हिंदी हैं हम : स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी का रहा है बड़ा महत्व

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 17 Aug 2021 06:53 AM IST

सार

कड़वी सच्चाई है कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है, लेकिन सरकारी विभागों में हिंदी में काम करने का दिखावा हो रहा है। अधिकतर अफसरशाही अंग्रेजी में काम कर रहे हैं। हिंदी का पत्रकार परिचय-पत्र अंग्रेजी में बनाकर पेश करता है।
तरुण विजय (बाएं) के. श्रीनिवासराव (मध्य), डिंपी गर्ग (दाएं)
तरुण विजय (बाएं) के. श्रीनिवासराव (मध्य), डिंपी गर्ग (दाएं) - फोटो : amar ujala
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विस्तार

भारत के स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी का बड़ा महत्व रहा। महात्मा गांधी गुजराती थे, सी. राजगोपालाचारी मद्रासी थे, राजा राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर व देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय जैसे महान दार्शनिक व क्रांतिकारी बंगाली थे, ऐसे ही देश के अलग-अलग प्रांतों के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता आंदोलन में खुद को खपा दिया। उन्होंने स्वाधीनता का संदेश देशभर में जन-जन तक पहुंचाने के लिए हिंदी को चुना। राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करने वाले बुद्धिजीवियों की राय है कि सभी क्षेत्रीय बोलियों का परस्पर सम्मान होना चाहिए। सबकी एकराय होनी चाहिए कि हिंदी सभी क्षेत्रीय भाषाओं की बड़ी बहन है। हिंदी को अधिक ताकत देकर देश को अधिक ताकतवर बनाया जा सकता है। हिंदी के लिए काम करने वाले विद्वानों ने अपने विचार साझा किए हैं।
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हिंदी में हस्ताक्षर करने का संकल्प निभा रहा हूं
कड़वी सच्चाई है कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है, लेकिन सरकारी विभागों में हिंदी में काम करने का दिखावा हो रहा है। अधिकतर अफसरशाही अंग्रेजी में काम कर रहे हैं। हिंदी का पत्रकार परिचय-पत्र अंग्रेजी में बनाकर पेश करता है। जबकि लोगों को समझना चाहिए कि जब चुनाव होता है तो नेता हिंदी में जनता से संवाद करते हैं। क्योंकि उन्हें पता है भारत में अंग्रेजी में बात करके लोगों से जुड़ा नहीं जा सकता। 


हमें तो हिंदी में काम करने पर गर्व होता है। देहरादून कॉलेज में था, तभी संकल्प लिया था कि अपना हस्ताक्षर हिंदी में करेंगे। राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण की 10 साल बाद हिंदी में वेबसाइट बनवाया। हिंदी दिवस मनाना शुरू किया। अब हिंदी में काम करने के लिए प्रेरित किए जाने से कर्मचारी भी खुश हैं। अब प्राधिकरण का विधि उपनियम हिंदी में बनाकर वेब साइट पर डाला जा रहा है। - तरुण विजय, अध्यक्ष, राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण

साहित्य अकादमी में हिंदी पुल का काम कर रही
साहित्य अकादमी के साथ काम करते हुए यह अनुभव किया है कि हिंदी देश की 24 क्षेत्रीय भाषाओं के लिए पुल है। गुजराती भाषा की पुस्तक का मणिपुरी में सीधा अनुवाद कराना आसान नहीं है। लेकिन गुजराती से हिंदी में अनुवाद कराने के बाद हिंदी से मणिपुरी में अनुवाद आसानी से हो जाता है। करीब सभी क्षेत्रीय साहित्यकारों के लिए हिंदी समझना आसान है। 

हिंदी भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बनकर उभरी है। विदेशी शक्तियां भारत में व्यापार करने के लिए अपने लोगों को हिंदी सिखा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर हिंदी में भाषण देकर वैश्विक पटल पर हिंदी का दबदबा और बढ़ा दिया है। देश में करीब 50 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं। दुनिया में कई देशों की इतनी आबादी है। अब बिना देर किए संयुक्त राष्ट्र को हिंदी को आधिकारिक भाषा की मान्यता देनी चाहिए। - के. श्रीनिवासराव, सचिव, साहित्य अकादमी

हिंदी के विकास के लिए रेलवे बहुत काम कर रहा
भारत बहुभाषायी देश है, लंबे समय से हिंदी या उसका कोई स्वरूप इसके बहुत बड़े भाग पर सम्पर्क भाषा के रूप में प्रयुक्त होता था। स्वतंत्रता आन्दोलन में हिंदी पत्रकारिता ने अहम भूमिका अदा की है। यह समस्त भारत में आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक सम्पर्क माध्यम के रूप में प्रयोग के लिए सक्षम है, इसे सारे देश के लिए सीखना आवश्यक है। संविधान सभा में लंबी चर्चा के बाद 14 सितम्बर सन् 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा स्वीकारा गया। इसके बाद संविधान में अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा के सम्बन्ध में व्यवस्था की गयी। इसकी स्मृति को ताजा रखने के लिये 14 सितम्बर का दिन प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

आज लगभग प्रत्येक कार्यालय में  एक राजभाषा विभाग है, जो राजभाषा हिंदी में काम करने के लिए नीतियों, नियमों और पुरस्कार प्रोत्साहन आदि की न केवल जानकारी प्रदान करता है, बल्कि कार्यालयों के सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए तत्पर है। दिल्ली हिंदी भाषी क्षेत्र है। हिंदी में काम करना हमारा संवैधानिक उत्तरदायित्व भी है। 

हिंदी बहुआयामी भाषा है इसकी खूबी है कि ये सभी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात कर लेती है। हिंदी में काम करना बहुत सरल है क्योंकि जो बोलना है वही लिखना है। आप अपनी बात आसानी से दूसरे तक पहुंचा सकते हैं। विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी दूसरे स्थान पर है। हमारी रेलवे में भी हिंदी में बहुत कार्य किया जा रहा है, विशेष रूप से स्टेशनों पर। हिंदी का प्रचार प्रसार बढ़ाने में राजभाषा विभाग भी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है। - डिंपी गर्ग, दिल्ली रेल मंडल प्रबंधक

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