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केंद्रीय गृहमंत्री को भूपेश बघेल का पत्र:मांगी 2जी एथेनॉल रिफाइनरी, लिखा-धान फसल के अवशेष से होगा उत्पादन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Sat, 24 Sep 2022 06:40 PM IST
सार

धान की फसल के अवेशष से एथेनॉल बनाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में रिफाइनरी स्थापित करने का निर्देश देने का अनुरोध केंद्रीय गृहमंत्री से किया है।  
 

भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में एथेनॉल रिफाइनरी स्थापित करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखा है।
भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में एथेनॉल रिफाइनरी स्थापित करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखा है। - फोटो : social media
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विस्तार

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में 2जी एथेनॉल रिफाइनरी की स्थापना के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि धान की फसल के अवशेष से एथेनॉल उत्पादन के लिए भारत सरकार की तेल विपणन कंपनियों के माध्यम से एक वाणिज्यिक और एक प्रदर्शन परियोजना की स्वीकृति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि इससे पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी और बचे हुए कचरे का निपटारा हो सकेगा। 


मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में मध्य क्षेत्र अंतरराज्यीय परिषद की 22 अगस्त को हुई बैठक का भी हवाला दिया है। लिखा है कि राज्य में तेल विपणन कंपनी की ओर से एथेनॉल उत्पादन के लिए नासिरेजलर (2जी) रिफाइनरी स्थापित किए जाने का अनुरोध किया गया था। इससे  प्रधानमंत्री 'जी-1' योजना (जैव ईंधन-वातावरण अवशेष निवारण) के अंतर्गत फसल अवशेषों के निवारण के लिए लिग्नों सेल्यूलॉजिक बायोमॉस आधारित बायो एथेनॉल का उत्पादन हो सकेगा। 


राज्य में रिफाइनरी की अनुकूल परिस्थतियां
पत्र में आगे लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि फसलों विशेषकर, धान का अनुमानित वार्षिक उत्पादन 137 लाख मि.टन (खरीफ विपणन वर्ष 2022-23) है। इससे प्राप्त होने वाले बायोमॉस के निष्पादन के लिए (2जी) लिग्नों सेल्यूलॉजिक बायोमॉस आधारित रिफाइनरी के लिए राज्य में समस्त अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं।

पर्यावरण प्रदूषण, नगरीय क्षेत्र के अपशिष्ट का होगा प्रबंधन
नगरीय निकाय और गौठान समितियों के जरिए बैकवार्ड लिंकेज के माध्यम से लिग्नों सेल्यूलॉजिक बायोमॉस उपलब्ध कराने के लिए पार्टनरशिप की जा सकती है। इसके माध्यम से योजना के उद्दश्यों की पूर्ति के लिये निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार कृषि अवशेषों को जलाने से उत्पन्न पर्यावरण प्रदूषण और नगरीय क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में कमी की जा सकेगी।

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