240 पहुंचा एक्यूआई

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 09:57 PM IST
पलवल में हरसेक द्वारा भेजी गई पराली जलाने की लोकेशन।
पलवल में हरसेक द्वारा भेजी गई पराली जलाने की लोकेशन। - फोटो : Palwal
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होडल। हर वर्ष अक्टूबर और नवंबर महीने में जिले की आबोहवा खराब रहती है। जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को जागरूक भी किया जाता है, लेकिन इसका असर कुछ ही नजर आता। शुक्रवार की देर रात को जिले में एक्यूआई 240 तक पहुंच गया, लेकिन शनिवार सुबह कुछ कमी अवश्य आई है। शनिवार को 229 एक्यूआई दर्ज किया गया है। पिछले सात दिनों से लगातार एक्यूआई बढ़ा है।
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हालांकि इस बार पिछले साल की अपेक्षा एयर क्वालिटी बेहतर है, लेकिन दो दिनों से जिस तरह वायु गुणवत्ता बिगड़ रही है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले 10 दिनों के अंदर शहर में सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। किसान पहले ही विरोध कर रहे है ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाने से डर रहे हैं। जैसे-जैसे हवा में नमी बढ़ेगी वैसे ही पराली से निकलने वाला धुआं खतरनाक होता जाएगा। अगर 200 तक एयर क्वालिटी रहती है तो ठीक होती है कोई ज्यादा नुकसान नहीं होता।

पराली जलाने से होता है ये नुकसान
एक टन धान की पराली जलाने से हवा में तीन किलो ग्राम कार्बन कण, 513 किलो ग्राम कार्बन डाई-आक्साइड, 92 किलो ग्राम कार्बन मोनो-आक्साइड, 3.73 किलोग्राम नाइट्रस-आक्साइड, दो से सात किलो ग्राम मीथेन और 250 किलो ग्राम राख घुल जाती है। धुएं से आंखों में जलन एवं सांस लेने में दिक्कत होती है। प्रदूषित कणों के कारण खांसी, अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। प्रदूषित वायु के कारण फेफड़ों में सूजन, संक्रमण, निमोनिया एवं दिल की बीमारियों सहित अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
पराली जलाने पर लगेगा जुर्माना
जिला में यदि कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जाता है तो वह पर्यावरण के नुकसान की भरपाई देने के लिए उत्तरदायी होगा। जिसके तहत दो एकड़ भूमि तक 2500 रुपये प्रति घटना, दो से पांच एकड़ भूमि तक 5000 रुपये प्रति घटना व पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर 15,000 रुपये प्रति घटना जुर्माना देना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त जिला में धान के अवशेष जलाने पर धारा 144 लगाई हुई है। जिसके तहत अवशेष जलाने पर पूर्णतया प्रतिबंध है। अगर फिर भी कोई व्यक्ति इन आदेशों की उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध धारा 188-बी तथा वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत एफआईआर दर्ज करवाए जाने का भी प्रावधान है।
जिले में 21 जगह मिली फायर लोकेशन
कृषि विभाग के एसडीओ कुलदीप तेवतिया ने बताया कि किसान अगर खेतों में पराली जला रहे है तो हरसेक कृषि विभाग को लोकेशन भेज रहा है। उसके बाद कृषि अधिकारियों को इन लोकेशन को ट्रेस कर किसानों पर जुर्माना करते हैं। पिछले साल सैटेलाइट के जरिये सैकड़ों किसानों पर पराली जलाने मामला दर्ज किया गया था, लेकिन इस बार केवल जुर्माना लगाया जा रहा है। जिले में 21 जगह पराली जलाए जाने की लोकेशन मिल चुकी है। शुक्रवार को एक साथ आधा दर्जन जगह लोकेशन मिली थी। पराली जलाने को रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। हर गांव में कैंप आयोजित किया जा रहा है।
पिछले दो दिनों से जिले की हवा खराब हुई है। इस कारण आंखों में जलन अधिक हो रही है। बाहर निकलते समय आंखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए और चश्मे का प्रयोग करना चाहिए। अगर फिर भी आराम नहीं मिल रहा है तो चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
- डॉ. पंकज, उपमंडल नागरिक अस्पताल

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