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Panipat: आज रिफाइनरी में 2जी एथेनॉल प्लांट का ऑनलाइन शुभारंभ करेंगे पीएम मोदी, किसानों की बढ़ेगी आय

संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 10 Aug 2022 06:09 AM IST
सार

पानीपत के गाव बड़ौली और आसन में पराली के लिए कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने दोनों साइटों का अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : ANI
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विस्तार

अब हरियाणा के पानीपत जिले में किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि यह उनकी आय का जरिया बनेगी। यह संभव होगा रिफाइनरी में शुरू हो रहे 2जी एथेनॉल प्लांट से, जिसका ऑनलाइन शुभारंभ बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 



विदित हो कि रिफाइनरी में नवनिर्मित 2जी एथेनॉल प्लांट में पराली से ही एथनॉल बनेगा। पराली खरीदने के लिए जिले भर में कृषि विभाग कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करेगा। इनके माध्यम से ही किसानों के खेत से पराली खरीदी जाएगी। पराली की गांठें बनाकर कलेक्शन सेंटर पर भेजी जाएंगी।


इनमें एक कलेक्शन सेंटर गांव बड़ौली और गांजबड़ की साइट पर और दूसरा गांव आसन कलां की साइट पर स्थापित होगा। मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह समेत सहायक कृषि अभियंता सुधीर कुमार और खंड कृषि अधिकारी सेवा सिंह ने दोनों साइटों का अवलोकन किया।

रिफाइनरी में 900 करोड़ से तैयार किया गया है प्लांट 
पराली से एथेनॉल बनाने वाला प्लांट पानीपत रिफाइनरी में बनकर तैयार है। इसे बनाने में 900 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 100 किलो लीटर एथेनॉल बनाने की है। इस प्लांट को पराली उपलब्ध करवाने के लिए कृषि विभाग भी तत्पर है। पराली जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य और केंद्र सरकार पिछले कई साल से लगातार प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को सीएचसी स्थापना और व्यक्तिगत कृषि यंत्रों पर भारी अनुदान भी दिया जा रहा है।

सिर्फ पानीपत से 3.80 लाख टन पराली का होता है उत्पादन 
डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि पानीपत सहित करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल में बड़ी मात्रा में धान का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में पराली का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। सिर्फ पानीपत में ही 3.80 लाख टन पराली का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है। उन्होंने बताया कि जिले में 30 सीएचसी पर बेलर मशीन उपलब्ध है और तीन व्यक्तिगत बेलर हैं। इन सभी के द्वारा किसानों से पराली खरीद करने बाद कलेक्शन सेंटर पर भेजी जाएगी, जहां से पराली की गांठों को आसानी से एथनॉल प्लांट में पहुंचाया जाएगा।

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