सुरजेवाला का हमला: हरियाणा का भर्ती फर्जीवाड़ा व्यापम से बड़ा घोटाला, अब पर्ची-खर्ची से आगे बात अटैची तक पहुंची

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 23 Nov 2021 04:39 PM IST

सार

भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को हरियाणा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाला और भर्ती फर्जीवाड़े को व्यापम से भी बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में मामले की जांच की मांग की।
प्रेसवार्ता करते रणदीप सिंह सुरजेवाला।
प्रेसवार्ता करते रणदीप सिंह सुरजेवाला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हरियाणा में भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने सरकार को घेरा। सुरजेवाला ने तुरंत प्रभाव से हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस मामले की जांच करने की मांग उठाई। 
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चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता में रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अकेले एचसीएस अधिकारी ऐसा घोटाला नहीं कर सकता। इसमें बड़े अधिकारी और नेता भी शामिल हो सकते हैं। सरकार से सात सवाल पूछते हुए कांग्रेस नेता ने कहा आयोग में सारा काम निजी कंपनियों से कराया जा रहा है। इसको बंद किया जाना चाहिए। सुरजेवाला ने आयोग के पुनर्गठन की मांग भी उठाई। उन्होंने का कि एक एक्सपर्ट पैनल भी गठित किया जाए, जो नौकरियों के मामले में सुधार को लेकर सलाह दे सकें।


व्यापम से भी बड़ा घोटाला
हरियाणा के भर्ती फर्जीवाड़े को रणदीप सुरजेवाला ने व्यापम से भी बड़ा घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि अब ये पर्ची-खर्ची से बढ़कर अटैची तक पहुंच गया है। एचपीएससी (हरियाणा लोक सेवा आयोग) अब हरियाणा पोस्ट सेल काउंटर बन गया है। 32 से अधिक पेपर लीक और भर्ती घोटाले को उजागर कर हम मीडिया के माध्यम से जनता के सामने रखते रहे लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

सुरजेवाला ने कहा कि भर्ती फर्जीवाड़ा देश का सबसे बड़ा रोजगार घोटाला है। सीएम मनोहर लाल तीन जुमले उछालते हैं, जिसमें पारदर्शिता, मेरिट और बिना पर्ची-खर्ची शामिल है। उन्होंने सीएम मनोहर लाल से सात बिंदुओं पर जवाब मांगा। एचपीएससी को हरियाणा पोस्ट सेल काउंटर क्यूं बनाया, जहां हर भर्ती का रेट हरियाणा में तय है। 

अनिल नागर सरकार का चहेता अधिकारी है जो कई मुख्य पदों पर रहा है। मनोहर लाल ने एचएसएससी और एचपीएससी का निजीकरण किया हैं, जहां निजी कंपनियां पेपर बनाने से लेकर रिजल्ट तक का काम कर रही हैं। अगर निजी कंपनियों को ये काम करना है तो सरकार की जरूरत क्या है।

डेंटल सर्जन भर्ती के लिए 25-25 लाख रुपये लिए जा रहे हैं. जिनमें आठ का एचसीएस ने भी कबूल किया है। सवाल ये है कि ऐसे कितनी भर्तियां की गईं और इसका पैसा किस -किस के पास गया। 

जितनी ओएमआर शीट के बारे में अनिल नागर ने कबूला वो बरामद नहीं हुई तो कहां गई। स्ट्रॉन्ग रूम की जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ आईएएस को देने के बजाय चार साल पुराने एचसीएस को दी गई। 

निगेटिव मार्किंग होने के बावजूद भी 68.5 प्रतिशत मेरिट आई। क्या ये चार साल पुराना डिप्टी सेक्रेटरी लेवल का अधिकारी कर सकता है। सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि क्या वरिष्ठ अधिकारी और सरकार की सांठगांठ के बिना ये हो सकता है। 

एचपीएससी में जहां मैं या सीएम साहब भी नहीं जा सकते, वहां नौकरी बेच गिरोह कैसे पहुंच। ओएमआर शीट लेने और हेराफेरी करने और इस दौरान सीआईडी और चेयरमैन ने क्यूं आंखों बंद कर रखी। 

विजिलेंस के अनुसार जसबीर मालिक को ऑनलाइन एप्लीकेशन स्कैनिंग का ठेका मिला। वही कैंडिडेट को लेकर आ रहा था। मनोहर सरकार जब भी रंगे हाथों पकड़ी जाती है तब कुछ दिन खबरें चलवाती है फिर लीपापोती कर लेती है। 

सुरजेवाला ने रखी पांच मांगें
  • एचएसएससी और एचपीएससी को बर्खास्त करें, ताकि निष्पक्ष जांच हो 
  • अनिल नागर की पोस्टिंग के दौरान हुई सभी भर्तियों को रद्द करें
  • पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की निगरानी में एसआईटी मामले की जांच करे
  • एचपीएससी और एचएसएससी का पुनर्गठन हो और एक्सपर्ट्स का पैनल बनाया जाए, जिसकी सलाह को सार्वजनिक किया जाए 
  • सीएम माफी मांगे कि सात साल से जो पर्ची-खर्ची को हटाने का झूठा वादा युवाओं से कर रहे हैं
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