विश्व रंगमंच दिवस पर जानिए थिएटर के अनछुए पहलू

अमर उजाला

Mon, 27 March 2023

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पूरे विश्व में 27 मार्च यानी आज के दिन 'विश्व रंगमंच दिवस' मनाया जाता है
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जब सिनेमा नहीं हुआ करता था, तब लोगों के मनोरंजन का साधन रंगमंच हुआ करता था

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रंगमंच एक ऐसा माध्यम है जहां से हम अपनी बात कई हजारों लाखों लोगों तक पहुंचा सकते है

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कहा जाता है कि, भारत के महान कवि कालिदास जी ने भारत की पहली नाट्यशाला (थिएटर) में ही ‘मेघदूत‘ की रचना की थी

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भारत की पहली नाट्यशाला अंबिकापुर जिले के रामगढ़ पहाड़ पर स्थित है, जिसका निर्माण कवि कालिदास जी ने ही किया था

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भारत में रंगमंच का इतिहास बहुत पुराना माना है, क्योकि ऋग्वेद के कतिपय सूत्रों में भी रंगमंच का उल्लेख यम, यामी और उर्वशी के रूप में देखने को मिलता है

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इनके संवादों से ही प्रेरित होकर कलाकारों ने नाटकों की रचना शुरू की 

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जिसके बाद से नाट्यकला (ड्रामा) का विकास हुआ और भारतीय नाट्यकला को शास्त्रीय रूप देने का कार्य भरतमुनि जी ने किया था

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भरत मुनि ने अपने नाट्यशास्त्र में नाटकों के विकास की प्रक्रिया को लिखा है, "नाट्यकला की उत्पत्ति दैवी हैं 

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अर्थात दु:खरहित सत्ययुग बीत जाने पर त्रेतायुग के आरंभ में देवताओं ने ब्रह्मा से मनोरंजन का कोई ऐसा साधन उत्पन्न करने की प्रार्थना की जिससे देवता लोग अपना दु:ख भूल सकें और आनंद प्राप्त कर सकें

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