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Delhi : डीडीए के 11 अफसरों पर एफआईआर के आदेश, 9 हो चुके रिटायर

अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Fri, 12 Aug 2022 03:50 AM IST
सार

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भ्रष्टाचार के इस मामले में इन अधिकारियों में तत्कालीन सदस्य (वित्त) और सदस्य (इंजीनियरिंग) भी नामजद हैं। उपराज्यपाल ने रिटायर हो चुके नौ अधिकारियों से पूरी पेंशन को स्थायी रूप से वापस लेने का आदेश दिया है।

डीडीए के 11 अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश
डीडीए के 11 अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

किंग्सवे कैंप में कोरोनेशन पार्क के सौंदर्यीकरण और अपग्रेडेशन से संबंधित नौ साल पुराने वित्तीय अनियमितता के मामले में उपराज्यपाल ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के नौ सेवानिवृत्त और दो सेवारत अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। रिटायर्ड अधिकारियों की पूरी पेंशन वापस लेने के भी आदेश दिए हैं। उपराज्यपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को 15 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।



2013 की एक परियोजना में सीपीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल और जीएफआर के उल्लंघन के मामले में इन अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई थी।इनमें मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यकारी अभियंता समेत वित्त, लेखा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। आरोपियों में तत्कालीन सदस्य (इंजीनियरिंग) अभय कुमार सिन्हा, तत्कालीन सदस्य (वित्त) वेंकटेश मोहन, सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर ओम प्रकाश, अधीक्षण अभियंता नाहर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर जेपी शर्मा, डिप्टी सीएओ पीके चावला, एएओ जसवीर सिंह, एएडी एससी मोंगिया, एई एससी मित्तल, एई आरसी जैन और एई दिलबाग सिंह बैंस शामिल हैं। सभी सेवानिवृत्त अधिकारियों के पेंशन लाभ को पूर्ण तौर पर वापस लेने के आदेश दिए गए हैं। विभाग ने पहले 25 फीसदी पेंशन वापस लेने की सिफारिश की थी। 


2016 में कैग ने दिए थे गड़बड़ी के संकेत
वर्ष 2013 में संबंधित कार्य मैसर्स अजब सिंह एंड कंपनी को दिया गया था। कार्य की निविदा लागत 14.24 करोड़ रुपये थी, जबकि बगैर स्वीकृति नरेला और धीरपुर में 114.83 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च कर दिए गए। इसके अलावा मूल परियोजना लागत भी 14.24 करोड़ रुपये से बढ़कर 28.36 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। परिणामस्वरूप एजेंसी को 142.83 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में 2016 में कैग ने अपनी रिपोर्ट में अनियमितता के संकेत दे दिए थे।

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