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Bhiwani News: नारी के कंधों पर ही परिवार नियोजन की जिम्मेदारी, पुरुष नहीं दिखा रहे रुचि
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 06 Mar 2026 12:47 AM IST
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भिवानी। जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन की जिम्मेदारी आज भी महिलाओं पर ही टिकी है। जिले में वर्ष 2024-25 में 2575 महिलाओं की तुलना में सिर्फ 36 पुरुषों ने नसबंदी करवाई है। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य महकमा पुरुष नसबंदी के प्रति लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से परिवार नियोजन करवाने वालों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है लेकिन बावजूद इसके लोग रुचि कम दिखा रहे हैं। परिवार नियोजन के उप-सिविल सर्जन डॉ. दिव्य कीर्ति ने कहा कि समाज के अंदर नसंबदी के लिए पनपी हुई धारणा को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वैवाहिक प्रजनन स्वास्थ्य सुधारने और स्वस्थ व खुशहाल परिवार कि दिशा में पुरुषों की भागीदारी अहम होती है। पुरुष नसंबदी इसमें से एक है, यह सुरक्षित व सरल है। पुरुष नसबंदी में संसाधनों की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है और कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।
शुरुआती दौर में नसबंदी को लेकर बनाए गए माहौल के कारण आज तक वह धारणा चली आ रही है। इसी खत्म करने की जरूरत है और इसके लिए पुरुषों को जागरूक करना जरूरी है। क्योंकि जब इस परियोजना को शुरू किया गया तो कई गलत धारणाएं पैदा हो गई। इनमें एक धारणा है कि शारीरिक बल या पुरुषत्व प्रभावित होना। जबकि एनएसवी विधि से होने वाली पुरुष नसबंदी में न तो कोई चीरा लगता है और न ही कोई टांका लगाना पड़ता है। साथ ही इससे किसी प्रकार की पौरुष क्षमता पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह एक 10 मिनट की सरल प्रक्रिया है। अनुभवी चिकित्सक इस प्रक्रिया को पूर्ण करवाते हैं।
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प्रोत्साहन राशि का विवरण
विभाग की तरफ से नलबंदी करवाने वाली महिलाओं को 1400 रुपये व नसंबदी करवाने वाले पुरुषों को 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अगर कोई महिला डिलीवरी के साथ ही परिवार नियोजन करवाती है तो उसे 2200 रुपये दिए जाते हैं लेकिन इसके बाद भी पुरुष आगे नहीं आ रहे हैं। आशा वर्कर अगर किसी भी महिला को परिवार नियोजन के लिए तैयार करती है और उसके एक या दो बच्चे हैं तो उस आशा वर्कर को विभाग 1700 रुपये प्रोत्साहन राशि देता है। अगर तीन से चार बच्चे के बाद कोई महिला तैयार होती है तो आशा वर्कर को 200 रुपये प्रोत्साहन मिलता है।
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नसबंदी का आंकड़ा
वर्ष पुरुष महिला
2018-19 41 4253
2019-20 65 4232
2020-21 43 2867
2021-22 41 2875
2022-23 40 3864
2023-24 42 2682
2024-25 36 2575
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भ्रांंतियां और तथ्य
पुरुष नसबंदी के बारे में बहुत से लोग मानते हैं कि इससे पुरुषत्व घट जाता है। शारीरिक या मानसिक कमजोरी आ जाती है।
हकीकत : नसबंदी केवल शुक्राणुओं के प्रवाह को रोकती है, इससे पुरुष की हार्मोनल स्थिति और शारीरिक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता।
नसबंदी के बाद यौन इच्छा में कमी आ जाती है।
हकीकत: नसबंदी से यौन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता।
नसबंदी के बाद हॉर्मोनल बदलाव होते हैं।
हकीकत : नसबंदी से कोई हॉर्मोनल परिवर्तन नहीं होते। पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन स्तर पर कोई असर नहीं पड़ता।
नसबंदी केवल पुरुषों के लिए है, महिलाओं के लिए कोई विकल्प नहीं है।
हकीकत : महिलाओं के लिए भी स्थायी गर्भनिरोधक हैं, लेकिन पुरुषों के लिए नसबंदी अधिक सरल प्रक्रिया
होती है।
पुरुष नसबंदी से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हकीकत: नसबंदी का कैंसर से कोई संबंध नहीं पाया गया है। यह एक सुरक्षित प्रक्रिया है जो जीवनभर गर्भधारण को रोकने में मदद करती है।
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जटिलता पर बीमा सुविधा
नसबंदी के बाद कोई जटिलता या असफलता (ऑपरेशन फेल होने पर) होती है, तो 30 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का बीमा या मुआवजा कवरेज के तौर पर भी मिल सकता है। यह सुविधा सरकारी अस्पताल या मान्यता प्राप्त निजी संस्थान में ही मान्य होती है।
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नसबंदी के लिए पुरुषों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर जागरूकता रैली का आयोजन करता रहता है। इसके साथ ही समाज के अंदर नसबंदी के लिए पनपी हुई धारणा को तोड़ने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। - डॉ. दिव्य कीर्ति, उप-सिविल सर्जन परिवार नियोजन भिवानी।
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स्वास्थ्य विभाग की तरफ से परिवार नियोजन करवाने वालों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है लेकिन बावजूद इसके लोग रुचि कम दिखा रहे हैं। परिवार नियोजन के उप-सिविल सर्जन डॉ. दिव्य कीर्ति ने कहा कि समाज के अंदर नसंबदी के लिए पनपी हुई धारणा को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वैवाहिक प्रजनन स्वास्थ्य सुधारने और स्वस्थ व खुशहाल परिवार कि दिशा में पुरुषों की भागीदारी अहम होती है। पुरुष नसंबदी इसमें से एक है, यह सुरक्षित व सरल है। पुरुष नसबंदी में संसाधनों की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है और कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।
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शुरुआती दौर में नसबंदी को लेकर बनाए गए माहौल के कारण आज तक वह धारणा चली आ रही है। इसी खत्म करने की जरूरत है और इसके लिए पुरुषों को जागरूक करना जरूरी है। क्योंकि जब इस परियोजना को शुरू किया गया तो कई गलत धारणाएं पैदा हो गई। इनमें एक धारणा है कि शारीरिक बल या पुरुषत्व प्रभावित होना। जबकि एनएसवी विधि से होने वाली पुरुष नसबंदी में न तो कोई चीरा लगता है और न ही कोई टांका लगाना पड़ता है। साथ ही इससे किसी प्रकार की पौरुष क्षमता पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह एक 10 मिनट की सरल प्रक्रिया है। अनुभवी चिकित्सक इस प्रक्रिया को पूर्ण करवाते हैं।
प्रोत्साहन राशि का विवरण
विभाग की तरफ से नलबंदी करवाने वाली महिलाओं को 1400 रुपये व नसंबदी करवाने वाले पुरुषों को 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अगर कोई महिला डिलीवरी के साथ ही परिवार नियोजन करवाती है तो उसे 2200 रुपये दिए जाते हैं लेकिन इसके बाद भी पुरुष आगे नहीं आ रहे हैं। आशा वर्कर अगर किसी भी महिला को परिवार नियोजन के लिए तैयार करती है और उसके एक या दो बच्चे हैं तो उस आशा वर्कर को विभाग 1700 रुपये प्रोत्साहन राशि देता है। अगर तीन से चार बच्चे के बाद कोई महिला तैयार होती है तो आशा वर्कर को 200 रुपये प्रोत्साहन मिलता है।
नसबंदी का आंकड़ा
वर्ष पुरुष महिला
2018-19 41 4253
2019-20 65 4232
2020-21 43 2867
2021-22 41 2875
2022-23 40 3864
2023-24 42 2682
2024-25 36 2575
भ्रांंतियां और तथ्य
पुरुष नसबंदी के बारे में बहुत से लोग मानते हैं कि इससे पुरुषत्व घट जाता है। शारीरिक या मानसिक कमजोरी आ जाती है।
हकीकत : नसबंदी केवल शुक्राणुओं के प्रवाह को रोकती है, इससे पुरुष की हार्मोनल स्थिति और शारीरिक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता।
नसबंदी के बाद यौन इच्छा में कमी आ जाती है।
हकीकत: नसबंदी से यौन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता।
नसबंदी के बाद हॉर्मोनल बदलाव होते हैं।
हकीकत : नसबंदी से कोई हॉर्मोनल परिवर्तन नहीं होते। पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन स्तर पर कोई असर नहीं पड़ता।
नसबंदी केवल पुरुषों के लिए है, महिलाओं के लिए कोई विकल्प नहीं है।
हकीकत : महिलाओं के लिए भी स्थायी गर्भनिरोधक हैं, लेकिन पुरुषों के लिए नसबंदी अधिक सरल प्रक्रिया
होती है।
पुरुष नसबंदी से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हकीकत: नसबंदी का कैंसर से कोई संबंध नहीं पाया गया है। यह एक सुरक्षित प्रक्रिया है जो जीवनभर गर्भधारण को रोकने में मदद करती है।
जटिलता पर बीमा सुविधा
नसबंदी के बाद कोई जटिलता या असफलता (ऑपरेशन फेल होने पर) होती है, तो 30 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का बीमा या मुआवजा कवरेज के तौर पर भी मिल सकता है। यह सुविधा सरकारी अस्पताल या मान्यता प्राप्त निजी संस्थान में ही मान्य होती है।
नसबंदी के लिए पुरुषों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर जागरूकता रैली का आयोजन करता रहता है। इसके साथ ही समाज के अंदर नसबंदी के लिए पनपी हुई धारणा को तोड़ने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। - डॉ. दिव्य कीर्ति, उप-सिविल सर्जन परिवार नियोजन भिवानी।