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Uttarakhand: स्टार्टअप वेंचर फंड योजना फाइलों में कैद, लगातार बढ़ रही संख्या, नीति में ये वित्तीय सुविधा
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:44 PM IST
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स्टार्टअप (सांकेतिक)
- फोटो : amar ujala
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स्टार्टअप और नवाचार आधारित आइडिया को कारोबार के रूप में विकसित करने के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया वेंचर फंड पिछले ढाई साल से फाइलों में अटका हुआ है। स्थिति यह है कि इस फंड से एक भी स्टार्टअप को वित्तीय सहायता नहीं मिल पाई है।
नवाचार आधारित कारोबार शुरू करने के लिए अधिकांश स्टार्टअप्स के पास पर्याप्त पूंजी नहीं होती। ऐसे में उन्हें एंजल निवेशकों से शेयर के बदले निवेश जुटाना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड को कैबिनेट की मंजूरी दी थी। हालांकि, ढाई साल बीतने के बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
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फंड के संचालन के लिए कई बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई है, लेकिन अब तक उनके साथ निवेश संबंधी अनुबंध नहीं हो पाए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वेंचर फंड में निवेश के लिए 20 निवेशकों ने आवेदन किया था। जांच-परख (स्क्रूटनी) के बाद 10 निवेशकों के साथ अंतिम चरण की बातचीत पूरी हो चुकी है। अब विभागीय स्तर पर अनुबंध प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इसके बाद ही स्टार्टअप्स को वेंचर फंड से वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
लगातार बढ़ रही संख्या
प्रदेश में हर वर्ष स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ रही है। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा 210 स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई है, जबकि केंद्र के स्टार्टअप पोर्टल पर एक हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में सबसे अधिक 130 देहरादून जिले में हैं। इसके अलावा हरिद्वार में 24, नैनीताल में 16, ऊधमसिंह नगर में 15 और पौड़ी में 11 स्टार्टअप्स हैं। शेष स्टार्टअप्स अन्य जिलों में संचालित हो रहे हैं।
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नीति में ये वित्तीय सुविधा
स्टार्टअप नीति में नए इनक्यूबेशन सेंटर खोलने पर एक करोड़ और विस्तारीकरण के लिए 50 लाख तक की सहायता दी जा रही है। उत्पाद का पेटेंट कराने के लिए रुपये की सहायता देने की व्यवस्था है। पांच लाख व ट्रेडमार्क के लिए 10 हजार रुपये की सहायता देने की व्यवस्था है।