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Haryana: मुख्य सूचना आयुक्त से 31 लाख की वसूली पर हाईकोर्ट की रोक, सरकारी आवास विवाद में बड़ा फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:22 PM IST
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सार
हाईकोर्ट ने वसूली को चुनौती देने वाली याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से जारी 31.13 लाख रुपये की दंडात्मक किराया वसूली नोटिस पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही वसूली को चुनौती देने वाली याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
टीवीएसएन प्रसाद 31 अक्तूबर 2024 को हरियाणा के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नियमानुसार उन्हें फरवरी 2025 तक सरकारी आवास रखने की अनुमति थी। इसी बीच 23 मई 2025 को उनकी नियुक्ति हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में हुई।
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सेक्टर-16 स्थित सरकारी आवास को दोबारा आवंटित करने के लिए आवेदन किया। प्रसाद का कहना है कि उनका आवेदन कई महीनों तक लंबित रखा गया और अंतत: 24 फरवरी 2026 को प्रशासन ने उन्हें उसी मकान में रहने की अनुमति दे दी।
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ऐसे में आवेदन के निस्तारण में हुई देरी प्रशासन की थी, जिसके लिए उन्हें दंडात्मक किराया और ब्याज चुकाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में वे लागू नीतियों और पूर्व प्रचलित व्यवस्थाओं के तहत सरकारी आवास के पात्र थे।
उन्होंने 25 मई 2025 तक की अवधि के लिए 3.22 लाख रुपये का पीनल रेंट पहले ही जमा करा दिया था। इसके बावजूद मई 2025 से फरवरी 2026 तक की अवधि के लिए 31.13 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली का नोटिस जारी कर दिया गया। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की दलीलें गंभीर विचारणीय हैं। इसी आधार पर अदालत ने वसूली पर रोक लगाते हुए प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें अगस्त में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
टीवीएसएन प्रसाद 31 अक्तूबर 2024 को हरियाणा के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नियमानुसार उन्हें फरवरी 2025 तक सरकारी आवास रखने की अनुमति थी। इसी बीच 23 मई 2025 को उनकी नियुक्ति हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में हुई।
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नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सेक्टर-16 स्थित सरकारी आवास को दोबारा आवंटित करने के लिए आवेदन किया। प्रसाद का कहना है कि उनका आवेदन कई महीनों तक लंबित रखा गया और अंतत: 24 फरवरी 2026 को प्रशासन ने उन्हें उसी मकान में रहने की अनुमति दे दी।
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ऐसे में आवेदन के निस्तारण में हुई देरी प्रशासन की थी, जिसके लिए उन्हें दंडात्मक किराया और ब्याज चुकाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में वे लागू नीतियों और पूर्व प्रचलित व्यवस्थाओं के तहत सरकारी आवास के पात्र थे।
उन्होंने 25 मई 2025 तक की अवधि के लिए 3.22 लाख रुपये का पीनल रेंट पहले ही जमा करा दिया था। इसके बावजूद मई 2025 से फरवरी 2026 तक की अवधि के लिए 31.13 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली का नोटिस जारी कर दिया गया। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की दलीलें गंभीर विचारणीय हैं। इसी आधार पर अदालत ने वसूली पर रोक लगाते हुए प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें अगस्त में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।