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ठगों ने डेढ़ माह में 9 लोगों से 19 लाख रुपये से ज्यादा ठगे

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 11:24 PM IST
Thugs cheated more than 19 lakh rupees from 9 people in one and a half month
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रेवाड़ी। जिले में ठगों ने पिछले डेढ़ महीने में साइबर ठगों की ओर से ऑनलाइन के माध्यम और नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देकर नौ लोगों के साथ ठगी करने के मामले सामने आए हैं। ठगों ने पीड़ितों से करीब 19 लाख से ज्यादा रुपये ठग लिए हैं। अभी कई मामलों में आरोपी पकड़े नहीं जा सके हैं। वहीं, पुलिस ठगों के आगे बेबस नजर आ रही है। वहीं ठगी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से लोग शिकायत करने से भी बच रहे हैं।

1 जुलाई : जिले के एक शख्स के साथ किराये पर गाड़ी लेकर उसकी गाड़ी को किसी और को बेच देने का मामला सामने आया था। 4 गाड़ियां हायर करने के दो माह बाद तक आरोपी ने इनका किराया भी दिया, लेकिन जब किराया देना बंद किया तो पता चला कि आरोपी ने उसकी गाड़ी बेच दी। मॉडल टाउन थाना पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। इस मामले में आरोपी पकड़े नहीं गए हैं।

2 जुलाई : साइबर ठगों ने एक शख्स के खाते से 1 लाख 43 हजार रुपए निकाल लिए। पीड़ित ने गुरुग्राम से रेवाड़ी तक ओला कैब बुक की थी। बुकिंग के 200 रुपए एक्सट्रा वसूल करने पर उसने कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क किया तो ठग से पाला पड़ गया और उसने खाता ही साफ कर दिया। पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू की थी। लेकिन अभी तक आरोपी के बारें में कोई सुराग नहीं लगा है।
5 जुलाई : गांव कालूवास निवासी एक युवक से एसएससी में क्लर्क लगवाने के नाम पर 5 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोपी ने न नौकरी लगवाई और न ही उसके पैसे वापस लौटाए। पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करा दिया है। लेकिन इस मामले में भी पुलिस के हाथ खाली है।
12 जुलाई : शहर में एक महिला डॉक्टर के साथ एक लाख रुपए की ठगी हो गई है। डॉक्टर को शातिर ने कोरियर कंपनी का कर्मचारी बनकर एक लिंक भेजा और फिर खाते से नकदी साफ कर दी। इसकी शिकायत उन्होंने मॉडल टाउन थाना पुलिस को दी थी, लेकिन आज तक आरोपी का पुलिस पता नहीं लगा पाई है।
16 जुलाई : शहर के गणपत नगर स्थित मैटल फैक्टरी संचालक ने बावल स्थित एक कंपनी के निदेशकों पर साढ़े तीन कराड़े रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कसौला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने 16 जुलाई को यह मामला अदालत के आदेश पर दर्ज किया है। फैक्टरी संचालक द्वारा आरोपियों के खिलाफ फरवरी 2022 में भी धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस इस मामले में कार्रवाई अभी तक नहीं कर पाई है।
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18 जुलाई : गांव गुरावड़ा निवासी एक युवक से आर्मी जवान बनकर मोटर साइकिल बेचने के नाम पर 29 हजार रुपये की ठग लिए। ठगी का शिकार होने के बाद युवक ने रोहड़ाई थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच भी शुरू की थी, लेकिन पुलिस आरोपी की पहुंच से दूर है।
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19 जुलाई : शहर के कुतुबपुर निवासी एक युवक से भोंडसी जेल में बंद दो कैदियों में पहले अच्छी दोस्ती हुई। फिर दोनों बाहर निकले तो एक दोस्त दूसरे का पांच लाख रुपये लेकर भाग गया। दोस्त ने शराब व्यवसाय में साझेदारी का लालच देकर रुपये उससे चार लाख रुपये नकद और एक लाख का चेक लिये और फिर गायब हो गया। पीड़ित ने इस बाबत मॉडल टाउन थाना में 19 जुलाई को उसके खिलाफ शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में नाकाम साबित हुई है।
21 जुलाई : जिले में दो भाइयों को फौज में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति ने 9 लाख 10 हजार रुपए ठग लिए। आरोपी ने न पैसे वापस दिए और न ही उनकी नौकरी लगवाई। 2 साल तक धक्के खाने के बाद अब पुलिस ने गृहमंत्री अनिज विज के आदेश पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। लेकिन मंत्री के आदेश के बावजूद अभी तक पुलिस आरापी की पहचान तक नहीं कर पाई है।
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21 जुलाई : साइबर ठग ने बावल के मोहल्ला आनंद नगर निवासी एक युवक को उनका बिजली का बिल बकाया बताकर मोबाइल में एनी डेस्क एप डाउनलोड करा लिया और उनके खाते से 50 हजार रुपये निकाल लिए। मोबाइल पर मैसेज आने के बाद युवक को ठगी का पता लगा तथा पुलिस व बैंक में शिकायत दी। बावल थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
22 जुलाई : पुलिस को दी शिकायत में परशुराम कालोनी निवासी कविता ने कहा कि उन्होंने इंटरनेट पर पार्ट टाइम नौकरी के लिए सर्च किया था। इंटरनेट पर उन्हें एक वाट्सएप नंबर मिला। कविता ने बात की तो कंपनी में नौकरी पाने की प्रक्रिया के बारे में बताया और व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा। लिंक खोल कर महिला ने कुछ सामान खरीदा और साइबर ठगों ने कुछ रुपये भी महिला को वापस दे दिए।
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23 जुलाई : शहर में एक शख्स के साथ साढ़े 30 हजार रुपये की ठगी हो गई। पीड़ित ने 199 रुपये की घड़ी ऑर्डर की थी। घड़ी का ऑर्डर नहीं पहुंचा तो पैसे रिफंड करने के लिए गुगल पर नंबर सर्च किया, लेकिन यह नंबर साइबर ठग का लग गया।
26 जुलाई : धारूहेड़ा की संतोष कॉलोनी में रहने वाले पंजाब के एक युवक को क्रेडिट कार्ड का वार्षिक चार्ज बंद करने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 50 हजार रुपये ठग लिए। मोबाइल पर बैंक खाते से नकदी निकलने का पता लगने के बाद पीड़ित ने पुलिस को शिकायत दी थी। जिसमें आरोपी का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।
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पुलिस ने ठगी का एक आरोपी पकड़ा
15 जुलाई को गांव सालावास निवासी एक व्यापारी को टाइल भेजने का झांसा देकर दो लाख 60 हजार रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के जिला बरेली के गांव अलीगंज निवासी हसीन खान के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी से ठगी के एक लाख बीस हजार रुपए बरामद किए हैं।
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साइबर क्राइम रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी
पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया और विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 के बैनर लगाकर आमजन को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ये हेल्पलाइन नंबर चौबीसों घंटे खुला रहता है और धोखाधड़ी के शिकार लोग कभी भी इस हेल्पलाइन नंबर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने बच्चों और विशेषकर महिलाओं से साइबर अपराध घोटालों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि साइबर ठगों द्वारा क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ऑनलाइन शॉपिंग, रिश्तेदार बनकर खाते में पैसे डलवाने, लिंक भेजकर ठगी की शिकायतें मिलती रहती हैं, हमें ऐसे ठगों से सावधान एवं सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर अकसर लोग शिकायत करने में देरी कर देते हैं। जिसकी वजह से उनका नुकसान हो जाता है। इसलिए साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 डायल करें।
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अनजान व्यक्ति को ई-मेल से कोई भी जानकारी न दें : डीएसपी
डीएसपी अमित भाटिया ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति को ई-मेल के माध्यम से निजी जानकारी न दें, जिसे नहीं जानते हैं। कम से कम, यूआरएल (यूनिफार्म रिसोर्स लोकेटर) में एचटीटीपीएस (वेब एड्रेस) देखें ताकि समझ सके कि यह एक सुरक्षित कनेक्शन है। वेब पते को प्रत्यक्ष रूप से टाइप करके वेबसाइट पर जाएं। अवांछित ई-मेल में लिंक को क्लिक या कट और पेस्ट न करें। वैध दिखने वाली लिंक और वेबसाइट वास्तव में फर्जी हो सकती हैं, जिन्हें जानकारी चुराने या वायरस भेजने के लिए डिजाइन किया गया हो सकता है। संवेदनशील जानकारी को इंटरनेट या ई-मेल से सुलभ स्थानों पर न डालें। यहां अनलिक किए गए वेब पेज भी मिल सकते हैं। यह कभी न मानें की ईमेल, त्वरित संदेश (आइएम), टेक्स्ट या अटेचमेंट निजी या गोपनीय हैं। यदि ई-मेल के माध्यम से कोई भी डाटा प्राप्त करते हैं, तो इसे कम से कम समय के लिए रखें और इसे सुरक्षित रूप से हटा दें। इसमें अटैचमेंट शामिल हैं। ई-मेल के माध्यम से अटैचमेंट भेजने से बचें। इसके बजाय गूगल ड्राइव (डिस्क लिंक) का उपयोग करें। यह प्राप्तकर्ताओं द्वारा डाउनलोड किए जा रहे डेटा से बचा जाता है। उपयोगकर्ता ज्यादा से ज्यादा गुप्त प्रति (ब्लाइंड कार्बन कापी) ऐप लाइन का उपयोग करें। यह ई-मेल पतों को छिपाकर सुरक्षित रखता है और ई-मेल को पढ़ने में आसान बनाता है। उन्होंने बताया कि पुलिस जन-जन तक पहुंच कर जागरूक करने का प्रयास कर रही है।
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अधिकारी का वर्जन:
साइबर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए टीम लगाई हुई है। साइबर ठगों के पास एक नंबर नहीं होते वो अपना नंबर बदलते रहते हैं। इसलिए उनको पकड़ने के लिए थोड़ा समय जरूर लगता है।
- राहुल, थाना प्रभारी, साइबर क्राइम

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