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Rewari News: आईजीयू की उत्तरपुस्तिकाओं से छेड़छाड़ मामले में दो आरोपियों को मिली जमानत
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 31 May 2026 11:32 PM IST
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रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) मीरपुर की उत्तरपुस्तिकाओं में छेड़छाड़ और हेराफेरी के मामले में सत्र न्यायाधीश गुरविंदर सिंह वाधवा की अदालत ने 30 मई को दो आरोपियों को जमानत दे दी है। जमानत पाने वाले आरोपी गोकलपुर निवासी देवी लाल और पुंसिका निवासी विकास कुमार उर्फ छोटू है।
मामला आईजीयू में वर्ष 2023 की परीक्षा से जुड़ा है। आईजीयू के परीक्षा नियंत्रक की ओर से पुलिस अधीक्षक को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा गया था कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान दो छात्राओं की उत्तरपुस्तिकाओं में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि मूल मूल्यांकन के दौरान जिन पृष्ठों को खाली बताते हुए क्रॉस किया गया था, बाद में उन्हीं पृष्ठों पर उत्तर लिखे गए मिले।
साथ ही कुछ प्रश्नों के अंकों में भी बदलाव पाया गया। विश्वविद्यालय की जांच समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद धारूहेड़ा थाना में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस जांच के दौरान 2 छात्राओं से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराने का काम योगेश शर्मा ने किया था।
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जांच आगे बढ़ने पर योगेश शर्मा से पूछताछ की गई। उसने बताया कि उत्तरपुस्तिकाएं विश्वविद्यालय से विकास कुमार उर्फ छोटू के माध्यम से बाहर लाई गई थीं। इसके बाद विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार विकास ने पूछताछ में विश्वविद्यालय के कर्मचारी देवी लाल और चपरासी कुलदीप सिंह की भूमिका का जिक्र किया। जांच में सामने आया कि उत्तरपुस्तिकाएं विश्वविद्यालय के स्टोर से निकालकर बाहर पहुंचाई गई थीं।
पुलिस ने बैंक खातों की जांच में कुछ लेन-देन का उल्लेख किया। जांच के अनुसार एक छात्रा की ओर से योगेश शर्मा के खाते में और बाद में योगेश शर्मा की ओर से विकास कुमार के खाते में धनराशि ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने इसे उत्तरपुस्तिकाएं बाहर निकालने और उनमें बदलाव कराने से जोड़कर देखा। मामले में उत्तरपुस्तिकाओं को हस्तलेखन मिलान के लिए क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भोंडसी भी भेजा गया।
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आरोपियों की ओर से दी गई ये दलीलें
जमानत पर सुनवाई के दौरान देवी लाल के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में नहीं था और उनके खाते में किसी प्रकार की राशि ट्रांसफर होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सह-आरोपी कुलदीप सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। जांच पूरी होकर अदालत में चालान पेश किया जा चुका है। वहीं विकास कुमार उर्फ छोटू के वकील की ओर से दलील दी गई कि वह 3 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। मामले की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है और अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर हैं। सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सेशन जज गुरविंदर सिंह वाधवा ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।
मामला आईजीयू में वर्ष 2023 की परीक्षा से जुड़ा है। आईजीयू के परीक्षा नियंत्रक की ओर से पुलिस अधीक्षक को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा गया था कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान दो छात्राओं की उत्तरपुस्तिकाओं में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि मूल मूल्यांकन के दौरान जिन पृष्ठों को खाली बताते हुए क्रॉस किया गया था, बाद में उन्हीं पृष्ठों पर उत्तर लिखे गए मिले।
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साथ ही कुछ प्रश्नों के अंकों में भी बदलाव पाया गया। विश्वविद्यालय की जांच समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद धारूहेड़ा थाना में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस जांच के दौरान 2 छात्राओं से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से उत्तरपुस्तिकाएं उपलब्ध कराने का काम योगेश शर्मा ने किया था।
जांच आगे बढ़ने पर योगेश शर्मा से पूछताछ की गई। उसने बताया कि उत्तरपुस्तिकाएं विश्वविद्यालय से विकास कुमार उर्फ छोटू के माध्यम से बाहर लाई गई थीं। इसके बाद विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार विकास ने पूछताछ में विश्वविद्यालय के कर्मचारी देवी लाल और चपरासी कुलदीप सिंह की भूमिका का जिक्र किया। जांच में सामने आया कि उत्तरपुस्तिकाएं विश्वविद्यालय के स्टोर से निकालकर बाहर पहुंचाई गई थीं।
पुलिस ने बैंक खातों की जांच में कुछ लेन-देन का उल्लेख किया। जांच के अनुसार एक छात्रा की ओर से योगेश शर्मा के खाते में और बाद में योगेश शर्मा की ओर से विकास कुमार के खाते में धनराशि ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने इसे उत्तरपुस्तिकाएं बाहर निकालने और उनमें बदलाव कराने से जोड़कर देखा। मामले में उत्तरपुस्तिकाओं को हस्तलेखन मिलान के लिए क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भोंडसी भी भेजा गया।
आरोपियों की ओर से दी गई ये दलीलें
जमानत पर सुनवाई के दौरान देवी लाल के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में नहीं था और उनके खाते में किसी प्रकार की राशि ट्रांसफर होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सह-आरोपी कुलदीप सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। जांच पूरी होकर अदालत में चालान पेश किया जा चुका है। वहीं विकास कुमार उर्फ छोटू के वकील की ओर से दलील दी गई कि वह 3 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। मामले की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है और अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर हैं। सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सेशन जज गुरविंदर सिंह वाधवा ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।