{"_id":"6a23165bd156adee84014fc6","slug":"literacy-campaign-to-begin-in-jail-28-prisoners-registered-rewari-news-c-198-1-fth1001-239666-2026-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: जेल में शुरू होगा साक्षरता अभियान, 28 बंदियों का हुआ पंजीकरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: जेल में शुरू होगा साक्षरता अभियान, 28 बंदियों का हुआ पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 06 Jun 2026 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रेवाड़ी। जिले में साक्षरता अभियान को विस्तार देते हुए अब जिला जेल (फिदेड़ी) के निरक्षर बंदियों को भी शिक्षित किया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए 28 बंदियों का पंजीकरण पूरा कर लिया है। अभियान के संचालन की जिम्मेदारी जेल के निकट स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय फिदेड़ी को सौंपी गई है।
केंद्र सरकार की उल्लास (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) योजना के तहत यह पहल की जा रही है। जेल परिसर में कक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि बंदियों को नियमित रूप से शिक्षा प्रदान की जा सके। पढ़ाई के लिए जेल के भीतर और बाहर से स्वयंसेवकों का सहयोग भी लिया जाएगा।
उल्लास योजना के अंतर्गत 15 मार्च को जिले के 189 केंद्रों पर साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में 1,184 परीक्षार्थियों ने भाग लिया था। इनमें 216 पुरुष और 968 महिलाएं शामिल थीं।
विज्ञापन
जबकि जिले से कुल 2,145 लोगों ने आवेदन किया था। महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में काफी अधिक रही। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिशों के अनुरूप भारत सरकार ने वर्ष 2022 में पांच वर्ष की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम ‘उल्लास’ योजना शुरू की थी।
योजना का उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन लोगों को शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी कारणवश पढ़ाई नहीं कर सके।
अब इसी कड़ी में जेल में बंद निरक्षर कैदियों को भी साक्षर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षा के माध्यम से बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने जिले में अधिक से अधिक लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नियमित निगरानी के माध्यम से वर्ष 2027 तक रेवाड़ी को पूर्ण साक्षर जिला बनाने का लक्ष्य है।
-- -- -- -
वर्जन :
अभियान के तहत बंदियों को दैनिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक विषयों की जानकारी दी जाएगी। पाठ्यक्रम में हस्ताक्षर करना, बैंक संबंधी फॉर्म भरना, समाचार पत्र पढ़ना, सामान्य गणना करना तथा जरूरी दस्तावेजों को समझना शामिल रहेगा। इस पहल से जेल में शैक्षणिक माहौल मजबूत होगा। - डॉ. अशोक नामवाल, नोडल अधिकारी, उल्लास योजना
केंद्र सरकार की उल्लास (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) योजना के तहत यह पहल की जा रही है। जेल परिसर में कक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि बंदियों को नियमित रूप से शिक्षा प्रदान की जा सके। पढ़ाई के लिए जेल के भीतर और बाहर से स्वयंसेवकों का सहयोग भी लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
उल्लास योजना के अंतर्गत 15 मार्च को जिले के 189 केंद्रों पर साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में 1,184 परीक्षार्थियों ने भाग लिया था। इनमें 216 पुरुष और 968 महिलाएं शामिल थीं।
Trending Videos
जबकि जिले से कुल 2,145 लोगों ने आवेदन किया था। महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में काफी अधिक रही। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिशों के अनुरूप भारत सरकार ने वर्ष 2022 में पांच वर्ष की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम ‘उल्लास’ योजना शुरू की थी।
योजना का उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन लोगों को शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी कारणवश पढ़ाई नहीं कर सके।
अब इसी कड़ी में जेल में बंद निरक्षर कैदियों को भी साक्षर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षा के माध्यम से बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
शिक्षा विभाग ने जिले में अधिक से अधिक लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नियमित निगरानी के माध्यम से वर्ष 2027 तक रेवाड़ी को पूर्ण साक्षर जिला बनाने का लक्ष्य है।
वर्जन :
अभियान के तहत बंदियों को दैनिक जीवन से जुड़े व्यावहारिक विषयों की जानकारी दी जाएगी। पाठ्यक्रम में हस्ताक्षर करना, बैंक संबंधी फॉर्म भरना, समाचार पत्र पढ़ना, सामान्य गणना करना तथा जरूरी दस्तावेजों को समझना शामिल रहेगा। इस पहल से जेल में शैक्षणिक माहौल मजबूत होगा। - डॉ. अशोक नामवाल, नोडल अधिकारी, उल्लास योजना