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Delhi: उपराज्यपाल और दिल्ली कैबिनेट के बीच बढ़ी रार, केजरीवाल सरकार पर लगे कई आरोप

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sat, 06 Aug 2022 07:42 AM IST
सार

उपराज्यपाल सचिवालय की तरफ से कहा गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से पारदर्शिता, जवाबदेही और शासन की बातें की जाती हैं, लेकिन उनकी सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं की स्पष्ट और जानबूझकर अवहेलना की जाती है।

उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पराज्यपाल कार्यालय और दिल्ली कैबिनेट के बीच तकरार लगातार बढ़ती जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उपराज्यपाल सचिवालय ने दिल्ली कैबिनेट की पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निर्धारित सांविधानिक प्रक्रिया का जानबूझकर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उपराज्यपाल सचिवालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मसले पर गौर करने और टीओबीआर के निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का अक्षरश: पालन कराने के लिए कहा है।


उपराज्यपाल सचिवालय की तरफ से कहा गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से पारदर्शिता, जवाबदेही और शासन की बातें की जाती हैं, लेकिन उनकी सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं की स्पष्ट और जानबूझकर अवहेलना की जाती है। ऐसी चीजें दिन प्रति दिन स्पष्ट होती जा रही हैं। यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार नियम, 1993 (टीओबीआर) का उल्लंघन है। यह पारदर्शी और जवाबदेह शासन के हित में नहीं है।


टीओबीआर के नियम 13 के नियम 11 और उप नियम (3) के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि मंत्रिपरिषद, कैबिनेट द्वारा विचार किए जाने वाले ज्ञापनों, प्रस्तावों और कैबिनेट नोटों की एक प्रति उपराज्यपाल सचिवालय को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जबकि कैबिनेट नोट्स में देखा गया है कि मंत्रिमंडल की बैठक की निर्धारित तिथि से दो दिन पहले, बैठक से ठीक पहले या फिर बैठक के बाद उपराज्यपाल सचिवालय को कैबिनेट नोट्स प्राप्त होते हैं।

प्राचार्य की तरह व्यवहार कर रहे एलजी
दिल्ली सरकार के सूत्रों ने कहा है कि उपराज्यपाल प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वह छोटी-मोटी गलतियों को पकड़कर उस पर सरकार से उलझने की कोशिश करते हैं। दिल्ली सरकार ने उम्मीद जताई है कि उपराज्यपाल जनहित के कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।

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