{"_id":"6a2803982fa01d7fa40945a0","slug":"rising-pollution-has-increased-the-difficulties-for-respiratory-and-tb-patients-grnoida-news-c-23-1-lko1064-96972-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: बढ़ते प्रदूषण ने बढ़ाई सांस और टीबी मरीजों की परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: बढ़ते प्रदूषण ने बढ़ाई सांस और टीबी मरीजों की परेशानी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बढ़ते प्रदूषण ने बढ़ाई सांस और टीबी मरीजों की परेशानी
अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में बढ़े फेफड़ों के संक्रमण के मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। शहर में उठती धूल के कारण बढ़ते प्रदूषण का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और टीबी रोगियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं में इजाफा हो रहा है, जिससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में क्षय रोग (टीबी) विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में से करीब 20 से 25 फीसदी मरीजों की हालत गंभीर या चिंताजनक पाई जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे पहले से बीमार मरीजों की स्थिति और खराब हो रही है। कई मरीजों के फेफड़ों में संक्रमण पाया जा रहा है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जो पहले से टीबी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस अथवा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
जिम्स सेंटर के इंचार्ज डॉ. गौरव सक्सेना का कहना है कि प्रदूषण के कारण सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में जकड़न, थकान और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई मरीजों में संक्रमण तेजी से फैल जाता है, जिसके चलते उन्हें अतिरिक्त उपचार और निगरानी की आवश्यकता पड़ रही है। उनका कहना है कि गर्मियों के समय धूल के उठने के कारण प्रदूषण की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें, बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। मरीजों को नियमित रूप से दवाएं लेने और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने की सलाह दी गई है।
विज्ञापन
डॉ. गौरव सक्सेना ने बताया कि जिम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओर से चलाए गए 100 दिवसीय सघन तपेदिक (टीबी) उन्मूलन अभियान का असर दिखाई दे रहा है। जागरूकता के कारण अस्पताल में काफी संख्या में मरीज जांच के लिए आ रहे हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन के तहत किया गया था।
अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में बढ़े फेफड़ों के संक्रमण के मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। शहर में उठती धूल के कारण बढ़ते प्रदूषण का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और टीबी रोगियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं में इजाफा हो रहा है, जिससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में क्षय रोग (टीबी) विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में से करीब 20 से 25 फीसदी मरीजों की हालत गंभीर या चिंताजनक पाई जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे पहले से बीमार मरीजों की स्थिति और खराब हो रही है। कई मरीजों के फेफड़ों में संक्रमण पाया जा रहा है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जो पहले से टीबी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस अथवा अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं, वे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिम्स सेंटर के इंचार्ज डॉ. गौरव सक्सेना का कहना है कि प्रदूषण के कारण सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, सीने में जकड़न, थकान और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई मरीजों में संक्रमण तेजी से फैल जाता है, जिसके चलते उन्हें अतिरिक्त उपचार और निगरानी की आवश्यकता पड़ रही है। उनका कहना है कि गर्मियों के समय धूल के उठने के कारण प्रदूषण की मात्रा अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें, बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। मरीजों को नियमित रूप से दवाएं लेने और चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने की सलाह दी गई है।
डॉ. गौरव सक्सेना ने बताया कि जिम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओर से चलाए गए 100 दिवसीय सघन तपेदिक (टीबी) उन्मूलन अभियान का असर दिखाई दे रहा है। जागरूकता के कारण अस्पताल में काफी संख्या में मरीज जांच के लिए आ रहे हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन के तहत किया गया था।