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एंबुलेंस वालों की सेटिंग से कर रहे शिकार: बिना डिग्री वाले ले रहे मरीजों की जान, तीमारदार परेशान

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 11 Aug 2022 11:20 AM IST
सार

अस्पतालों की सेटिंग एंबुलेंस चालकों से हैं। एंबुलेंस चालक बिहार, गोपालगंज, सिवान, बेतिया से आने वाले मरीजों को शहर के बाहर ही पकड़ लेते हैं। अच्छे अस्पताल में इलाज की बात कहकर ऐसे अस्पतालों में ले जाते हैं, जहां बिना डिग्री वाले इलाज करते हैं।

सांकेतिक तस्वीर।
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

गोरखपुर शहर में बिना डिग्री वाले मरीजों की जान ले रहे हैं। तीमारदार परेशान हो रहे हैं, बावजूद इसके विभाग की नींद नहीं टूट रही है। यही वजह है कि कुछ हिस्ट्रीशीटर भी शहर में अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।



तारामंडल, पैडलेगंज, पादरी बाजार और बीआरडी मेडिकल कॉलेज का गुलरिहा इलाका ऐसे अस्पतालों का हब बनता जा रहा है। ऐसे लोग अस्पताल का संचालन कर मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ उनकी जान भी ले रहे हैं। इसके बाद भी विभाग ऐसे लोगों पर नजरें इनायत किए हुए हैं।


बंगाली ने कर दी सर्जरी, मौत
खोराबार थाना क्षेत्र के कुसम्ही मोतीराम अड्डा मार्ग पर आयुष नाम का एक अस्पताल चंदन नाम का एक बिना डिग्री वाला व्यक्ति चल रहा था। बंगाली क्लीनिक के नाम से इस अस्पताल में बवासीर और भगंदर से लेकर सभी तरह की फोड़ा-फुंसी के ऑपरेशन किए जाते थे। चंदन ने ही खोराबार थाना क्षेत्र के जंगल रामगढ़ उर्फ रजही निवासी राम आशीष का बवासीर का ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद आशीष की मौत हो गई। शिकायत पर पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक वह पकड़ा नहीं गया। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया है।

 

कोई डिग्री नहीं, फिर भी चलाते हैं ट्रॉमा सेंटर, स्पेशियलिटी हॉस्पिटल
तारामंडल, गुलरिहा, पैडलेगंज इलाके में कई ऐसे बीएएमएस मिल जाएंगे जो न केवल एलोपैथ पद्धति से इलाज कर रहे, बल्कि गंभीर मरीजों के लिए ट्रॉमा सेंटर, एन्यूरो अबर्न यूनिट, आईसीयू व स्पेशियलिटी हॉस्पिटल भी चला रहे हैं। यहीं नहीं यहां बड़े ऑपरेशन और डायलिसिस तक की सुविधा मौजूद है। तारामंडल में तो ऐसे अस्पताल चलाए जा रहे हैं, जहां पर इलाज बीएएमएस डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। इन अस्पतालों में बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम के बोर्ड भी लगाए गए हैं। जबकि, ये डॉक्टर उस अस्पतालों में इलाज के लिए जाते भी नहीं हैं।  

केस बिगड़ने पर भेज दे रहे बीआरडी
तारामंडल और पैडलेगंज में कुछ अस्पताल ऐसे हैं, जिसमें हाइड्रोसील से लेकर गर्भपात और अन्य सर्जरी भी होती है। मामला बिगड़ने पर मरीज को बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं। जब तक मरीज बीआरडी के ट्रॉमा सेंटर पहुंचता है, तब तक स्थिति इतनी बिगड़ गई होती है कि मरीज की जान तक चली जाती है। सप्ताह में तीन से चार ऐसे मामले बीआरडी में पहुंच रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि हर सप्ताह ऐसे केस आते हैं।

 

इनके झोले में है हर मर्ज का इलाज
शहर में बिना डिग्री वाले आयुर्वेदिक, एलोपैथी और होम्योपैथी सभी विधि से मरीजों का इलाज करने में माहिर होने का दावा करते हैं। तारामंडल में इनकी दुकानें संचालित हो रहीं हैं। ऐसे अस्पतालों पर विभाग ने कुछ दिनों पर पूर्व कार्रवाई भी की है। इन अस्पतालों में न्यू लोटस, जेएस और न्यू कालिंदी जैसे अस्पताल शामिल हैं।  

एंबुलेंस चालकों से होती है सेटिंग
इन अस्पतालों की सेटिंग एंबुलेंस चालकों से हैं। एंबुलेंस चालक बिहार, गोपालगंज, सिवान, बेतिया से आने वाले मरीजों को शहर के बाहर ही पकड़ लेते हैं। अच्छे अस्पताल में इलाज की बात कहकर ऐसे अस्पतालों में ले जाते हैं, जहां बिना डिग्री वाले इलाज करते हैं। ऐसे मरीजों से आर्थिक शोषण किया जाता है। यही वजह है कि एंबुलेंस चालक एक मरीज के नाम पर 10 से 15 हजार रुपये वसूलते हैं। कुल मिलाकर एंबुलेंस चालक मरीजों को अस्पतालों में बेचने का काम करते हैं।

एसीएमओ डॉ. एके सिंह ने कहा कि अब तक 16 ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जो बिना पंजीकरण के चल रहे थे। साथ ही उनके संचालकों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ अगर शिकायत मिलेगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 
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