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करतार सिंह सराभा: वह स्वतंत्रता संग्रामी जिसने रहम की अपील ठुकरा चूमा था फंदा, भगत सिंह मानते थे नायक

संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Mon, 15 Aug 2022 08:31 AM IST
सार

20 हजार गदरी योद्धाओं को इकठ्ठा कर अंग्रेजों पर प्रहार करने के लिए लामबंद किया लेकिन अंग्रेजों के मुखबिर किरपाल सिंह ने ब्रिटिश आर्मी के अफसर रिसालदार गंडा सिंह को गदरियों की योजना और ठिकाने की सूचना दे दी। करतार सिंह सराभा को उसके गदरी साथी हरनाम सिंह टुंडीलाट और जगत सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।

शहीद करतार सिंह सराभा।
शहीद करतार सिंह सराभा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आजादी की लड़ाई में 18 की उम्र में शहीद बंगाल के खुदीराम बोस के बाद शहीद करतार सिंह सराभा का नाम आता है, जिन्होंने रहम की अपील ठुकरा कर 19 वर्ष की आयु में फांसी का फंदा चूमा था। उन्होंने कहा कि था कि अगर हजार जिंदगियां भी मिले तो उसे देश के लिए कुर्बान कर दूं। 24 मई 1896 को लुधियाना के गांव सराभा के धनवान किसान मंगल सिंह और मां साहिब कौर के घर जन्मे करतार सिंह सराभा को अंग्रेजों ने 16 नवंबर 1915 को लाहौर की सेंट्रल जेल में फांसी पर लटका दिया था।



आजादी के महानायक शहीद भगत सिंह करतार सिंह सराभा को अपना गुरु मानते थे और हमेशा उनकी तस्वीर जेब में रखते थे। मालवा खालसा हाई स्कूल लुधियाना से मिडिल क्लास पास करने के बाद उन्होंने ओडिशा के कटक के रविनशॉ कॉलेजिएट स्कूल से दसवीं पास की थी। करतार सिंह सराभा 1912 में शिप के जरिये अमेरिका के सान फ्रांसिस्को स्थित बर्कले यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने गए और वहां जाकर गदर पार्टी में शामिल हो गए। 


उन्होंने गदर अखबार भी चलाया और बतौर पत्रकार उसमें काम किया। वहीं हथियार चलाना और बम बनाना सीखा। करतार सिंह सराभा ने इतनी छोटी उम्र में हवाई जहाज चलाना भी सीख लिया था। अक्तूबर 1915 को सराभा और गदर पार्टी के अन्य सदस्य अमेरिका से कोलंबो के जरिये कोलकाता आ गए। भारत आकर अंग्रेजों के खिलाफ महासंग्राम की योजना तैयार की।

20 हजार गदरी योद्धाओं को इकठ्ठा कर अंग्रेजों पर प्रहार करने के लिए लामबंद किया लेकिन अंग्रेजों के मुखबिर किरपाल सिंह ने ब्रिटिश आर्मी के अफसर रिसालदार गंडा सिंह को गदरियों की योजना और ठिकाने की सूचना दे दी। करतार सिंह सराभा को उसके गदरी साथी हरनाम सिंह टुंडीलाट और जगत सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई और साथ ही रहम की अपील का सुझाव भी दिया गया लेकिन करतार सिंह सराभा ने रहम की अपील से इंकार करते हुए कहा कि अगर मुझे हजार जिंदगी और मिले तो देश के लिए कुर्बान कर दूं।

बादल सरकार की वादाखिलाफी चचेरी बहन ने किया था भूख हड़ताल का एलान
आजादी के ठीक 50 साल बाद वर्ष 1997 में बनी अकाली दल की सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पहली कैबिनेट मीटिंग में शहीद करतार सिंह सराभा के खंडहर बन चुके दो मंजिला पुश्तैनी मकान को उसी पुराने आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चर के हिसाब से बनाने का एलान किया था। इसके अलावा गांव में शहीद के यादगारी स्मारक और लाइब्रेरी बनाने की घोषणा भी की थी। लेकिन बादल सरकार एलान करके भूल गई। 

बादल सरकार की वादाखिलाफी से खफा शहीद सराभा की चचेरी बहन पंजाब माता के नाम से विभूषित बीबी जगदीश कौर ने 15 अगस्त 2001 में मुख्यमंत्री आवास पर भूख हड़ताल करने का एलान कर दिया था। बीबी जगदीश कौर के इस एलान ने सरकार और अफसरशाही की हालत बिगाड़ दी थी। आनन फानन तत्कालीन बादल सरकार ने शहीद के पुश्तैनी मकान की मरम्मत और गांव के चौक पर यादगारी स्मारक का काम शुरू करवा दिया। 

बीबी जगदीश कौर ने भी भूख हड़ताल वापस ले ली। सरकार ने शहीद सराभा के पुश्तैनी मकान को स्मारक घोषित कर पुरातत्व विभाग के हवाले कर दिया। इसके बाद पंजाब में सरकारें बदलती रहीं लेकिन शहीद के पुश्तैनी मकान की हालत नहीं बदली। मकान की मरम्मत के बाद दूसरी मंजिल का काम अधूरा छोड़ दिया गया, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है। पिछले कई वर्षो में रखरखाव की कमी के कारण बारिश के पानी ने मकान की दीवारों को खोखला कर दिया है। सभी दीवारें सीलन से भरी हैं। पुरातत्व विभाग के अधीन होने के कारण ग्रामीण अपने स्तर पर मकान की मरम्मत नहीं करवा सकते।

सरकार ने शहीद को भुला दिया
शहीद करतार सिंह सराभा को राष्ट्रीय शहीद घोषित करवाने के लिए 25 साल से संघर्ष कर रहे बलदेव सिंह देव सराभा ने कहा कि सरकार ने शहीद के पुश्तैनी मकान और यादगार स्मारक को भुला दिया है। उन्होंने 2019 में करतार सिंह सराभा को राष्ट्रीय शहीद घोषित करने की मांग के लिए 23 मार्च को भूख हड़ताल की थी। 13 दिन बाद उन्होंने केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म की थी लेकिन आज तक सरकार ने करतार सिंह सराभा को राष्ट्रीय शहीद घोषित नहीं किया लेकिन उनका संघर्ष जारी है।
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