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26 एकड़ जमीन के वरासत का मामला: जैसे-जैसे बढ़ रही जांच, तेज हो रही आंच, पेशकार भी हटाए गए

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Aug 2022 01:31 PM IST
सार

नतीजतन जांच कमेटी अब बयान पर किए गए हस्ताक्षर को कानूनगो एवं लेखपाल के पुराने हस्ताक्षर से मैच कराएगी। ऐसे में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, जमीन से जुड़ी कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आ रही हैं, जिससे जांच अभी और लंबी खींच सकती है।

 

सांकेतिक तस्वीर।
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock
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विस्तार

सदर तहसील के जंगल डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन के वरासत मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, खेल की परत दर परत खुलती जा रही है। तहसीलदार के बाद अब तहसीलदार न्यायिक के पेशकार गिरिजेश को भी हटा दिया गया है। उधर, तहसीलदार के दावों के बाद वार-पलटवार भी तेज हो गया है। लेखपाल और कानूनगो, दावों की हवा निकालने में जुट गए हैं। ऐसे में जांच भी लंबी खींच सकती है।   



मामले की जांच शुरू होने पर सदर तहसीलदार विरेंद्र कुमार गुप्ता ने लेखपाल-कानूनगो की रिपोर्ट पर ही वरासत करने का दावा किया था। साथ ही पेशकार पर भी गुमराह करने अरोप मढ़ा है। जांच कमेटी के सामने उन्होंने तीनों कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी तलब करने की बात कही थी। मगर विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कानूनगो और लेखपाल इस मामले में किसी तरह की रिपोर्ट देने से ही इनकार कर रहे हैं। उनकी ओर से रिपोर्ट पर किए गए हस्ताक्षर पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।


नतीजतन जांच कमेटी अब बयान पर किए गए हस्ताक्षर को कानूनगो एवं लेखपाल के पुराने हस्ताक्षर से मैच कराएगी। ऐसे में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, जमीन से जुड़ी कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आ रही हैं, जिससे जांच अभी और लंबी खींच सकती है।

डीएम के निर्देश पर मुख्य राजस्व अधिकारी सुशील कुमार गोंड और अपर जिलाधिकारी नगर विनीत कुमार सिंह ने लगातार दूसरे दिन भी मामले की जांच की। कमेटी ने कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं। वहीं मामले में नजर रख रहे डीएम ने दोनों अधिकारियों को बुलाकर जांच की प्रगति के बारे में जानकारी ली।
 
बता दें कि तहसीलदार ने अपने बयान में लेखपाल शैलेष चंद सिंह, तत्कालीन कानूनगो घनश्याम शुक्ल एवं पेशकार गिरिजेश कुमार पर गुमराह कर वरासत कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जमीन के ग्राम सभा के नाम दर्ज होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने 29 जुलाई की तिथि में तीनों कर्मचारियों को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण भी तलब किया था। उधर तत्कालीन कानूनगो ने इस मामले में किसी तरह का बयान देने की बात से साफ इनकार किया है।

उन्होंने इस संबंध में तहसीलदार द्वारा जो पत्रावली प्रस्तुत की गई है, उसपर हुए हस्ताक्षर पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब जांच समिति कानूनगो के इस दावे की भी गहनता से जांच करेगी। साथ ही मौके पर कुछ जमीनों का बैनामा होने के मामले की भी जांच की जा रही है।

 

पावर ऑफ अटार्नी पर हो गए कई बैनामे, लोग परेशान
भटहट के डुमरी नंबर दो की जिस 26 एकड़ जमीन को लेकर जांच चल रही है, उसमें से जमीन के कुछ हिस्से का कई लोग बैनामा भी करा चुके हैं। पावर ऑफ अटार्नी लेकर कुछ लोगों ने जमीन की रजिस्ट्री की है। इसमें से कुछ के नामांतरण भी हो चुके हैं, तो कुछ की फाइलें अटकी हैं। इसी जमीन की कलेक्ट्रेट से सेवानिवृत्त हुए एक कर्मचारी ने भी रजिस्ट्री कराई है, तो वहीं चरगांवा ब्लॉक पर तैनात एक कर्मचारी ने भी जमीन का कुछ हिस्सा रजिस्ट्री कराया है। इसी तरह जमीन खरीदने वाले दूसरे लोगों ने भी तहसील की दौड़ लगानी शुरू कर दी है।

यह है जमीन का मामला
तीन साल पहले तक राजस्व अभिलेखों में जंगर डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन पर कोलकाता के रहने वाले अतुल कृष्ण बनर्जी, केदारनाथ मुखर्जी, शैलेंद्रनाथ मुखर्जी, लक्खी देवी का नाम दर्ज था। प्रशासन को जानकारी हुई कि जमीन का अब कोई वारिस ही नहीं है। जांच कराई गई। लेखपालों की एक टीम कोलकाता भी भेजी गई। तहसील प्रशासन के मुताबिक वहां भी मौके पर कोई नहीं मिला। इसके बाद 2019 में जमीन को लावारिस घोषित करते हुए इसे ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया। बाद में इस जमीन को एक साल के लिए नगर निगम को आवंटित कर दिया गया।

निगम अभी जमीन का उपयोग भी नहीं कर पाया था कि इसे वेटरिनरी कॉलेज के फार्म के लिए आवंटित कर दिया गया। अचानक दो साल बाद 25 मई 2022 को यह जमीन तहसीलदार द्वारा दो मूल खातेदारों के पुत्र होने का दावा करने वालों के नाम वरासत कर दी गई।  इसके बाद इसमें से कुछ हिस्सा डीएम ने उद्यान विभाग के नाम कर आवंटित कर दिया। मामला उजागर होने के बाद तहसीलदार द्वारा 29 जुलाई की तिथि में वरासत को निरस्त करने का आदेश सामने आया।

पूछताछ के बाद हटाए गए पेशकार, कानूनगो का बयान दर्ज
गोरखपुर। जांच टीम के पूछताछ के बाद बृहस्पतिवार को पेशकार गिरजेश कुमार का स्थानांतरण गोला तहसील कर दिया गया। सदर तहसीलदार विरेंद्र गुप्ता को बुधवार को ही हटाया जा चुका है।

वहीं मामले में तत्कालीन कानूनगो घनश्याम शुक्ला का बयान दर्ज कर लिया गया है। लेखपाल शैलेष चंद सिंह अभी अवकाश पर हैं। लौटने के बाद उनका भी बयान दर्ज किया जाएगा। जांच टीम में शामिल अपर जिलाधिकारी नगर विनीत सिंह ने बताया कि गिरजेश कुमार का बयान दर्ज करने के बाद डीएम ने उन्हें हटाकर गोला भेज दिया है, जबकि कानूनगो के बयान की समीक्षा की जा रही है। अवकाश से लौटने के बाद लेखपाल का भी बयान लिया जाएगा।
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