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नौकरियों में धांधली: इस माह के अंत तक सामने आ सकती है जांच रिपोर्ट, सुर्खियों में भर्ती प्रक्रिया विवाद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 10 Aug 2022 12:27 PM IST
सार

सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी की भर्ती प्रक्रिया विवादों में आने के बाद 29 मार्च 2022 को इस पर रोक लगाते हुए डीसीबी की जांच के आदेश शासन की ओर से दिए गए थे।

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विस्तार

प्रदेश में नौकरियों में धांधली का मुद्दा इन दिनों सुर्खियों में है। ऐसे में सहकारिता विभाग में जिला सहकारी बैंकों (डीसीबी) में हुई भर्तियों में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। शासन में इस माह के अंत तक जांच पूरी हो जाएगी। वर्ष 2020 में जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी के 432 पदों के लिए शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया विवादों में आने के बाद 29 मार्च 2022 को इस पर रोक लगाते हुए देहरादून, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ डीसीबी की जांच के आदेश शासन की ओर से दिए गए थे।



इस मामले में संयुक्त निबंधक सहकारी समितियां नीरज बैलवाल की अध्यक्षता में बनी जांच समिति देहरादून जिले की जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है, जबकि पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर की जांच अभी जारी है। इन दोनों जिलों में करीब 48-48 पदों के लिए 2700 से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया था। जांच समिति के अध्यक्ष नीरज बैलवाल का कहना है कि पैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण के कार्य और कुछ दूसरी तकनीकी दिक्कतों के कारण जांच में देरी हुई है। उनकी तरफ से रिपोर्ट तैयार कर स्क्रूटनी के साथ ही इसे शासन को सौंप दिया जाएगा। 


समिति से शीघ्र जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। संभव है कि इस माह के अंत तक रिपोर्ट शासन को मिल जाएगी। इसका परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट विभागीय मंत्री को सौंप दी जाएगी। 
- बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव, सहकारिता 

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कांग्रेस कर रही मामले में सीबीआई जांच की मांग 
सहकारिता में डीबीसी भर्ती घोटाले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस शुरू से हमलावर है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार में भाजपा के ही दो विधायकों यतीश्वरानंद और सुरेश राठौर ने भर्ती घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई थी। कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करती है। इस दौरान उन्होंने विभागीय मंत्री को भी पद से हटाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार के नाम पर घोटाले को अंजाम देकर प्रदेश के युवाओं को ठगने का काम कर रही है। सहकारिता ही नहीं भाजपा सरकार में हुई तमाम भर्तियों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। 

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