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CBSE: कक्षा 9वीं में अनिवार्य तीन-भाषा नीति को कानूनी चुनौती, महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री ने दायर की याचिका

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Tue, 09 Jun 2026 12:19 PM IST
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सार

Three-Language Policy: कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की गई तीन-भाषा नीति को लेकर विवाद गहरा गया है। महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री ने इस नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

Former Maharashtra minister files plea in SC against CBSE's 3-language rule for Class 9 students
Three-Language Policy - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
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विस्तार

CBSE:  1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य करने के CBSE के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री और शिक्षाविद डॉ. फौजिया खान ने याचिका दायर कर कहा है कि 15 मई को जारी किया गया CBSE का यह नियम जल्दबाजी में लिया गया फैसला है और इससे छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ बढ़ेगा। उन्होंने अदालत से इस नीति पर रोक लगाने और इसे रद्द करने की मांग की है।



याचिका में मुख्य मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया है, "विवादित परिपत्र में शिक्षकों की कमी को स्वीकार किया गया है, फिर भी अनुपालन अनिवार्य किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दक्षिणी राज्यों में इस परिपत्र का एकमात्र व्यावहारिक उद्देश्य हिंदी को अनिवार्य करना है, और उत्तरी राज्यों में संस्कृत को अनिवार्य करना है, बिना किसी स्पष्ट शैक्षिक तर्क के।"  

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गैर-हिंदी राज्यों पर भाषा थोपने का आरोप

एनसीपी-एससीपी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले खान ने कहा कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों को हिंदी या संस्कृत को अनिवार्य विषय बनाने के लिए मजबूर करना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लंघन है।

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इससे पहले 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। दरअसल, CBSE ने 15 मई को जारी एक परिपत्र में कहा था कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए कम से कम दो भारतीय मूल भाषाओं सहित तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा।

CBSE का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा ढांचा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है। हालांकि, इस नियम को लेकर कई राज्यों और शिक्षा विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई है।

बोर्ड ने कहा, "माध्यमिक स्तर पर परिकल्पित दक्षताओं को पर्याप्त रूप से पूरा करने के लिए, इन पाठ्यपुस्तकों के साथ स्कूलों द्वारा चयनित एक उपयुक्त स्थानीय या राज्य साहित्यिक सामग्री, जैसे लघु कथाएं, कविताएं या गैर-काल्पनिक रचनाएं भी शामिल की जाएंगी।"

विदेशी भाषा के लिए भी तय की गई शर्तें

CBSE ने बताया है कि नई तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश 15 जून तक जारी कर दिए जाएंगे। इनमें यह बताया जाएगा कि छात्रों के लिए अतिरिक्त अध्ययन सामग्री कैसे चुनी जाएगी और उसका उपयोग कैसे किया जाएगा।

15 मई को जारी परिपत्र के अनुसार, अगर कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो उसे पहले दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। इसके बाद ही वह विदेशी भाषा को तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुन सकेगा।

परिपत्र में कहा गया है, "1 जुलाई, 2026 से कक्षा 9 के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम दो भारतीय मूल भाषाएं होनी चाहिए।"

बोर्ड ने यह भी कहा है कि जब तक नई भाषा की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक छात्र उस भाषा की कक्षा 6 की किताबों के 2026-27 संस्करण से पढ़ाई कर सकेंगे।

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