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Uttarakhand: राज्य गठन के 21 साल बाद भी महिलाओं के लिए नहीं बनी नीति, अंकिता हत्याकांड के बाद खड़े हो रहे सवाल

बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 03 Oct 2022 01:12 PM IST
सार

अंकिता हत्याकांड के बाद पहाड़ गुस्से में है, खासकर महिलाओं का कहना है कि राज्य गठन आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही। यह सोचकर राज्य आंदोलन किया कि अलग राज्य बनेगा तो पहाड़ के लोगों को रोजगार मिलेगा।

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महिला - फोटो : iStock
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विस्तार

उत्तराखंड राज्य पहाड़ की महिलाओं की देन है, लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि राज्य गठन के 21 साल बाद भी महिला नीति नहीं बन पाई है। अब अंकिता हत्याकांड के बाद महिला सुरक्षा और नीति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला आयोग के मुताबिक किसी बेटी के साथ फिर ऐसा न हो इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। आयोग सभी विभागों के सुझाव और सहयोग से महिला नीति का संशोधित ड्राफ्ट तैयार कर इसे सरकार को सौंपेगा। 



अंकिता हत्याकांड के बाद पहाड़ गुस्से में है, खासकर महिलाओं का कहना है कि राज्य गठन आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही। यह सोचकर राज्य आंदोलन किया कि अलग राज्य बनेगा तो पहाड़ के लोगों को रोजगार मिलेगा। महिलाओं की दिक्कतें दूर होंगी, लेकिन दुर्भाग्य है कि महिला आयोग को कई बार के सुझाव के बाद भी अब तक प्रदेश में महिला नीति नहीं बन पाई है। उनका कहना है कि महिला नीति को लेकर अब तक की सरकारों की इसे लेकर मंशा ही स्पष्ट नहीं है। 


उत्तराखंड को कुछ लोगों ने ऐशगाह बना दिया है। पहाड़ तबाह कर दिए गए हैं। जंगलों को काटकर अवैध तरीके से रिजॉर्ट बना दिए गए हैं, जिनमें न जाने कितनी अंकिताएं मर रही हैं। अंकिता की मेडिकल रिपोर्ट पर भी संदेह है।
- कमला पंत, संयोजक राज्य आंदोनकारी एवं महिला मंच  

जिन महिलाओं के बूते राज्य बना, वह आज हासिए पर हैं, वर्षों बाद भी महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति जस की तस है। महिलाओं को नौकरी में 30 फीसदी आरक्षण मिल रहा था उस पर भी रोक लग गई। राज्य आंदोलनकारी महिलाओं को 28 साल बाद भी इंसाफ नहीं मिला। पहाड़ की महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं है। 
- प्रदीप कुकरेती, जिलाध्यक्ष उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच 

आयोग की ओर से पिछले साल महिला नीति का ड्राफ्ट तैयार कर इस पर सभी विभागों से सुझाव मांगे गए थे, लेकिन दो से तीन विभागों के अलावा किसी विभाग ने सुझाव भेजने में रुचि नहीं दिखाई। 
- कामिनी गुप्ता, सचिव महिला आयोग 

प्रदेश में बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है। आयोग में भी आए दिन महिला उत्पीड़न के मामले सामने आ रहे हैं। स्वयं सेवी संस्थाओं और विभागों से सुझाव लेकर जल्द ही महिला नीति के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए पूर्व के ड्राफ्ट में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
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- कुसुम कंडवाल, अध्यक्ष महिला आयोग

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