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Rewari News: फैक्टरियों में आग पर मानवाधिकार आयोग सख्त, पांच विभागों से मांगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 04 Jun 2026 11:04 PM IST
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रेवाड़ी। जिले के बावल व धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्टरियों में हुई आग की घटनाओं को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत : संज्ञान लिया है। आयोग ने श्रमिकों की सुरक्षा और फैक्टरी प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए प्रशासन समेत पांच विभागों से रिपोर्ट तलब की है।
मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। इसमें बावल की जीएलएस केमिकल्स और धारूहेड़ा की टॉक्समो स्कूटर्स फैक्टरी में लगी आग की घटनाओं की समीक्षा की जाएगी।
गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने रेवाड़ी प्रशासन सहित पांच विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने आदेश में कहा कि 19 मई को बावल स्थित जीएलएस केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड में भीषण आग लगी थी।
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समाचार रिपोर्टों में फैक्टरी में प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मियों की कमी का उल्लेख किया है। वहां आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम होने की बात कही गई लेकिन प्रशिक्षित आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम के अभाव में आग पर समय से नियंत्रण नहीं पाया जा सका।
घटना के बाद कुछ कर्मचारियों के लापता होने, भवन के हिस्से ढहने और एनडीआरएफ की तैनाती जैसी बातों को भी आयोग ने गंभीर माना है।
आयोग ने आदेश में कहा कि मात्र दो सप्ताह के भीतर बावल एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कई फैक्टरियों में आग की घटनाएं होना चिंता का विषय है। इससे औद्योगिक सुरक्षा नियमों के पालन, सुरक्षा, अग्निशमन तैयारियों, आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
धारूहेड़ा की टॉक्समो स्कूटर फैक्टरी भी जांच के घेरे में
आयोग ने धारूहेड़ा के आलमगीरपुर-राजपुरा क्षेत्र में स्थित टॉक्समो स्कूटर्स की फैक्टरी में लगी आग का भी संज्ञान लिया है। आग फैक्टरी की तीसरी मंजिल पर लगी। बैटरियों में विस्फोट की जताई गई। बैटरियों, रबर ट्यूबों और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग फैल गई। आग बुझाने के लिए लगभग दस दमकल गाड़ियों को लगाया गया था। आयोग ने विशेष रूप से उन रिपोर्टों का उल्लेख किया है जिनमें कहा गया कि फैक्टरी हाल ही में नए भवन में शिफ्ट हुई थी और वहां अग्निशमन प्रणाली एवं जल भंडारण व्यवस्था पूरी तरह स्थापित होने से पहले ही उत्पादन कार्य शुरू कर दिया गया था। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह अनिवार्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
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इन पांच विभागों के अधिकारियों से मांगा जवाब
आयोग ने उपायुक्त रेवाड़ी से दोनों घटनाओं की तथ्यात्मक स्थिति, राहत एवं बचाव कार्य और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी और पुलिस अधीक्षक से एफआईआर/डीडीआर, जांच की स्थिति और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई का विवरण मांगा है। सहायक निदेशक, औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से सुरक्षा मानकों के अनुपालन, निरीक्षण रिपोर्ट और पाई गई कमियों, सहायक श्रम आयुक्त से प्रभावित श्रमिकों को दी गई सहायता, मुआवजा और श्रम कानूनों के पालन की स्थिति की जानकारी मांगी है। फायर सेफ्टी अधिकारी से फायर एनओसी, अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता, निरीक्षण में मिली कमियां और की गई कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।
मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। इसमें बावल की जीएलएस केमिकल्स और धारूहेड़ा की टॉक्समो स्कूटर्स फैक्टरी में लगी आग की घटनाओं की समीक्षा की जाएगी।
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गांव खरखड़ा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश यादव की शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने रेवाड़ी प्रशासन सहित पांच विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने आदेश में कहा कि 19 मई को बावल स्थित जीएलएस केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड में भीषण आग लगी थी।
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समाचार रिपोर्टों में फैक्टरी में प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मियों की कमी का उल्लेख किया है। वहां आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम होने की बात कही गई लेकिन प्रशिक्षित आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम के अभाव में आग पर समय से नियंत्रण नहीं पाया जा सका।
घटना के बाद कुछ कर्मचारियों के लापता होने, भवन के हिस्से ढहने और एनडीआरएफ की तैनाती जैसी बातों को भी आयोग ने गंभीर माना है।
आयोग ने आदेश में कहा कि मात्र दो सप्ताह के भीतर बावल एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कई फैक्टरियों में आग की घटनाएं होना चिंता का विषय है। इससे औद्योगिक सुरक्षा नियमों के पालन, सुरक्षा, अग्निशमन तैयारियों, आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
धारूहेड़ा की टॉक्समो स्कूटर फैक्टरी भी जांच के घेरे में
आयोग ने धारूहेड़ा के आलमगीरपुर-राजपुरा क्षेत्र में स्थित टॉक्समो स्कूटर्स की फैक्टरी में लगी आग का भी संज्ञान लिया है। आग फैक्टरी की तीसरी मंजिल पर लगी। बैटरियों में विस्फोट की जताई गई। बैटरियों, रबर ट्यूबों और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग फैल गई। आग बुझाने के लिए लगभग दस दमकल गाड़ियों को लगाया गया था। आयोग ने विशेष रूप से उन रिपोर्टों का उल्लेख किया है जिनमें कहा गया कि फैक्टरी हाल ही में नए भवन में शिफ्ट हुई थी और वहां अग्निशमन प्रणाली एवं जल भंडारण व्यवस्था पूरी तरह स्थापित होने से पहले ही उत्पादन कार्य शुरू कर दिया गया था। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह अनिवार्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
इन पांच विभागों के अधिकारियों से मांगा जवाब
आयोग ने उपायुक्त रेवाड़ी से दोनों घटनाओं की तथ्यात्मक स्थिति, राहत एवं बचाव कार्य और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी और पुलिस अधीक्षक से एफआईआर/डीडीआर, जांच की स्थिति और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई का विवरण मांगा है। सहायक निदेशक, औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य से सुरक्षा मानकों के अनुपालन, निरीक्षण रिपोर्ट और पाई गई कमियों, सहायक श्रम आयुक्त से प्रभावित श्रमिकों को दी गई सहायता, मुआवजा और श्रम कानूनों के पालन की स्थिति की जानकारी मांगी है। फायर सेफ्टी अधिकारी से फायर एनओसी, अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता, निरीक्षण में मिली कमियां और की गई कार्रवाई का विवरण मांगा गया है।