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1200 रुपये में फर्जी डीएल, 150 में बेचते थे आधार

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 12:07 AM IST
फर्जी डीएल और आधार कार्ड बनाने के आरोप में पकड़े गए दोनों आरोपी।
फर्जी डीएल और आधार कार्ड बनाने के आरोप में पकड़े गए दोनों आरोपी।
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नोएडा। फर्जी पैन व आधार और ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य कार्ड बनाने वाले गिरोह का कोतवाली फेज टू पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने सरगना सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर इनके पास से करीब 400 अलग-अलग कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

एडीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि कोतवाली फेज टू पुलिस ने फर्जी पैन, आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र को असली जैसा बनाकर बेचने वाले दो आरोपियों को कार मार्केट गेझा के पास से गिरफ्तार किया। इनकी पहचान गेझा गांव निवासी सचिन जाटव और गंगारामपुर, पश्चिम बंगाल निवासी आलम के रूप में हुई। आलम गिरोह सरगना है। आरोपियों से पूछताछ की गई तो पता चला कि आरोपी ड्राइविंग लाइसेंस को 1200 रुपये, आधार कार्ड को 150 रुपये और पैन कार्ड को 200 रुपये में बेचते थे।

फर्जीवाड़े से आरोपी हर माह एक लाख रुपये कमाते थे। इनके पास से 19 तैयार फर्जी डीएल, 9 ब्लैंक कार्ड, 5 तैयार पैन कार्ड, 37 खाली पैन कार्ड, 250 खाली पहचान पत्र, 60 खाली आधार कार्ड, लैपटॉप, सीपीयू, मॉनिटर, प्रिंटर, की-बोर्ड, माउस और 42 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। आरोपी एक साल से नोएडा में रहकर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। इनके साथियों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
साइबर कैफे की आड़ में 1500 कार्ड बनाए
कोतवाली फेज टू के थानाध्यक्ष सुजीत उपाध्याय ने बताया कि दोनों आरोपी गेझा गांव में साइबर कैफे चलाकर फर्जीवाड़ा करते थे। आरोपी एक साल में 1500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, आधार, पहचान पत्र व पैन कार्ड बना चुके हैं।
इंटर पास आरोपी ऐसे देते थे वारदात अंजाम
इंटर पास दोनों आरोपी साइबर कैफे में आधार कार्ड से लेकर अन्य कार्ड बनवाने वाले लोगों से फोटो, पता व अन्य दस्तावेज लेते थे। फिर इनके आधार पर लैपटॉप व अन्य संसाधनों से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य कार्ड बना लेते थे। कार्ड में किसी की फोटो होती थी तो किसी का पता होता था।
अपराधी व बेरोजगार थे खरीदार
आरोपी फर्जी कार्ड बनाकर रख लेते थे और अपराधी, फर्जीवाड़ा करने और धोखाधड़ी करने वाले लोगों को बेचते थे। दूसरे राज्यों से आए ऐसे लोगों को भी एड्रेस प्रूफ के लिए कार्ड बेचते थे जिन्हें कंपनियों में नौकरी या रहने के लिए किराये पर कमरे की जरूरत होती थी।

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