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Fatehabad News: नहरी पानी का इंतजार और बढ़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 26 May 2026 11:19 PM IST
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रयिता में नहरी पानी सप्लाई के लिए बनाया जा रहा टैंक संवाद
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रतिया। शहरवासियों को इस बार भी गर्मी के मौसम में नहरी पेयजल सुविधा का इंतजार करना पड़ेगा। सहनाल रोड पर करीब दो वर्षों से चल रही नहरी पानी परियोजना का लगभग 20 प्रतिशत कार्य अभी अधूरा है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार परियोजना वर्ष 2026 के अंत तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद शहर के 17 वार्डों की करीब 55 हजार आबादी को नहरी आधारित स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा।
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए पांच बूस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इनमें सहनाल रोड स्थित मुख्य केंद्र, जनस्वास्थ्य विभाग का मंडी रोड कार्यालय, लाली रोड, सिटी थाना रोड और टोहाना रोड शामिल हैं। इन स्टेशनों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
जनस्वास्थ्य विभाग के जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर समय-समय पर पानी के 200 सैंपल हर वर्ष मानसून से पहले और बाद में लिए जाते हैं। इसके अलावा हर महीने अलग से पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं। विभाग की ओर से हर वर्ष 3000 पानी के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे आते हैं।
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नई लाइन 20 इंच क्षमता तक होंगी : जनस्वास्थ्य विभाग के जेई अमनदीप ने बताया कि पुरानी पाइपलाइन चार से छह इंच व्यास की थीं। समय बीतने के साथ उनका स्तर नीचे चला गया जिस कारण दबाव बढ़ने पर कई स्थानों पर उसके फटने की समस्या सामने आती रही। नई पाइपलाइन चार से 20 इंच क्षमता तक की होंगी। इससे पानी का दबाव संतुलित रहेगा और लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पेयजल संकट काफी हद तक कम होगा। साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु और प्रभावी बनेगी। संवाद
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100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही परियोजना
वर्तमान में शहर के 17 वार्डों में 22 वाटर वर्क्स से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। वर्षों पहले बिछाई गई पाइपलाइन जमीन के भीतर काफी नीचे चली गई हैं जिस कारण पानी का दबाव कम हो जाता है और अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा पानी में टीडीएस का स्तर 600 से 750 तक पहुंचने से उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। शहरवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए नहरी पानी परियोजना के लिए पहले 60 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। करीब दो वर्ष पूर्व सहनाल रोड पर परियोजना का कार्य शुरू किया गया। बाद में शहर में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए अतिरिक्त 40 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इस प्रकार परियोजना की कुल लागत लगभग 100 करोड़ रुपये हो गई है।
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95 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी
नहरी पानी को शहर के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए करीब 95 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 50 प्रतिशत पाइपलाइन का कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य अगले तीन से चार महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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ग्रामीण क्षेत्र भी कर रहे नहरी पानी का इंतजार
शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र भी नहरी पानी की सुविधा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के अधीन आने वाले रतिया क्षेत्र के लगभग 90 गांवों में से केवल 35 को ही नहरी आधारित पेयजल उपलब्ध हो रहा है। लगभग 70 फीसदी गांव अभी भी अधिक टीडीएस वाले पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में ग्रामीणों को भी परियोजना के शीघ्र पूरा होने का इंतजार है।
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नई लाइन 20 इंच क्षमता तक होंगी
जनस्वास्थ्य विभाग के जेई अमनदीप ने बताया कि पुरानी पाइपलाइन चार से छह इंच व्यास की थीं। समय बीतने के साथ उनका स्तर नीचे चला गया जिस कारण दबाव बढ़ने पर कई स्थानों पर उसके फटने की समस्या सामने आती रही। नई पाइपलाइन चार से 20 इंच क्षमता तक की होंगी। इससे पानी का दबाव संतुलित रहेगा और लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पेयजल संकट काफी हद तक कम होगा। साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु और प्रभावी बनेगी।
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत बनाने के लिए पांच बूस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इनमें सहनाल रोड स्थित मुख्य केंद्र, जनस्वास्थ्य विभाग का मंडी रोड कार्यालय, लाली रोड, सिटी थाना रोड और टोहाना रोड शामिल हैं। इन स्टेशनों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
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जनस्वास्थ्य विभाग के जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर समय-समय पर पानी के 200 सैंपल हर वर्ष मानसून से पहले और बाद में लिए जाते हैं। इसके अलावा हर महीने अलग से पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं। विभाग की ओर से हर वर्ष 3000 पानी के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे आते हैं।
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नई लाइन 20 इंच क्षमता तक होंगी : जनस्वास्थ्य विभाग के जेई अमनदीप ने बताया कि पुरानी पाइपलाइन चार से छह इंच व्यास की थीं। समय बीतने के साथ उनका स्तर नीचे चला गया जिस कारण दबाव बढ़ने पर कई स्थानों पर उसके फटने की समस्या सामने आती रही। नई पाइपलाइन चार से 20 इंच क्षमता तक की होंगी। इससे पानी का दबाव संतुलित रहेगा और लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पेयजल संकट काफी हद तक कम होगा। साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु और प्रभावी बनेगी। संवाद
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100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही परियोजना
वर्तमान में शहर के 17 वार्डों में 22 वाटर वर्क्स से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। वर्षों पहले बिछाई गई पाइपलाइन जमीन के भीतर काफी नीचे चली गई हैं जिस कारण पानी का दबाव कम हो जाता है और अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा पानी में टीडीएस का स्तर 600 से 750 तक पहुंचने से उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। शहरवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए नहरी पानी परियोजना के लिए पहले 60 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। करीब दो वर्ष पूर्व सहनाल रोड पर परियोजना का कार्य शुरू किया गया। बाद में शहर में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए अतिरिक्त 40 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इस प्रकार परियोजना की कुल लागत लगभग 100 करोड़ रुपये हो गई है।
95 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी
नहरी पानी को शहर के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए करीब 95 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 50 प्रतिशत पाइपलाइन का कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य अगले तीन से चार महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीण क्षेत्र भी कर रहे नहरी पानी का इंतजार
शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र भी नहरी पानी की सुविधा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के अधीन आने वाले रतिया क्षेत्र के लगभग 90 गांवों में से केवल 35 को ही नहरी आधारित पेयजल उपलब्ध हो रहा है। लगभग 70 फीसदी गांव अभी भी अधिक टीडीएस वाले पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में ग्रामीणों को भी परियोजना के शीघ्र पूरा होने का इंतजार है।
नई लाइन 20 इंच क्षमता तक होंगी
जनस्वास्थ्य विभाग के जेई अमनदीप ने बताया कि पुरानी पाइपलाइन चार से छह इंच व्यास की थीं। समय बीतने के साथ उनका स्तर नीचे चला गया जिस कारण दबाव बढ़ने पर कई स्थानों पर उसके फटने की समस्या सामने आती रही। नई पाइपलाइन चार से 20 इंच क्षमता तक की होंगी। इससे पानी का दबाव संतुलित रहेगा और लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पेयजल संकट काफी हद तक कम होगा। साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु और प्रभावी बनेगी।