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Delhi: मेडल जीतकर लौटी तूलिका का टैगोर गार्डन में जोरदार स्वागत, सीडब्ल्यूजी में जूडो में पाया था रजत

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 10 Aug 2022 07:46 AM IST
सार

तूलिका की मां अमृता सिंह दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में एएसआई हैं। वह बेटी द्वारा राष्ट्रमंडल खेलों में मेडल जीतने पर बेहद खुश हैं। तूलिका के सिर से 2001 में उनके पिता का साया छिन गया था। अमृता सिंह ने पुलिस की कठिन नौकरी के साथ बेटी को जूडो खेलने के लिए प्रेरित किया।

तूलिका मान का स्वागत करते स्थानीय लोग
तूलिका मान का स्वागत करते स्थानीय लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में रजत पदक जीतकर घर लौटने पर तूलिका मान का जोरदार तरीके से स्वागत किया गया। पश्चिमी दिल्ली की बेटी के स्वागत के लिए मंगलवार को स्थानीय नेताओं, व्यापारियों और महिलाओं के साथ-साथ आम नागरिक फूल मालाओं और ढोल नगाड़ों के साथ उमड़ पड़े थे। तूलिका मान एयरपोर्ट से सीधा टैगोर गार्डेन पहुंचीं।



सुबह करीब 11 बजे दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय के पास तूलिका का स्वागत करने के लिए लोग इंतजार कर रहे थे। यहां मौजूद पश्चिमी दिल्ली जिला भाजपा अध्यक्ष रमेश खन्ना ने कहा कि तूलिका ने मेडल जीतकर अपने माता-पिता के साथ-साथ पूरी पश्चिमी दिल्ली को सम्मान दिलाया है।

मां दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में हैं सेवारत

तूलिका की मां अमृता सिंह दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में एएसआई हैं। वह बेटी द्वारा राष्ट्रमंडल खेलों में मेडल जीतने पर बेहद खुश हैं। तूलिका के सिर से 2001 में उनके पिता का साया छिन गया था। अमृता सिंह ने पुलिस की कठिन नौकरी के साथ बेटी को जूडो खेलने के लिए प्रेरित किया। बचपन में तूलिका की कोच संगीता ने भी मेहनत करके उन्हें खेलने के लिए तैयार किया।

तूलिका का गुस्सा मेडल बनकर बरसा

अमृता सिंह ने बताया कि तूलिका को बचपन में गुस्सा बहुत आता था। एकदिन उन्होंने कहा कि अगर उसे गुस्सा निकालना है तो वह क्यों नहीं घर के नजदीक जूडो क्लब में जाकर इसे निकाले। लेकिन उन्हें जूडो के विषय में कुछ नहीं पता था। तूलिका जब क्लब में निरंतर अभ्यास करने लगीं तो लगातार गोल्ड मेडल आने लगे, यहीं से वह आगे बढ़ती गईं। 

स्कूल को 50 साल बाद दिलाया गोल्ड

तूलिका केंद्रीय विद्यालय टैगोर गार्डेन में पढ़ती थीं। करीब 50 साल के बाद केंद्रीय विद्यालय टैगोर गार्डेन को तूलिका की वजह से एसजीआईएफ में गोल्ड मेडल मिला, इसके बाद वो नहीं रुकीं। यशपाल सोलंकी मौजूदा समय में इनके कोच हैं। तूलिका ने राष्ट्रमंडल खेलों में जाने से पहले करीब 30-35 किलो वजन घटाया। उसके बाद उनका चयन हुआ। अब तूलिका मेडल जीतकर आई हैं तो उनकी मां, छोटी बहन और उनके कोच बहुत खुश हैं।
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