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Rewari News: बेजुबान परिंदो के दोस्त, घोसले तैयार कर करते हैं भेंट
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 04 Jun 2026 10:59 PM IST
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रेवाड़ी। पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों को बचाने के लिए कई लोग अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। इन्हीं लोगों में शामिल गांव चिमनावास निवासी पर्यावरण मित्र राजकुमार हैं जो दस वर्षों से गौरेया और अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। वह अपने खर्च पर घोंसले तैयार करवाकर लोगों को भेंट करते हैं।
शादी-विवाह, पारिवारिक समारोहों और मंदिरों में भी घोंसले वितरित कर लोगों को पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर में एक घोंसला लगाने के साथ दाना-पानी की व्यवस्था करे तो गौरेया सहित अनेक पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है।
बताया कि बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के जंगल और प्राकृतिक आवासों की कमी के कारण गौरेया की संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में लोगों की छोटी-छोटी पहल इस पक्षी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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कोरोना काल से पक्षियों के संरक्षण किया शुरू
गांव निमोठ निवासी निर्मल कुमार ने कोरोना काल से पक्षियों के संरक्षण का अभियान शुरू किया। उन्होंने अपने घर में 15 से अधिक घोंसले लगाए हुए हैं और अब तक 100 से ज्यादा घोंसले लोगों को वितरित कर चुके हैं। इसके अलावा गांव की बणी में पशु-पक्षियों के लिए पानी का होद भी बनवाया है। उनका कहना है कि घोंसले ऐसे स्थानों पर लगाने चाहिए जहां बिल्ली, कुत्ते, कौए और अन्य बड़े पक्षी आसानी से न पहुंच सकें। इससे गौरेया की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों से अपील है कि वे अपने घरों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर घोंसले लगाएं, पौधे रोपें तथा पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें। इससे न केवल गौरेया का संरक्षण होगा बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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शादी-विवाह, पारिवारिक समारोहों और मंदिरों में भी घोंसले वितरित कर लोगों को पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर में एक घोंसला लगाने के साथ दाना-पानी की व्यवस्था करे तो गौरेया सहित अनेक पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है।
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बताया कि बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट के जंगल और प्राकृतिक आवासों की कमी के कारण गौरेया की संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में लोगों की छोटी-छोटी पहल इस पक्षी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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निर्मल, पर्यावरण प्रेमी

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