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Uttarakhand News: बदरीनाथ वन प्रभाग के जंगलों में सबसे ज्यादा धधके, वन महकमे की उड़ाई हुई नींद
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:40 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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बदरीनाथ वन प्रभाग से लेकर वन्यजीव क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाओं ने वन महकमे की नींद उड़ाई हुई है। वन विभाग फायर सीजन समाप्त होने के बाद कारणों को लेकर अध्ययन कराएगा। अब तक फायर सीजन में 545 जंगल की आग की घटनाएं रिपोर्ट हो चुकी र्है।
वनों में आग की दृष्टि से अल्मोड़ा, पौड़ी वन प्रभाग जैसे डिवीजन अधिक संवेदनशील रहे हैं। पर जंगल की आग की घटना अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी काफी हुई है। सर्दियों में नंदा देवी बायोस्फीयर के जंगल में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी आग लगी थी। 15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हुआ है। इसमें बदरीनाथ वन प्रभाग के जंगलों में आग की सबसे अधिक घटना रिपोर्ट हुई है। यहां पर 93 घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।
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केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में 52 घटना
इसके बाद सबसे अधिक घटनाएं केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में रिपोर्ट हुई हैं, यहां पर अब तक 52 घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा अलकनंदा भूमि संरक्षण में 44, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में 40 घटनाएं हुई हैं। प्रदेश में अब तक 545 वनाग्नि की घटनाओं में 463 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंच चुका है। इसमें कुमाऊं और गढ़वाल रीजन में क्रमशः 113, 377 घटनाएं हुई हैं, जबकि अधिक सुरक्षित माने जाने वाले वन्यजीव क्षेत्र में 55 घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।
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इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक बताते हैं कि फायर सीजन के बाद कहां पर अधिक और कहां पर कम आग लगी है, उसका अध्ययन कराया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि अगर कहीं पर आग की घटनाएं पहले कम होती थी, इस बार बढ़ी है तो उसका पता करके सुधार के कार्य होंगे। इस बार अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं हुई हैं।