NEET : ईडब्लूएस आरक्षण के मानदंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर लगाई सवालों की झड़ी

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश शर्मा Updated Thu, 21 Oct 2021 10:25 PM IST

सार

पीठ ने कहा कि वह सरकार को यह नहीं बताने जा रही है कि सीमा क्या होनी चाहिए चाहे वह चार लाख रुपये हो या छह लाख रुपये, क्योंकि यह कार्यपालिका को तय करना है लेकिन वह केवल यह जानना चाहती है कि सीमा के रूप में 8 लाख रुपये तय करने का आधार क्या था।  
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supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 21 अगस्त, 2021 को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण के लिए पात्रता निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय के मानदंड अपनाने को लेकर केंद्र सरकार पर सवालों की 'बौछार' की। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीवी नागरत्न की पीठ ने इस मुद्दे पर केंद्र द्वारा हलफनामा दाखिल नहीं करने पर नाखुशी व्यक्त की। अदालत ने सात अक्तूबर को हुई पिछली सुनवाई में ईडब्ल्यूएस मानदंड को लेकर सवाल उठाए थे और केंद्र को इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। शीर्ष अदालत नीट-अखिल भारतीय कोटे मे 10 फीसदी ईडब्लूएस आरक्षण लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही है।
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पीठ ने बृहस्पतिवार को भी यह जानना चाहा कि इस मानदंड को अपनाने के लिए केंद्र ने क्या कवायद की? पीठ ने ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर के लिए आठ लाख रुपये के मानदंड का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया कि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के लिए समान मानदंड कैसे अपनाया जा सकता है जबकि ईडब्ल्यूएस में कोई सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ापन नहीं है।  


पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज से कहा, आपके पास कुछ जनसांख्यिकीय या सामाजिक या सामाजिक-आर्थिक आंकड़े होने चाहिए। आप हवा में आठ लाख रुपये का मानदंड नहीं ला सकते। आप आठ लाख की सीमा लागू करके असमान को बराबर बना रहे हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ओबीसी में आठ लाख से कम आय वाले लोग हैं। वे सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन से पीड़ित हैं। संवैधानिक योजना के तहत ईडब्ल्यूएस सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े नहीं हैं।

पीठ ने यह स्वीकार किया कि ईडब्ल्यूएस मानदंड अंततः एक नीतिगत मामला था लेकिन यह कहा कि न्यायालय संवैधानिकता निर्धारित करने के लिए नीतिगत निर्णय पर पहुंचने के लिए अपनाए गए कारणों को जानने का हकदार है। सुनवाई के दौरान पीठ ने एक वक्त यह भी चेतावनी दी कि वह ईडब्ल्यूएस अधिसूचना पर रोक लगाएगी। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने केंद्र सरकार से कहा, कृपया हमें कुछ दिखाएं। हलफनामा दाखिल करने के लिए आपके पास दो सप्ताह का समय था। हम अधिसूचना पर रोक लगा सकते हैं और इस दौरान आप कुछ कर सकते हैं। हालांकि, एएसजी ने अधिसूचना पर रोक नहीं लगाने का अनुरोध किया और जल्द से जल्द हलफनामा दाखिल करने का वचन दिया।

एएसजी नटराज ने कहा कि उन्हें समाज कल्याण मंत्रालय और कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग से निर्देश प्राप्त करने की आवश्यकता है, जिन्हें बाद में प्रतिवादियों के रूप में जोड़ा गया था। एएसजी ने कहा कि हलफनामे का मसौदा तैयार है और दो-तीन दिनों में हलफनामा दायर कर दी जाएगी। शीर्ष अदालत ने अब इस मामले पर 28 अक्तूबर को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। 

शीर्ष अदालत ने इन सवालों का मांगा जवाब

शीर्ष अदालत ने गुरुवार, 21 अगस्त, 2021 को आदेश पारित करते हुए कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार से विशिष्ट प्रतिक्रिया मांगी है- 
  1. क्या केंद्र ने ईडब्ल्यूएस निर्धारित करने के लिए मानदंड पर पहुंचने से पहले कोई अभ्यास किया था?
  2. यदि उत्तर 'हां' में है तो क्या सिंह आयोग की रिपोर्ट पर आधारित मानदंड है? यदि ऐसा है तो रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाया जाए।
  3. ओबीसी में क्रीमी लेयर और ईडब्ल्यूएस के लिए आय सीमा समान है (आठ लाख रुपये की वार्षिक आय)। ओबीसी श्रेणी में आर्थिक रूप से उन्नत श्रेणी को बाहर रखा गया है। ऐसे में क्या ईडब्ल्यूएस और ओबीसी के लिए समान आय सीमा प्रदान करने को मनमानी नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि ईडब्ल्यूएस में सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की कोई अवधारणा नहीं है। 
  4. क्या इस सीमा को तय करते समय ग्रामीण और शहरी क्रय शक्ति में अंतर को ध्यान में रखा गया था?
  5. किस आधार पर परिसंपत्ति अपवाद के नतीजे पर पहुंचा गया और उसके लिए कोई अभ्यास किया गया था?
  6. आखिर क्यों नहीं आवासीय फ्लैट मानदंड,  महानगरीय और गैर-महानगरीय क्षेत्र में अंतर नहीं करता है? 

निर्णायक कारकों को जानने की जरूरत है : अदालत

पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है, 'हम स्पष्ट करते हैं कि हम नीति के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर रहे हैं लेकिन संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करने के लिए हमें इस मानदंड तक पहुंचने वाले कारकों को जानने की जरूरत है।' पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अनुच्छेद-15 (6) और 16 (6) के स्पष्टीकरण के अनुसार राज्य सरकारें ईडब्ल्यूएस के लिए मानदंड अधिसूचित करती हैं। 103वें संविधान संशोधन में शामिल स्पष्टीकरण में कहा गया है कि अनुच्छेद 15 और 16 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ऐसे होंगे, जो राज्य द्वारा समय-समय पर पारिवारिक आय और आर्थिक अपर्याप्तता के अन्य संकेतकों के आधार पर अधिसूचित किए जाएं। शीर्ष अदालत ने केंद्र से देश भर में एक समान आधार पर ईडब्ल्यूएस मानदंड को अधिसूचित करने का आधार भी पूछा है।
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