खतरे में बच्चे: नूंह में बेलगाम स्कूल वैन, अंदर ओवरलोड तो छत पर बैठे बच्चे; वायरल वीडियो ने खोली सिस्टम की पोल
नूंह में स्कूल वैन की ओवरलोडिंग और बच्चों को छत पर बैठाकर सफर कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन को इंपाउंड कर 24 हजार 500 रुपये का चालान किया। लेकिन स्कूल की पहचान अब तक नहीं हो सकी है, जिससे गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
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नूंह जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही भारी लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। फिरोजपुर झिरका-बीवां रोड पर वायरल हुई एक स्कूली वैन की वीडियो ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीषण गर्मी में क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरने के साथ-साथ वैन की छत पर बच्चों को बैठाकर सफर कराया जा रहा था।
यह न केवल यातायात नियमों की खुली अवहेलना थी, बल्कि दर्जनों मासूमों की जिंदगी को खतरे में डालने जैसा गंभीर मामला भी था। हैरानी की बात यह है कि घटना के तीन दिन बाद भी स्कूल की पहचान तक नहीं हो पाई है।
23 मई को फिरोजपुर झिरका-बीवां रोड पर एक टाटा मैजिक वाहन स्कूली बच्चों को लेकर जा रहा था। उसी दौरान पीछे चल रहे एक वाहन चालक ने इसकी वीडियो बना ली। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि वाहन के अंदर बच्चों को बुरी तरह भर रखा था, जबकि करीब 12 बच्चे उसकी छत पर बैठे हुए थे। वाहन की पिछली खिड़की भी खुली हुई थी, जिससे जरा सी चूक बड़ा हादसा बन सकती थी। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में भारी नाराजगी फैल गई।
वीडियो पुलिस अधीक्षक नूंह तक पहुंची तो पुलिस हरकत में आई। वाहन के नंबर के आधार पर पुलिस ने बीवां गांव के पास से गाड़ी को बरामद कर लिया। हालांकि तब तक बच्चे अपने घर पहुंच चुके थे। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन को इंपाउंड कर 24 हजार 500 रुपये का चालान किया। पुलिस के अनुसार वाहन चालक के पास जरूरी दस्तावेज भी नहीं थे। बिना लाइसेंस, बिना आरसी समेत कई धाराओं में कार्रवाई की गई है।
हालांकि कार्रवाई के बावजूद कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह वाहन किस स्कूल से जुड़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि गाड़ी पर किसी भी स्कूल का नाम अंकित नहीं था। चालान के दौरान चालक द्वारा दिया गया मोबाइल नंबर भी बंद मिला। पुलिस को वाहन मालिक के बारे में कुछ जानकारी जरूर मिली है, लेकिन अभी तक उसे हिरासत में नहीं लिया गया है। यही कारण है कि स्कूल की पहचान नहीं हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार यह वाहन रोजाना स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने का काम करता है और अक्सर इसी तरह ओवरलोड होकर चलता है। वाहन की हालत भी बेहद खराब बताई जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या स्कूल प्रशासन को इस बारे में जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के लिए कुछ अभिभावक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। किराया कम करने के लालच में कई अभिभावक बच्चों को ऐसे वाहनों में भेज देते हैं। कई बार अभिभावक मिलकर एक वाहन तय कर लेते हैं और उसी में अधिक से अधिक बच्चों को बैठाने की सहमति बन जाती है। इसका खामियाजा मासूम बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ता है।
जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि जांच में किसी स्कूल की लापरवाही सामने आती है तो उसकी मान्यता रद्द कराने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर सिफारिश की जाएगी। वहीं, यातायात थाना प्रभारी सुखबीर ने बताया कि वाहन को इंपाउंड कर नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
इस घटना ने जिले में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह भी है कि जब यह वाहन रोजाना इसी तरह बच्चों को ढो रहा था तो संबंधित विभागों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।