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BJP Candidate List: भाजपा ने गोरखपुर-बस्ती जिले के छह और प्रत्याशियों के नाम का किया एलान, इन दिग्गजों को मिला टिकट

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 29 Jan 2022 01:01 PM IST

सार

UP Election 2022: यूपी में 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होना है। ऐसे में नेताओं के दल-बदल और प्रत्याशियों के नामों के एलान का सिलसिला भी जारी है।
सांकेतिक तस्वीर।
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार

भाजपा ने शुक्रवार को गोरखपुर-बस्ती जिले के छह और प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दिया। सहजनवां से पहली बार विधायक बने शीतल पांडेय और खजनी सुरक्षित सीट से दूसरी बार विधायक संत प्रसाद का टिकट काटा गया है।

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सहजनवां से प्रदीप शुक्ला भाजपा प्रत्याशी बनाए गए हैं। वह पहली बार चुनाव लड़ेंगे। खजनी से योगी सरकार के मंत्री श्रीराम चौहान चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले श्रीराम चौहान संतकबीरनगर की धनघटा (सुरक्षित) सीट से चुनाव लड़कर जीते थे।


गोरखपुर की नौ में से सात सीटों के प्रत्याशियों के नाम का एलान किया जा चुका है। सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया गया था। अब छह और प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे गए हैं। भाजपा ने जो सूची जारी की है, उसके मुताबिक पूर्व मंत्री फतेहबहादुर सिंह कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने फतेहबहादुर पर दूसरी बार भरोसा जताया है।

इसी तरह पिपराइच विधानसभा क्षेत्र से विधायक महेंद्र पाल सिंह पर दूसरी बार भरोसा जताया गया है। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से राजेश त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारा गया है। अनुसूचित जाति व ब्राह्मण बहुल सीट से राजेश चौथी बार चुनाव लड़ेंगे। भाजपा से दूसरी बार (2017 व 2022) चुनाव मैदान में उतरे हैं। बांसगांव सुरक्षित सीट से डॉ. विमलेश पासवान को फिर प्रत्याशी बनाया गया है।

फतेह बहादुर सिंह : कैंपियरगंज सीट से तीसरी बार लड़ेंगे चुनाव

कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार चुनाव मैदान में होंगे। इससे पहले 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। फतेहबहादुर सिंह यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बेटे हैं। राजनीति विरासत में मिली है। पिछले 30 वर्षों से विधायक हैं। इससे पहले महराजगंज की पनियरा सीट से चार बार चुनाव जीते थे। इस लिहाज से सातवीं बार विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। फतेहबहादुर सिंह की पत्नी साधना सिंह गोरखपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।

प्रदीप शुक्ला

पहली बार चुनाव मैदान में
सहजनवां से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप शुक्ला गोरखपुर क्षेत्र के महामंत्री हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी माने जाते हैं। बताया जाता है कि प्रदीप संगठन के कामकाज में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसी लिहाज से क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने अपनी टीम का हिस्सा बनाया था। टिकट के पैनल में भी प्रदीप का नाम पहली प्राथमिकता पर रखा था, जिसपर शीर्ष नेतृत्व ने मुहर लगा दी है।  

महेंद्र पाल सिंह

भाजपा ने दूसरी बार भरोसा जताया
पिपराइच से विधायक महेंद्र पाल सिंह दूसरी बार चुनाव लड़ेंगे। वह अति पिछड़ा वर्ग के सैंथवार समाज से आते हैं। पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में सैंथवार मतदाताओं की संख्या अच्छी है। महेंद्र पाल भी संगठन के कामकाज में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। संगठन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी करीबी माने जाते हैं।

डॉ. विमलेश पासवान

दूसरी बार चुनावी ताल ठोकेंगे
बांसगांव विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार चुनाव लड़ेंगे। डॉ. विमलेश ने मेडिकल की पढ़ाई की है। उनके बड़े भाई कमलेश पासवान बांसगांव लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। कमलेश तीन बार लोकसभा का चुनाव जीते हैं। बांसगांव में अच्छी पकड़ है। सुरक्षित सीट दलित बहुल है। डॉ. विमलेश की मां सुभावती पासवान भी इस सीट से एक बार सांसद रह चुकी हैं।     

राजेश त्रिपाठी

भाजपा ने दूसरी बार जताया भरोसा
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके राजेश त्रिपाठी पर भाजपा ने दूसरी बार भरोसा जताया है। 2017 का चुनाव भी राजेश ने भाजपा के ही टिकट पर लड़ा था, लेकिन मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले राजेश त्रिपाठी 2007 व 2012 का चुनाव बसपा के टिकट पर जीते थे। बसपा सरकार में मंत्री भी बने थे। राजेश ने चिल्लूपार से लगातार 22 वर्षों तक विधायक रहे हरिशंकर तिवारी को हराया था।  

श्रीराम चौहान

अब खजनी से किस्मत आजमाएंगे
संतकबीरनगर की धनघटा (सुरक्षित) विधानासभा क्षेत्र से विधायक श्रीराम चौहान अब गोरखपुर की खजनी विधानसभा (सुरक्षित) क्षेत्र से प्रत्याशी बनाए गए हैं। श्रीराम चौहान योगी सरकार में मंत्री भी हैं। दलितों में अच्छी पैठ मानी जाती है। इस सीट से दो बार (2012 व 2017) भाजपा विधायक रहे संत प्रसाद का टिकट काट दिया गया है।

 

अब तक तीन विधायकों का टिकट कटा

खजनी सुरक्षित सीट से दो बार भाजपा के टिकट पर जीते संत प्रसाद को तीसरा मौका नहीं दिया गया है। बताया जाता है कि ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान संत प्रसाद ने उरुवा से अपनी बहू को टिकट दिलवाया था, लेकिन जीत नहीं मिली थी। इससे पार्टी की किरकिरी हुई थी। पार्टी ने जो रिपोर्ट तैयार की थी, उसमें विधायक के खिलाफ क्षेत्रीय जनता में नाराजगी का जिक्र भी था। इसी तरह सहजनवां से भाजपा विधायक शीतल पांडेय 2017 में पहली बार विधायक बने थे। शीतल प्रसाद की उम्र ज्यादा हो गई है। संगठन ने जो रिपोर्ट बनाकर ऊपर भेजी थी, उसमें भी विधायक के प्रति सकारात्मक संदेश नहीं था। इससे पहले शहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल का टिकट काटा गया था। डॉ. आरएमडी लगातार 20 वर्षों से विधायक हैं। 2002 से ही चुनाव जीत रहे हैं।   

विधायकों की धुकधुकी बढ़ी

गोरखपुर ग्रामीण और चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र का टिकट नहीं घोषित हुआ है। इससे भाजपा विधायकों की धुकधुकी बढ़ी है। चर्चा है कि गोरखपुर ग्रामीण से निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद के बेटे व पार्टी के प्रदेश संयोजक सरवन निषाद चुनाव लड़ सकते हैं। यह सीट निषाद पार्टी के खाते में जा सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय होना बाकी है। सरवन निषाद चुनाव मैदान में भाजपा के चुनाव चिह्न पर ही उतर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो वर्तमान विधायक विपिन सिंह का टिकट कट जाएगा। चौरीचौरा से भाजपा विधायक संगीता यादव के नाम का एलान भी नहीं हुआ है। दरअसल, सपा ने भी चौरीचौरा से प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं किया है। माना जा रहा है कि रणनीति के तहत भाजपा ने टिकट नहीं जारी किया है।  

टिकट कटने के बाद बोले विधायक

भाजपा के सच्चे सिपाही हैं, निर्णय का स्वागत
भाजपा के सच्चे सिपाही हैं। पार्टी के निर्णय का स्वागत है। भाजपा ने जिस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है, उसके लिए प्रचार करेंगे। अब पूरी तरह से खाली हो गए हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रचार भी करना है। टिकट मिलना व कटना एक प्रक्रिया है। इसका हर किसी को सम्मान करना चाहिए। पिछले 32 वर्षों से भाजपा की सेवा में हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। - शीतल पांडेय, विधायक सहजनवां

स्थानीय नेता को मौका मिलता तो ज्यादा अच्छा रहता
पार्टी ने जो फैसला लिया है, उसके साथ हैं। शीर्ष नेतृत्व को बधाई देते हैं। अगर किसी स्थानीय नेता को मौका मिलता तो ज्यादा अच्छा रहता। श्रीराम चौहान चुनाव जीतेंगे। लेकिन, कितना क्षेत्र में रहेंगे, यह कहना मुश्किल है। क्षेत्र के सांसद भी कभी नहीं आते हैं। अब स्थानीय प्रतिनिधित्व नहीं रह जाएगा। - संत प्रसाद, विधायक खजनी

कुशीनगर

क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पीएन पाठक कुशीनगर विधानसभा से लड़ेंगे चुनाव
भाजपा ने कुशीनगर जिले के सात विधानसभा सीटों में से तीन सीटों पर शुक्रवार को उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर की है। इसमें कुशीनगर विधानसभा सीट से क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पीएन पाठक, फाजिलनगर विधानसभा से सुरेंद्र कुशवाहा और हाटा विधानसभा से हाटा नगरपालिका के चेयरमैन मोहन वर्मा को उम्मीदवार बनाया है।

 कुशीनगर विधानसभा सीट से घोषित उम्मीदवार पीएन पाठक जिले के तमकुहीराज तहसील के गांव गड़हिया पाठक के निवासी हैं। इनके पिता लाल बाबू पाठक किसान हैं। इनका जन्म वर्ष 1972 में हुआ। ये अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। इन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीकॉम व एमबीए की पढ़ाई पूरी की है। इन्होंने 30 वर्षों से भाजपा के अनेक संगठनात्मक पदों पर रहकर दायित्वों का निर्वहन किया है। उन्होंने विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरूआत की थी।

राष्ट्रीय प्रवक्ता युवा मोर्चा, राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, नेपाल संपर्क सेल के राष्ट्रीय प्रभारी आदि की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। वे लंबे समय तक अयोध्या के पूर्व सांसद रामविलास वेदांती के सहायक के रूप में रहकर राजनीति की मुख्य धारा से जुड़े रहे। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रशिक्षु सेवक भी हैं। इन्होंने दो बार कुशीनगर लोकसभा से व दो बार कुशीनगर विधानसभा से प्रमुख दावेदारी की भूमिका में थे। हालांकि टिकट नहीं मिला। इस बार कुशीनगर से विधानसभा का भाजपा ने टिकट दिया है। इनके साथ विधानसभा के हर धर्म, जाति व वर्ग के युवाओं का लगाव है।

संतकबीरनगर

खलीलाबाद से भाजपा ने युवा अंकुर राज पर लगाया दांव
भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा क्षेत्र खलीलाबाद से युवा ब्राह्मण चेहरा अंकुर राज तिवारी पर दांव लगाया है। पहली बार चुनाव में उतरने जा रहे अंकुर राज अभी तीन माह पूर्व ही पार्टी में शामिल हुए हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद वह लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने में जुटे रहे। इसका उन्हें इनाम मिला है।

35 वर्षीय युवा अंकुर राज तिवारी खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के धरमपुरा गांव के निवासी हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में वह और उनका परिवार लगातार सक्रिय रहा है। इस बीच 23 अक्तूबर को उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

31 दिसंबर को जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की जन विश्वास यात्रा में शामिल होने का कार्यक्रम तय हुआ तो उन्होंने भीड़ जुटाने में काफी मेहनत की। इसी बीज खलीलाबाद सदर से विधायक और अब सपा में शामिल हो चुके दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे के भाजपा छोड़ने के बाद, अंकुर राज टिकट पाने की होड़ में काफी सक्रिय रहे। भाजपा ने भी उनकी मेहनत को देखते हुए उन्हें टिकट देकर इनाम दिया।

धनघटा से भाजपा ने सफाईकर्मी पर लगाया दांव

धनघटा विधानसभा सीट सुरक्षित धनघटा से भारतीय जनता पार्टी ने सफाईकर्मी गणेशचंद चौहान को प्रत्याशी घोषित किया है। वह पिछले 22 वर्षों से संघ से जुड़े हैं। इनके टिकट की घोषणा होते ही कयासों पर विराम लग गया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल कायम हो गया।

धनघटा क्षेत्र के पौली विकास खंड के मूड़ाडीहा गांव निवासी 40 वर्षीय गणेशचंद चौहान स्नातक हैं। वर्ष 2009 में गणेशचंद चौहान ग्रामीण सफाई कर्मचारी के पद पर भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती विकास खंड हैसर बाजार के पतिजिव गांव में है। जबकि उनके पिता सुरेशचंद चौहान राजगीर हैं। पंचायत चुनाव में भाजपा से उनकी पत्नी कालिंदी चौहान ब्लॉक प्रमुख पद पर हैंसर बाजार से चुनाव लड़ी थीं पर उन्हें हार मिली थी। विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित धनघटा पर वर्तमान में भाजपा का ही कब्जा है। यहां से श्रीराम चौहान विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।

पार्टी ने श्रीराम चौहान को यहां से हटा कर गोरखपुर जिले के खजनी विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है। गणेशचंद चौहान ब्लॉक प्रमुख पद के हुए चुनाव के दौरान चर्चा में आए तो निरंतर वह चर्चा में बने भी रहे। वर्तमान समय में वह सपरिवार खलीलाबाद में निवास करते हैं। प्रत्याशी घोषित होने के बाद गणेशचंद चौहान ने पार्टी शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया। इनके प्रत्याशी बनाए जाने पर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई।

बस्ती

भाजपा ने चार मौजूदा विधायकों पर जताया भरोसा
बस्ती जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर शुक्रवार को भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। सभी मौजूदा विधायकों पर पार्टी ने दोबारा टिकट दिया है। वहीं, रुधौली विधानसभा सीट से अभी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है। यहां से भाजपा के संजय प्रताप जायसवाल विधायक हैं। इसे लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

कप्तानगंज से विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला पर जताया भरोसा : पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट चंद्र प्रकाश शुक्ल वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। मूलरूप से हर्रैया विधानसभा क्षेत्र के हरेवा शुक्ल निवासी चंद्रप्रकाश 2014 में लोकसभा का टिकट मांग रहे थे, लेकिन 2017 में भाजपा ने उन्हें कप्तानगंज सीट से विधानसभा का टिकट दिया। उन्होंने पूर्व मंत्री व बसपा के उम्मीदवार राम प्रसाद चौधरी को हराकर भाजपा का परचम लहराया। वर्ष 2002 में इस सीट से भाजपा के टिकट पर राम प्रसाद चौधरी चुनाव जीते थे, लेकिन 2007 में वह बसपा में शामिल हो गए, जिसके बाद इस सीट पर 2017 के चुनाव में कमल खिला।

हर्रैया से अजय कुमार सिंह को मिला टिकट : अजय कुमार सिंह 2017 में पहली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। वर्ष 2007 में कांग्रेस से सियासी पारी शुरू करने वाले अजय सिंह 2012 में कांग्रेस के टिकट पर हर्रैया से चुनाव लड़े थे, लेकिन तीसरे नंबर रहे। उन्होंने वर्ष 2014 में भाजपा का दामन थामा। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह को हराकर हर्रैया में कमल खिलाया था। अजय सिंह मूल रूप से हर्रैया के ग्राम लजघटा के निवासी हैं।

सदर से दयाराम चौधरी को मिला टिकट : दयाराम चौधरी का राजनैतिक सफर गांव की प्रधानी से वर्ष 1982 में शुरू हुआ। 1984 में जिला पंचायत सदस्य बने। 1988 में ब्लॉक प्रमुख जीतने के बाद वह चौधरी चरण सिंह से प्रेरित होकर भारतीय क्रांति दल में शामिल हो गए, जो बाद में जनता दल बन गया। 1990 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने। 1996 में बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़े, मगर हार गए। वर्ष 2000 में वह निर्दल जिला पंचायत अध्यक्ष बने। 2009 में भाजपा ने इन्हें विधान परिषद का चुनाव लड़ाया, मगर उन्हें पराजित होना पड़ा। वह फिर 2012 के विधानसभा चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे, लेकिन हार गए। वर्ष 2017 में भाजपा का दामन थामा और प्रत्याशी बने, सदर सीट से कमल खिलाया।

महादेवा सुरक्षित से रवि सोनकर को फिर मिला टिकट : बस्ती शहर के नरहरिया निवासी रवि सोनकर के पिता कल्पनाथ सोनकर बस्ती से 1980 व 1989 दो बार सांसद रहे। रवि सोनकर की राजनीतिक पारी वर्ष 2010 से शुरू हुई। वह भाजपा कोटे से जिला पंचायत सदस्य चुने गए और इसी वर्ष जिला पंचायत अध्यक्ष की दावेदारी की, मगर चुनाव हार गए। इसके बाद वे भाजपा के साथ ही लगे रहे। वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें महादेवा सीट से प्रत्याशी घोषित किया। इस चुनाव में वे बसपा के दूधराम को हराकर विधानसभा क्षेत्र महादेवा में भाजपा के खाते में यह सीट डाली। इस बार फिर से भाजपा ने उन पर विश्वास जताया है।

देवरिया

तीन विधायकों का कटा टिकट, राजनीतिक माहौल गर्म
देवरिया जिले में भाजपा ने शुक्रवार को पांच विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को पथरदेवा, सुरेंद्र चौरसिया को रामपुर कारखाना, राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद को रुद्रपुर, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी को देवरिया सदर और दीपक मिश्र शाका को बरहज से प्रत्याशी बनाया गया है। उधर, तीन वर्तमान विधायकों का टिकट कटने से राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

वर्ष 2017 के चुनाव में जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में छह पर भाजपा ने परचम लहराया था। एक सीट सपा की झोली में गई थी। इस बार भाजपा ने अपने दो दिग्गजों सूर्यप्रताप शाही और जयप्रकाश निषाद पर फिर भरोसा जताया है। रामपुर कारखाना से सुरेंद्र चौरसिया को प्रत्याशी बनाया गया है। सुरेंद्र चौरसिया जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं और हियुवा से जुड़े हैं। देवरिया सदर से पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है। शलभ मणि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रह चुके हैं।

बरहज से भाजपा ने पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद मिश्र के बड़े पुत्र दीपक मिश्र शाका पर भरोसा जताया है। शाका लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं।  उनके पिता स्व. दुर्गा प्रसाद मिश्र भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक थे। रुद्रपुर से प्रत्याशी बनाए गए जयप्रकाश निषाद तीन बार विधायक रह चुके हैं। पथरदेवा से प्रत्याशी बनाए गए सूर्यप्रताप शाही कसया से चार बार विधायक रह चुके हैं। पथरदेवा नई विधानसभा सृजित होने के बाद वर्ष 2012 में चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। वर्ष 2017 में उन्होंने भाजपा का परचम लहराया था।

मंत्रियों को क्लीन चिट, तीन विधायकों का काटा टिकट
देवरिया। भाजपा ने अपने दो मंत्रियों पर इस बार भी भरोसा जताया है। जबकि तीन विधायकों का टिकट काट दिया है। उपचुनाव में भाजपा का परचम लहराने वाले डॉ. सत्यप्रकाश मणि का टिकट क्यों कटा? इस पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। रामपुर कारखाना विधायक कमलेश शुक्ल बीमार रहने की वजह से अपने पुत्र डा. संजीव शुक्ल को चुनाव लड़ाना चाहते थे, वहीं बरहज विधायक सुरेश तिवारी अपने कारोबारी पुत्र संजय तिवारी को देवरिया सदर से चुनाव लड़ाना चाहते थे। लेकिन, दोनों विधायक अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके।

पनियरा और फरेंदा में भाजपा ने पुराने चेहरों पर लगाया दांव

महराजगंज जिले के भारतीय जनता पार्टी ने जिले की फरेंदा एवं पनियरा विधानसभा सीट से पुराने चेहरों पर ही दांव लगाया है। पनियरा से ज्ञानेंद्र सिंह और फरेंदा से बजरंग बहादुर सिंह प्रत्याशी घोषित किए गए हैं। दोनों वर्तमान विधायक हैं। सिसवां एवं सदर सीट पर अभी पार्टी ने पत्ते नहीं खोले हैं। नौतनवां विधानसभा सीट, गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी को देने की बात कही जा रही है।

फरेंदा विधानसभा सीट से वर्ष 1993 में भाजपा के चौधरी शिवेंद्र सिंह विधायक चुने गए थे। इसके बाद से वर्ष 2007 से यहां पार्टी ने फिर अपना दबदबा बनाया। वर्ष 2007 व 2012 के चुनाव में भाजपा ने बजरंग बहादुर सिंह को टिकट दिया। उन्हें जीत मिली। 2017 के चुनाव में बजरंग बहादुर सिंह तीसरी बार 76,312 मत पाकर निर्वाचित हुए। वहीं कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को 73,958 मत मिला। बीएसपी के बेचन को 35,765 मत मिले थे। पार्टी ने चौथी बार बजरंग बहादुर सिंह पर भरोसा जताया है। इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा बंद पड़ी चीनी मिल है।  

पनियरा विधानसभा से भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह चार बार से विधायक हैं। वर्ष 2017 में ज्ञानेंद्र सिंह को 1,19,308 मत मिला था। वहीं बीएसपी के गणेश पांडेय ने 51,817 मत हासिल किया था। वर्ष 2017 के पहले यह श्यामदेउरवां विधान सभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। ज्ञानेंद्र सिंह वर्ष 1991, 1996 एवं 2002 में चुनाव जीते। यह विधानसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीर बहादुर सिंह का गढ़ माना जाता था। वह यहां से 1967,1969 और 1974 चुनाव जीते थे। 1980 मेें वीरबहादुर सिंह, इंडियन नेशनल कांग्रेस से जीते थे।

भाजपा जिलाध्यक्ष परदेशी रविदास ने बताया कि सिसवां एवं फरेंदा से प्रत्याशी की घोषणा हो चुकी है। अन्य सीटों पर भी जल्दी नाम की घोषणा होने की संभावना है। पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में है।

सिद्धार्थनगर

भाजपा ने चार विधानसभा क्षेत्र में लगाया पुराने चेहरों पर दांव
सिद्धार्थनगर जिले में भाजपा ने जिले की पांच में चार विधानसभा क्षेत्रों से पुराने चेहरों अर्थात वर्तमान विधायकों पर ही दांव लगाया है। शुक्रवार को जारी हुई सूची में बांसी से जय प्रताप सिंह, इटवा से डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी, डुमरियागंज से राघवेंद्र प्रताप सिंह और कपिलवस्तु से श्यामधनी राही को प्रत्याशी घोषित किया गया। पिछले चुनाव में अपना दल एस के हिस्से में रही शोहरतगढ़ सीट पर असमंजस अभी भी बरकरार है।

बांसी से भाजपा प्रत्याशी घोषित हुए जय प्रताप सिंह सात बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। इसमें दो बार निर्दल और पांच बार भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की है। वर्ष 2017 में चुनाव जीतने और भाजपा सरकार बनने के बाद पहले उन्हें आबकारी फिर स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। इटवा से प्रत्याशी बने डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी अभाविप कार्यकर्ता रहें और शिक्षक भी हैं। वे 2017 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की। साथ ही प्रदेश के दूसरे मत्रिमंडल विस्तार में उन्हें बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली।

डुमरियागंज से घोषित प्रत्याशी राघवेंद्र प्रताप सिंह हियुवा के प्रदेश प्रभारी भी हैं। उन्होंने 2012 में चुनाव लड़ा और हार गए, वर्ष 2017 में वह पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। कपिलवस्तु से प्रत्याशी श्यामधनी भी हियुवा नेता रहे और जिला पंचायत सदस्य रहे। 2017 में पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

भाजपा के अपने पुराने चेहरों पर दांव लगाने से इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी संघर्ष रोचक हो गया है। वहीं पांचवें विधानसभा क्षेत्र शोहरतगढ़ में अभी भी यह असमंजस बरकरार है कि भाजपा इस पर अपना प्रत्याशी उतारेगी अथवा सहयोगी दल को यह सीट देगी। वैसे यहां से भाजपा और अपना दल से भी पार्टी का टिकट पाने के लिए कई दावेदार दौड़ लगा रहे हैं।
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