी भी चो में गिराया जा रहा है। 


टीम ने देखा कि चो के किनारे ही टेंपरेरी टॉयलेट बने हैं और उसका गंदा पानी सीधे चो में गिराया जा रहा है। यहां बने मकान सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक हैं, क्योंकि सुखना चो इन कच्चे घरों को छूकर निकल रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये घर ढलान पर बने हैं। ऐसे में तेज बारिश होने पर इनके बहने का भी खतरा है। ये कच्चे घर सुखना चो के रास्ते में अवरोध भी पैदा कर रहे हैं।

कैंबवाला पुल के पास चो में गिर रहा गंदा पानी, पास के पत्थर भी हुए काले 
एक तरफ प्रशासन की ओर से दावे किए जाते हैं कि चो में कहीं से भी गंदा पानी नहीं गिर रहा है जबकि हकीकत यह है कि सिर्फ कांसल फॉरेस्ट के गेट से कैंबवाला के पुल के बीच ही तीन जगह गंदा पानी सीधे चो में गिराया जा रहा है। कैंबवाला पुल के पास साफ देखा भी जा सकता है। गंदे पानी की वजह से आसपास के पत्थर भी काले हो चुके हैं। वहीं पर कई पेड़ भी काटकर चो के अंदर ही गिरा दिए गए हैं, जो पानी के बहाव को रोकने का काम कर रहे हैं। आगे जाते हुए चो के अंदर काफी बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले काफी समय से चो की सफाई नहीं हुई है।

                                 सुखना चो में गिर रहे गंदे पानी से पत्थर भी काले पड़े।

लाल डोरे से बाहर खुले कई अवैध तबेले, सीवर निकासी का नहीं कोई प्रबंध 
सुखना की सेहत की दृष्टि से खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला और किशनगढ़ काफी महत्व रखते हैं। ये गांव सुखना लेक के पास हैं लेकिन पिछले 15 वर्षों में इन्हीं गांवों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण हुए हैं। कैंबवाला में अब कई कच्चे अवैध तबेले खुल गए हैं लेकिन उनके यहां से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। 

बारिश के दिनों में वह पानी भी सुखना चो में ही जाकर मिलता है। इसे लेकर स्थानीय कृष्ण कुमार ने प्रशासन के अधिकारियों को शिकायत भी की हुई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हाल में सुखना लेक के अंदर कई मछलियां मरी हुई पाई गई थीं। कृष्ण कुमार ने ताजा शिकायत में मछलियों के कारण यहां से निकले गंदे पानी को बताया था। उन्होंने बताया कि गांव कैंबवाला से गांव झुग्गियां बेला जाने वाले रास्ते पर भी कई अवैध डेयरियां बन गई हैं। यहां का गंदा पानी रास्ते पर भी गिराया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों से मांग की है कि इसे रोका जाए।

                                         पाइप लगाकर सुखना चो में गिराया जा रहा गंदा पानी।

जिनके पास 15 से ज्यादा गाय-भैंसे, लेनी होगी मंजूरी, नहीं तो करेंगे कार्रवाई
पर्यावरण विभाग के निदेशक देबेंद्र दलाई ने बताया कि शहर के डेयरी मालिकों के लिए हमने एक नियम बनाया है। जिनके पास भी 15 से ज्यादा गाय-भैंसे होंगी, उन्हें चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति से एक मंजूरी सर्टिफिकेट लेना होगा। ये उन्हें तब मिलेगा जब वो बताएंगे कि गाय-भैंसों के मलमूत्र का निस्तारण वो कैसे करते हैं। 

विभाग ने इसके लिए बीते दिनों एक वर्कशॉप भी लगाई थी और डेयरी मालिकों को प्रशिक्षण दिया है। हमारे पास करीब 300 डेयरी मालिकों की जानकारी है, जिनके पास 15 से ज्यादा गाय भैसें हैं। इन सभी को सर्टिफिकेट के लिए सीपीसीबी के पास आवेदन करना होगा। जो ऐसा नहीं करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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