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मरियम, बिलावल की जुगलबंदी...इस एक नजारे से पाकिस्तानी हुए हैरान 

मरिआना बाबर Published by: मरिआना बाबर Updated Sat, 02 Jan 2021 03:54 AM IST
बिलावल भुट्टो-मरियम नवाज
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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के पूर्व अध्यक्ष के गृह नगर और सिंध के अंदरूनी इलाके लरकाना में दो राजनीतिक दलों के बीच ऐसा कुछ घटित हुआ, जिसकी पाकिस्तान के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते थे। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज को गढ़ी खुदा बख्श की यात्रा करते देखना एक राजनीतिक व सांस्कृतिक चमत्कार था। गढ़ी खुदा बख्श सिंध प्रांत के लरकाना जिले में स्थित है और भुट्टो परिवार के मकबरे के रूप में चर्चित है। यहां सबसे प्रसिद्ध कब्र पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के संस्थापक और दिवंगत प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की है। उनके पिता सर शहनवाज भुट्टो को भी यहीं दफनाया गया था। मकबरे में पाकिस्तान की पूर्व प्रथम महिला बेगम नुसरत भुट्टो की भी कब्र है। वहां जुल्फिकार और नुसरत भुट्टो के बेटे मुर्तजा भुट्टो और शहनवाज भुट्टो की भी कब्रें हैं।

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लेकिन सबसे प्रसिद्ध कब्र, जहां पूरे साल हजारों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए आते हैं, दिवंगत प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की है, जो सबसे कम उम्र की पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री थीं। दुखद है कि सर शहनवाज भुट्टो और बेगम नुसरत भुट्टो को छोड़कर यहां दफनाए गए बाकी सभी लोगों की हिंसक मौत हुई थी। इस हफ्ते हुए जिस राजनीतिक चमत्कार का मैं जिक्र कर रही हूं, वह गढ़ी खुदा बख्श का एक दृश्य है, जिसमें मरियम नवाज शरीफ पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो के साथ बेनजीर भुट्टो की कब्र पर खड़ी थीं और गुलाब की पंखुड़ियां बिछा रही थीं। यह अवसर बेनजीर भुट्टो की 13वीं पुण्यतिथि का था। यह हमेशा एक बड़ी घटना होती है, जिसमें पीपीपी के कार्यकर्ता और नेतागण हिस्सा लेते हैं।


एक ऐसा भी समय था, जब पीएमएल-एन के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तथा बेनजीर भुट्टो एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक विरोधी थे, जैसे कि भारत में भाजपा और कांग्रेस। लेकिन अपनी हत्या से पहले बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ (जब दोनों निर्वासन में थे) ने चार्टर ऑफ डेमोक्रेसी नामक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें यह प्रावधान था कि वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव तो लड़ेंगे, पर एक दूसरे के खिलाफ सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे। हालांकि उनका राजनीतिक इतिहास दर्शाता है कि बेनजीर की सरकार गिराने के लिए कई बार नवाज शरीफ सेना के साथ खड़े थे। लेकिन आखिरकार इन दोनों को एहसास हो गया कि वे और कुछ अन्य दल मिलकर सेना के प्रभाव को खत्म करेंगे और मजबूत लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ओर बढ़ेंगे। बिलावल भुट्टो द्वारा मरियम नवाज को लरकाना स्थित अपने घर पर लाने और उन्हें गढ़ी खुदा बख्श ले जाने तथा मरियम द्वारा भुट्टो परिवार के सभी दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने का दृश्य कुछ ऐसा था, जिससे सभी पाकिस्तानी हैरान रह गए। खासकर इमरान खान की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान (सेना) खुद, क्योंकि अगर धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने हाथ मिलाना शुरू कर दिया, तो यह इमरान खान के लिए खतरा बन जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान में ये दोनों विपक्षी दल सबसे बड़े हैं। इससे सुरक्षा प्रतिष्ठान का हाथ भी कमजोर होता है, क्योंकि एक बार इमरान सरकार हटाए जाने के बाद उसके पास नियंत्रण रखने के लिए कोई मजबूत पार्टी नहीं रहेगी।

यहां नेताओं की एक नई पीढ़ी है, जो बेशक चुनावी प्रक्रिया में एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहेंगे, लेकिन अभी वे ग्यारह दलों के गठबंधन पीपुल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का हिस्सा हैं, जिसका मुख्य लक्ष्य इमरान सरकार को हटाना है। यह मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों की पूर्ण बहाली और राष्ट्रीय राजनीति में सेना की भूमिका की समाप्ति का भी आह्वान करता है। पीडीएम ने इमरान खान को सत्ता में लाने के लिए सेना पर पिछले चुनाव में धांधली का भी आरोप लगाया है। मरियम और बिलावल, दोनों वंशवादी राजनीति का हिस्सा हैं और पाकिस्तान में आवाज उठने लगी है कि अगर वास्तव में मुल्क में सच्चे लोकतंत्र की जरूरत है, तो हमें वंशवादी राजनीति से छुटकारा पाना होगा। कई लोग आज के दलों को पतनशील राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बताते हैं, जिसे समावेशी और सांस्थानिक लोकतंत्र के जरिये बदलने की आवश्यकता है।

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