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Charkhi Dadri News: पीपीपी कर्मचारियों की हड़ताल से जिले में कामकाज ठप, 500 से अधिक लोग परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:03 AM IST
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दादरी स्थित सरल केंद्र में पीपीपी काउंटर के बाहर चस्पाया गया पोस्टर।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना से जुड़े नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रिड) के कर्मचारियों की हड़ताल से सोमवार को जिलेभर में पीपीपी संबंधी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। जिला मुख्यालय स्थित सरल केंद्र और विभिन्न ब्लॉक स्तर के केंद्रों पर कार्य ठप होने से 500 से अधिक लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। फैमिली आईडी बनवाने, त्रुटियों में सुधार कराने और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने पहुंचे नागरिकों को निराश होकर लौटना पड़ा।
कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि और बकाया एरियर जारी करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन दिया गया, जिसके चलते उन्हें सामूहिक अवकाश का निर्णय लेना पड़ा।
सोमवार सुबह से ही सरल केंद्र और ब्लॉक कार्यालयों में पीपीपी से संबंधित कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कामकाज पूरी तरह ठप रहा। परिवार पहचान पत्र बनवाने, नाम, उम्र, आय सहित अन्य त्रुटियों को ठीक कराने तथा सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज अपडेट करवाने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार के बाद वापस लौटना पड़ा। जिला स्तर और ब्लॉक स्तर पर तैनात सभी मुख्य ऑपरेटर और कर्मचारी अवकाश पर रहे, जिससे किसी भी प्रकार की पीपीपी सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी।
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सरल केंद्रों और ब्लॉक कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों की राज्य स्तरीय हड़ताल के समर्थन में कार्य प्रभावित रहने संबंधी सूचनात्मक पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर देखकर अधिकांश लोग बिना काम कराए ही लौट गए। इनमें दूर-दराज के गांवों से पहुंचे बुजुर्ग, महिलाएं, विद्यार्थी और युवा शामिल थे। कई लोग पेंशन, राशन कार्ड, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए फैमिली आईडी अपडेट कराने आए थे।
ग्रामीणों और आम नागरिकों ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि अधिकारियों की उदासीनता और कर्मचारियों की नाराजगी के बीच आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों को छोटे-छोटे सुधारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं जिससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है।
अवकाश पर गए कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से सीमित वेतन पर पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में आईटी पॉलिसी अथवा नियमितीकरण नीति लागू करना, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना, वेतन हेड बदलना, जॉब सिक्योरिटी एक्ट-2024 के तहत शामिल करना, लंबित वार्षिक वेतन वृद्धि जारी करना, वेतन पुनरीक्षण, त्रैमासिक प्रदर्शन प्रोत्साहन लागू करना, चिकित्सा कल्याण नीति, यात्रा एवं संचार भत्ता, ईपीएफ लाभ, संशोधित ट्रांसफर नीति तथा कर्मचारी कल्याण एवं दुर्घटना कवरेज उपलब्ध कराना शामिल हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि और बकाया एरियर जारी करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि हर बार केवल आश्वासन दिया गया, जिसके चलते उन्हें सामूहिक अवकाश का निर्णय लेना पड़ा।
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सोमवार सुबह से ही सरल केंद्र और ब्लॉक कार्यालयों में पीपीपी से संबंधित कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कामकाज पूरी तरह ठप रहा। परिवार पहचान पत्र बनवाने, नाम, उम्र, आय सहित अन्य त्रुटियों को ठीक कराने तथा सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज अपडेट करवाने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार के बाद वापस लौटना पड़ा। जिला स्तर और ब्लॉक स्तर पर तैनात सभी मुख्य ऑपरेटर और कर्मचारी अवकाश पर रहे, जिससे किसी भी प्रकार की पीपीपी सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी।
सरल केंद्रों और ब्लॉक कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों की राज्य स्तरीय हड़ताल के समर्थन में कार्य प्रभावित रहने संबंधी सूचनात्मक पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर देखकर अधिकांश लोग बिना काम कराए ही लौट गए। इनमें दूर-दराज के गांवों से पहुंचे बुजुर्ग, महिलाएं, विद्यार्थी और युवा शामिल थे। कई लोग पेंशन, राशन कार्ड, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए फैमिली आईडी अपडेट कराने आए थे।
ग्रामीणों और आम नागरिकों ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि अधिकारियों की उदासीनता और कर्मचारियों की नाराजगी के बीच आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है। लोगों को छोटे-छोटे सुधारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं जिससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है।
अवकाश पर गए कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से सीमित वेतन पर पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में आईटी पॉलिसी अथवा नियमितीकरण नीति लागू करना, नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना, वेतन हेड बदलना, जॉब सिक्योरिटी एक्ट-2024 के तहत शामिल करना, लंबित वार्षिक वेतन वृद्धि जारी करना, वेतन पुनरीक्षण, त्रैमासिक प्रदर्शन प्रोत्साहन लागू करना, चिकित्सा कल्याण नीति, यात्रा एवं संचार भत्ता, ईपीएफ लाभ, संशोधित ट्रांसफर नीति तथा कर्मचारी कल्याण एवं दुर्घटना कवरेज उपलब्ध कराना शामिल हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।