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हरियाणा में शुरू होगी नई ग्रीन ट्रेन तकनीक: जींद-सोनीपत ट्रैक पर दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन, रेलवे ने दी मंजूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 27 May 2026 11:46 AM IST
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सार
हाइड्रोजन ट्रेन अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। ट्रेन हाइड्रोजन गैस से चलेगी, जिससे डीजल की खपत कम होगी। ट्रेन का संचालन फिलहाल केवल जींद-सोनीपत सेक्शन पर ही किया जाएगा।
हाइड्रोजन ट्रेन
- फोटो : एक्स/अश्विनी वैष्णव
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विस्तार
भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित डेमू ट्रेन चलाने को मंजूरी दे दी है। रेलवे बोर्ड ने यह अनुमति कई तकनीकी और सुरक्षा शर्तों के साथ जारी की है। यह ट्रेन अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी।
रेलवे के अनुसार यह ट्रेन हाइड्रोजन गैस से चलेगी, जिससे डीजल की खपत और प्रदूषण दोनों कम होंगे। ट्रेन का संचालन फिलहाल केवल जींद-सोनीपत सेक्शन पर ही किया जाएगा। इसके रखरखाव की व्यवस्था दिल्ली के शकूरबस्ती डिपो में की जाएगी।
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि ट्रेन शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा। जींद में हाइड्रोजन गैस भरने और स्टोर करने की सुविधा के लिए लाइसेंस भी मिल चुका है। इसके साथ ही हाइड्रोजन प्लांट, ट्रेन सेट और बैटरी सिस्टम की सुरक्षा जांच रिपोर्ट में बताई गई सभी शर्तों को पूरा करना होगा।
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रेलवे ने यह भी कहा है कि हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन और ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनकी क्षमता प्रमाणित की जाएगी। शुरुआती तीन महीनों तक ट्रेन के साथ प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ भी मौजूद रहेगा ताकि रास्ते में आने वाली किसी तकनीकी समस्या को तुरंत ठीक किया जा सके।
रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा को लेकर कई अतिरिक्त निर्देश दिए हैं। इनमें हाइड्रोजन प्लांट की 24 घंटे निगरानी, सेंसर की नियमित सफाई, जरूरी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और पूरी परिसर की सुरक्षा शामिल है। रेलवे ने भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन के वैकल्पिक स्रोत तलाशने के निर्देश भी दिए हैं।
रेलवे के अनुसार यह ट्रेन हाइड्रोजन गैस से चलेगी, जिससे डीजल की खपत और प्रदूषण दोनों कम होंगे। ट्रेन का संचालन फिलहाल केवल जींद-सोनीपत सेक्शन पर ही किया जाएगा। इसके रखरखाव की व्यवस्था दिल्ली के शकूरबस्ती डिपो में की जाएगी।
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रेलवे बोर्ड ने कहा है कि ट्रेन शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा। जींद में हाइड्रोजन गैस भरने और स्टोर करने की सुविधा के लिए लाइसेंस भी मिल चुका है। इसके साथ ही हाइड्रोजन प्लांट, ट्रेन सेट और बैटरी सिस्टम की सुरक्षा जांच रिपोर्ट में बताई गई सभी शर्तों को पूरा करना होगा।
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रेलवे ने यह भी कहा है कि हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन और ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनकी क्षमता प्रमाणित की जाएगी। शुरुआती तीन महीनों तक ट्रेन के साथ प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ भी मौजूद रहेगा ताकि रास्ते में आने वाली किसी तकनीकी समस्या को तुरंत ठीक किया जा सके।
रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा को लेकर कई अतिरिक्त निर्देश दिए हैं। इनमें हाइड्रोजन प्लांट की 24 घंटे निगरानी, सेंसर की नियमित सफाई, जरूरी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और पूरी परिसर की सुरक्षा शामिल है। रेलवे ने भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन के वैकल्पिक स्रोत तलाशने के निर्देश भी दिए हैं।