दिल्ली: बैंक कर्मचारी की मदद से आरोपियों ने महिला की एफडी तोड़ी, फिर योजना बनाकर धीरे-धीरे निकाल लिए 1.35 करोड़ रुपये

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 19 Oct 2021 11:58 PM IST

सार

आरोपी ने एक फर्जी कंपनी का गठन कर उसमें कुछ मजदूरों के खाते खुलवाए। इसके बाद सुमित की मदद से कनिका के खाते की चेकबुक, एटीएम कार्ड निकलवा लिया गया
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विस्तार

यदि आप यह सोचते हैं कि एफडी कराकर बैंक में रखी गई आपकी रकम सुरक्षित है तो यह बात अपने दिमाग से पूरी तरह निकाल दें। जर्मनी में बैठी एक एनआरआई महिला के दिल्ली स्थित बैंक खाते से बदमाशों ने हेराफेरी कर 1.35 करोड़ रुपये उड़ा लिये। पीड़िता ने रकम की एफडी (फिक्सड डिपोजिट) कराकर बैंक में छोड़ा हुआ था।
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बदमाशों ने एक बैंक कर्मी की मदद से महिला का पूरा खाता ही साफ कर दिया। मध्य जिला के साइबर सेल ने इस गुत्थी को सुलझाते हुए एक महिला समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान पूर्व बैंककर्मी सुमित पांडेय (24), गैंग लीडर शैलेंद्र प्रताप सिंह (42), नीलम (32), जगदंबा प्रसाद पांडेय उर्फ श्रेयंश (22) और आदर्श जायसवाल उर्फ राहुल (23) के रूप में हुई है।


पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी की रकम से खरीदा गया 90 लाख का प्लॉट, एक कार, बुलेट बाइक, 27 लाख कैश और दो महंगे आईफोन बरामद किए हैं। मध्य जिला पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।

13 नवंबर 2020 को महिला ने दर्ज कराई थी शिकायत
मध्य जिला पुलिस उपायुक्त श्वेता चौहान ने बताया कि 13 नवंबर 2020 को राजेंद्र नगर थाने में एनआरआई महिला कनिका गिरधर ने 1.35 लाख रुपये ठगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़िता ने बताया कि वह परिवार के साथ जर्मनी में रहती हैं। उनका ओल्ड राजेंद्र नगर के आईसीआईसीआई बैंक में खाता है। उन्होंने बैंक में एफडी कराकर खाते में 1.35 करोड़ रुपये छोड़े थे।

नवंबर में उन्होंने अपने खाते में ऑन लाइन ट्रांजेक्शन करने का प्रयास किया, लेकिन नहीं हुई। बैंक से बातचीत करने पर उनको पता चला कि उनके खाते में जीरो बैलेंस है। उनकी एफडी को तोड़कर उसमें से 1.35 करोड़ रुपये निकाल लिये गए थे।

नई चेकबुक और एटीएम जारी करवाकर उनके भाई विशाल ने रकम निकली है। कनिका काफी हैरान रह गई क्योंकि उनका कोई भाई था ही नहीं। पीड़िता को ठगी का पता चला और उन्होंने फौरन मामले की सूचना पुलिस को दी। चूंकि मामले को बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया गया था इसलिए मामले की जांच लोकल पुलिस से लेकर 22 दिसंबर को जिले की साइबर सेल को दे दी गई।

पुलिस को बैंक कर्मी सुमित पर था शक
साइबर सेल के इंस्पेक्टर जगदीश कुमार, एसआई कमलेश कुमार व अन्यों की टीम ने मामले की छानबीन शुरू की। शुरूआती जांच के बाद ही पुलिस को बैंक के कर्मचारी सुमित पांडेय पर शक हुआ। आरोपी उसी शाखा में कर्मचारी था जिसमें ठगी हुई थी। बाद में पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया, उसने ठगी की बात कबूल कर ली। आरोपी ने बताया कि उसकी ही सूचना पर किंगपिन शैलेंद्र प्रताप सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

आरोपी ने एक फर्जी कंपनी का गठन कर उसमें कुछ मजदूरों के खाते खुलवाए। इसके बाद सुमित की मदद से कनिका के खाते की चेकबुक, एटीएम कार्ड निकलवा लिया गया। बाद में चेकबुक और ऑन लाइन ट्रांजेक्शन के जरिये रकम को निकाल कर दस अलग-अलग खाते जो इन लोगों ने मजदूरों के ही खुलवाए थे, उसमें ट्रांसफर करवा दिया गया।

बाद में एटीएम के जरिये मजदूरों के खाते से धीरे-धीरे रकम को निकल लिया गया। आरोपियों ने बैंक में नीलम को कनिका बनाकर पेश किया। बाकी आरोपियों ने ठगी में मदद की। पुलिस ने सुमित के बाद शैलेंद्र, नीलम, जगदंबा प्रसाद और आदर्श जायवाल उर्फ राहुल को गिरफ्तार कर लिया।

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