उत्तराखंड मौसम: कई जिलों में बारिश के आसार, नैनीताल के बनियानाला में फिर हुआ भूस्खलन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 23 Oct 2021 09:12 PM IST

सार

पिछले दिनों पश्चिमी विक्षोभ की अत्यधिक सक्रियता और दक्षिणी-पूर्वी हवाओं के दबाव के चलते मैदान से लेकर पहाड़ तक मौसम का मिजाज बदल गया था।
नैनीताल में हुआ भूस्खलन
नैनीताल में हुआ भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तराखंड में मौसम आज फिर करवट बदल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में देहरादून के साथ ही उत्तरकाशी, हरिद्वार, नैनीताल और चंपावत में कहीं-कहीं तेज गर्जना के साथ हल्की बारिश होगी। फिलहाल भारी बारिश की संभावना नहीं जताई है।
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मौसम विभाग के मुताबिक राजधानी दून में भी आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और शनिवार की शाम या रात में कुछ स्थानों पर तेज गर्जना के साथ हल्की बारिश की संभावना है। बता दें, पिछले दिनों पश्चिमी विक्षोभ की अत्यधिक सक्रियता और दक्षिणी-पूर्वी हवाओं के दबाव के चलते मैदान से लेकर पहाड़ तक मौसम का मिजाज बदल गया था।


बीते दिनों बारिश से हुआ काफी नुकसान
पूरे राज्य में रिकॉर्ड तोड़ मूसलाधार बारिश हुई। खासकर कुमाऊं क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के चलते जहां 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई और करोड़ों की संपत्तियों का नुकसान हुआ। हालांकि मौसम विज्ञानियों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिणी-पूर्वी हवाओं का प्रभाव बिल्कुल खत्म हो गया है। ऐसे में अब भारी बारिश के आसार कतई नहीं है। 

सुबह तक 400 श्रद्धालु पहुंचे यमुनोत्री धाम
यमुनोत्री हाईवे के साथ ही यमुनोत्री पैदल मार्ग पर आवाजाही सुचारू रूप से हो रही है। यमुनोत्री धाम के आखिरी प्रमुख पड़ाव जानकीचट्टी पुलिस चौकी प्रभारी गंभीर तोमर ने बताया कि सुबह से अभी तक 400 यात्रियो ने यमुनोत्री धाम पहुंचकर मां यमुना के दर्शन किए।

नैनीताल के बनियानाला में हुआ भूस्खलन
नैनीताल के बलियानाला क्षेत्र में शनिवार को फिर भूस्खलन हो गया। भूस्खलन जीआईसी विद्यालय के मुहाने तक पहुंच गया है। इससे विद्यालय समेत तमाम भवनों को भारी खतरा पैदा हो गया है। इस जगह पर कुछ दिन पहले भी भूस्खलन हुआ था। बलियानाला क्षेत्र नैनीताल शहर की तलहटी में स्थित है। यहां दशकों से भूस्खलन होता आ रहा है। अब तक कोई भी तकनीक इसे रोकने में कामयाब नहीं हुई है। धीरे-धीरे यह शहर की ओर बढ़ रहा है। इसकी जड़ में आए अनेक भवन पूर्व में खाली कराए जा चुके हैं और दर्जनों लोग यहां से विस्थापित हो चुके हैं। 

छठे दिन भी नहीं खुला मलारी हाईवे

मलारी हाईवे आज शनिवार को छठे दिन भी वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं खुल पाया। हाईवे बंद होने से ग्रामीणों के साथ ही सेना के जवानों की आवाजाही भी थम गई है। नीती घाटी के ग्रामीण इन दिनों ठंड बढ़ने के कारण जिले के निचले क्षेत्रों में पहुंचे जाते हैं, लेकिन हाईवे बंद होने से ग्रामीण निचले क्षेत्रों में नहीं आ पा रहे हैं।

18, 19 अक्तूबर को अतिवृष्टि से मलारी हाईवे कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। बीआरओ ने तमकनाला तक हाईवे सुचारु कर दिया है, लेकिन इससे आगे कई जगहों पर हाईवे ध्वस्त पड़ा है। बीआरओ के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने बताया कि मलारी हाईवे को 26 अक्तूबर तक वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। हाईवे को खोलने के लिए 15 मशीनें और करीब सौ मजदूर लगाए गए हैं। कई जगहों पर सड़क ध्वस्त है, जिससे यहां हिल कटिंग कार्य करना पड़ रहा है।

हेमकुंड साहिब में दो फीट बर्फ
हेमकुंड साहिब में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। बीते दिनों हुई बारिश-बर्फबारी के बाद हेमकुंड साहिब बर्फ से ढक गया है। बर्फबारी के बाद मौसम सामान्य होने पर हेमकुंड साहिब के प्राकृतिक सौंदर्य में निखार आ गया है। हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और गोविंदघाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड साहिब में दो फीट तक बर्फ जम गई है और यहां सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। हेमकुंड साहिब के कपाट बीते 10 अक्तूबर को बंद हो गए थे।

सेराघाट-बेड़ीनाग एनएच बंद, सैकड़ों वाहन फंसे

गणाई गंगोली के मदनपुर में शुक्रवार रात 8:05 बजे अचानक पहाड़ गिरने से 20 मीटर सड़क नीचे नदी में समा गई। सड़क बंद होने के कारण सैकड़ों वाहन फंस गए हैं। इनमें सवार लोगों की रात गाड़ी में ही कटी। लोगों ने शीघ्र सड़क खुलवाकर आवाजाही सुचारु करने की मांग की है।

लोनिवि की मशीन सड़क खोलने का कार्य कर रही है। लोनिवि के एई अनित कनोजिया, जूनियर इंजीनियर त्रिपाठी, थानाध्यक्ष बेड़ीनाग प्रताप सिंह नेगी, सेराघाट पुलिस चौकी प्रभारी मोहन बोरा राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

उन्होंने वहां फंसे कई यात्रियों की सहायता की। सड़क के बंद होने से धारचूला, मुनस्यारी, नाचनी, थल, चौकोड़ी, गंगोलीहाट, बेरीनाग, राईआगर की ओर जाने वाले सैकड़ों वाहन फंसे हैं। वहां पर मलबे गिरने के बाद सड़क दल-दल में बदल गई है।  

राजकीय प्राथमिक विद्यालय टुपरौली का भवन गिरा 
प्राथमिक विद्यालय टुपरौली का भवन शुक्रवार रात अचानक गिर गया। अगर यह घटना दिन में होती तो जनहानि भी हो सकती थी। भवन गिरने के कारण अब बच्चों के बैठने की दिक्कत हो गई है। प्रधानाध्यापक रेनू पथनी, ग्राम प्रधान दीपा गंगोला, विद्यालय प्रबंधक समिति की अध्यक्ष अनीता देवी ने तहसील प्रशासन, विधायक और उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी है। ग्राम प्रधान दीपा गंगोला ने स्कूल भवन जल्दी बनाने की मांग की है। 

छठे दिन खुली घाट-लोहाघाट सड़क
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर लोहाघाट से घाट के बीच सोमवार से बंद आवाजाही छठे दिन शनिवार शाम को खुल गई। इसी के साथ इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने से लोगों ने राहत की सांस ली। एनएच पर चंपावत से टनकपुर के बीच सड़क अब भी तीन जगह बुरी तरह बाधित है। वहीं चंपावत जिले के 58 ग्रामीण मार्ग बंद है।  

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक धौन, स्वांला, चल्थी में भारी मात्रा में मलबा है। उसे हटाने के लिए प्रशासन ने 15 से अधिक मशीनें लगाईं हैं। शनिवार शाम को डीएम विनीत तोमर ने भी इस इलाके का दौरा कर सड़क को जल्द से जल्द खोलने के निर्देश दिए। एनएच खंड के अधिकारियों का कहना है कि अगर पहाड़ी से मलबा गिरना रुका, तो सोमवार तक चंपावत से टनकपुर के बीच आवाजाही सुचारु कर ली जाएगी। 

बीआरओ ने बहाल किया चीन सीमा तक सड़क संपर्क

चीन सीमा से संपर्क कटने के बाद सुरक्षा एजेंसियों और सीमांत के ग्रामीणों की दिक्कतें एक बार फिर बढ़ गईं थीं। बीआरओ ने नया बस्ती और छारछुम के बीच में ध्वस्त तवाघाट-टनकपुर एनएच को दुरुस्त कर दिया है। इस क्षेत्र में चीन सीमा से पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय का सड़क संपर्क बहाल हो गया है। 

तीन दिन पूर्व काली नदी के कटाव से लगभग 50 मीटर सड़क बह गई थी। इस कारण धारचूला का शेष जगत से संपर्क कटा हुआ था। दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में वाहन फंसे थे। धारचूला के लिए जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति ठप थी। लोगों को वाहन बदलकर आवागमन करना पड़ रहा था। बीआरओ के एडीजी और चीफ इंजीनियर ने भी सड़क का निरीक्षण किया था। बीआरओ ने युद्ध स्तर पर काम कर पहाड़ी को काटकर शनिवार शाम सड़क यातायात के लिए खोल दी है। सड़क खुलते ही फंसे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। बीआरओ 67 आरसीसी के टूआईसी एके निराला मौके पर रहे। वाहनों का संचालन शुरू होने के बाद सीमांत के लोगों ने राहत महसूस की है।

मानसून काल में तवाघाट-लिपुलेख और सोबला दर तिंदाग सड़क के बंद होने से चीन सीमा से 120 दिन तक संपर्क कटा रहा। कार्यदायी संस्थाओं ने विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए सड़क को खोला था। लेकिन बीते दिनों हुई बारिश के बाद नया बस्ती के पास सड़क नदी में समा गई थी। इस कारण एक बार फिर चीन सीमा से संपर्क कट गया था। उधर, मुनस्यारी क्षेत्र से चीन सीमा को जाने वाला पैदल मार्ग भी भारी बारिश के कारण कई जगह ध्वस्त हुआ है। इस कारण सुरक्षा एजेंसियों समेत आम लोग भी परेशान हैं। एक ओर चीन अरुणाचल, लद्दाख सहित कई स्थानों पर घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। ऐसे में चीन सीमा को जाने वाले रास्ते और सड़क बंद होने से दिक्कतें हो सकती हैं। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां 24 घंटे ड्यूटी कर देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं। 
  
चीन ने भारत सीमा तक हॉटमिक्स कीं सड़कें 
चीन सीमा पर सड़कों को हॉटमिक्स कर चुका है जबकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को आज भी बदहाल सड़कों और पैदल रास्तों पर कई दिक्कतों का सामना कर सीमा पर पहुंचना पड़ रहा है। चीन भारत की हर सीमा पर अपनी सेना की आवाजाही बढ़ाता रहा है। भारत के अभिन्न हिस्से अरुणाचल प्रदेश हो या लद्दाख का इलाका चीन की नापाक हरकत कई बार उजागर होती रही है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की दो तहसीलें चीन सीमा से जुड़तीं हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान लगातार मौसम खराब होने के कारण वायुसेना को भी अपने हेलिकॉप्टर भेजने में काफी दिक्कतें होती हैं।  
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