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गाड़ी से बत्ती उतार त्यागा वीआईपी कल्चर

ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला Updated Fri, 21 Apr 2017 12:17 AM IST
red light drop from vehicle
red light drop from vehicle - फोटो : अमर उजाला
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जिला में अब वीवीआईपी और वीआईवी गाड़ियों की लाल, नारंगी और नीली बत्ती गुल हो जाएगी। मोदी सरकार के एक आदेश के लागू होने से 10 दिन पहले इसका असर दिखने लगा है। जहां राजनेताओं के एक के बाद एक लाल बत्ती उतारकर इस आदेश का समर्थन किया जा रहा है, वहीं अधिकारी वर्ग में कुरुक्षेत्र की डीसी सुमेधा कटारिया ने भी वीरवार को अपने सरकारी वाहन से बत्ती उतरवाकर अन्य अधिकारियों संकेत दे दिया है कि वे आदेश की पहली तारीख का इंतजार ना करें और वीआईपी ठाठबाठ को छोड़ जनता की सेवा के लिए काम में जुटें।



जाहिर है कि कुरुक्षेत्र जिला की थानेसर, शाहाबाद, लाडवा और पिहोवा में भाजपा के तीन और इनेलो से एक विधायक हैं, लेकिन इनमें लाडवा के विधायक डा. पवन सैनी ने उपरोक्त आदेश से करीब डेढ़ माह पहले ही अपने वाहन से नारंगी बत्ती उतार कर वीआईपी कल्चर को छोड़ने की बात कही थी। इसके लिए सोशल मीडिया पर उनकी काफी सराहना भी हुई। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद कुरुक्षेत्र गुरुकुल के आचार्य से हिमाचल के राज्यपाल बने आचार्य देवव्रत ने भी खुद अपनी गाड़ी से लाल बत्ती उतारकर इसे फेसबुक पर शेयर किया।


वहीं वीरवार को कुरुक्षेत्र पहुंचे राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज और राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने भी अपनी गाड़ी से खुद कुरुक्षेत्र में ही लाल बत्ती उतारी। इधर राज्यमंत्री और जिला के शाहाबाद हलके से विधायक कृष्ण बेदी ने अपने वाहन से लाल बत्ती उतारते हुए फोटो फेसबुक पर शेयर की। वहीं चंद दिनों पहले ही कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव अशोक मनोनित किए गए अशोक सुखीजा ने भी वीरवार शाम को लालबत्ती उतारी। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले की सराहना की।       
 
लाल बत्ती का मलाल      
कइयों की लगी लगाई बत्ती गुल हो रही है,वहीं विचित्र स्थिति उन नेताओं की है,जो लाल बत्ती हासिल करने के लिए लंबे समय से तिगड़म लड़ा रहे थे। अब इन्हें ये लाल बत्ती भले ना मिले मगर जीवन भर लाल बत्ती का मलाल जरुर रहेगा।       

दुकानों में बेकार हो जाएंगी ये लाल बत्तियां          
जिला में करीब 150 से अधिक कार शृंगार की दुकानें है। इनमें अधिकांश दुकानों में वीआईपी लाल बत्तियां  1700 से 2200 रुपये तक में बेची जाती है। मगर अब ये बत्तियां शायद ही कभी डिब्बे से बिक्री के लिए बाहर आए। सिर्फ राजनेताओं और अधिकारियों को ही नहीं,बल्कि इन दुकानदारों को भी नुकसान हुआ है।

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