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Rohtak News: सात की जगह 75 हजार का भेजा बिजली बिल, आयोग ने लगाया जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 09 Jun 2026 05:55 AM IST
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रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) की तरफ से जारी 55,693 रुपये के बिजली बिल को गलत मानते हुए उसे संशोधित करने के आदेश दिए हैं।
बिजली निगम 7 हजार की जगह बकाया जोड़कर 75,671 रुपये का बिल जारी किया था। आयोग ने निगम को उपभोक्ता को 10 हजार रुपये देने व 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का भी निर्देश दिया है।
मॉडल टाउन निवासी निधि सचदेवा ने आयोग में शिकायत दायर की थी कि वह किरायेदार के रूप में एक घरेलू बिजली कनेक्शन का उपयोग कर रही थीं। मार्च 2021 में उन्हें 48 दिनों का 55,693 रुपये का बिल भेज दिया गया। बिल में 7004 यूनिट बिजली खपत दर्शाई गई थी।
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शिकायत मिलने पर बिजली निगम के अधिकारियों ने 13 मार्च 2021 को मीटर की जांच की। जांच रिपोर्ट में मीटर की डिस्प्ले खराब तथा रीडिंग दिखाई न देने की बात दर्ज की गई थी। इसके बावजूद तीन दिन बाद मीटर बदलते समय अधिकारियों ने अंतिम रीडिंग 18,277 दर्ज की।
आयोग ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मीटर की रीडिंग दिखाई ही नहीं दे रही थी तो सटीक अंतिम रीडिंग कैसे दर्ज की गई। आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध खपत के आंकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि वर्ष 2019, 2020, 2022, 2023 और 2024 की समान अवधि में बिजली खपत कुछ सौ यूनिट से लेकर अधिकतम 1604 यूनिट तक रही। विवादित अवधि में 7004 यूनिट दर्शाई गई। आयोग ने इसे पूरी तरह गलत माना।
आयोग ने आदेश में कहा कि बिजली निगम विवादित बिल की शुद्धता और वैधता साबित करने में विफल रहा है। इसलिए निगम को 16 जनवरी 2021 से 5 मार्च 2021 की अवधि का बिजली खाता वर्ष 2022, 2023 और 2024 की समान अवधि की औसत खपत के आधार दोबारा तैयार किया जाएगा।
आयोग ने निगम को आदेश दिया कि 9 मार्च 2021 के विवादित बिल के आधार पर कोई वसूली न की जाए। संशोधित बिल जारी किया जाए। यदि शिकायतकर्ता से कोई अतिरिक्त राशि वसूली गई हो तो उसे वापस किया जाए। साथ ही विवादित बिल के आधार पर लगाए गए सरचार्ज, विलंब शुल्क, ब्याज और अन्य शुल्क भी हटाया जाएं।
आयोग ने कहा कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर ज्यादा समय लगा तो राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
बिजली निगम 7 हजार की जगह बकाया जोड़कर 75,671 रुपये का बिल जारी किया था। आयोग ने निगम को उपभोक्ता को 10 हजार रुपये देने व 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का भी निर्देश दिया है।
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मॉडल टाउन निवासी निधि सचदेवा ने आयोग में शिकायत दायर की थी कि वह किरायेदार के रूप में एक घरेलू बिजली कनेक्शन का उपयोग कर रही थीं। मार्च 2021 में उन्हें 48 दिनों का 55,693 रुपये का बिल भेज दिया गया। बिल में 7004 यूनिट बिजली खपत दर्शाई गई थी।
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शिकायत मिलने पर बिजली निगम के अधिकारियों ने 13 मार्च 2021 को मीटर की जांच की। जांच रिपोर्ट में मीटर की डिस्प्ले खराब तथा रीडिंग दिखाई न देने की बात दर्ज की गई थी। इसके बावजूद तीन दिन बाद मीटर बदलते समय अधिकारियों ने अंतिम रीडिंग 18,277 दर्ज की।
आयोग ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मीटर की रीडिंग दिखाई ही नहीं दे रही थी तो सटीक अंतिम रीडिंग कैसे दर्ज की गई। आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध खपत के आंकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि वर्ष 2019, 2020, 2022, 2023 और 2024 की समान अवधि में बिजली खपत कुछ सौ यूनिट से लेकर अधिकतम 1604 यूनिट तक रही। विवादित अवधि में 7004 यूनिट दर्शाई गई। आयोग ने इसे पूरी तरह गलत माना।
आयोग ने आदेश में कहा कि बिजली निगम विवादित बिल की शुद्धता और वैधता साबित करने में विफल रहा है। इसलिए निगम को 16 जनवरी 2021 से 5 मार्च 2021 की अवधि का बिजली खाता वर्ष 2022, 2023 और 2024 की समान अवधि की औसत खपत के आधार दोबारा तैयार किया जाएगा।
आयोग ने निगम को आदेश दिया कि 9 मार्च 2021 के विवादित बिल के आधार पर कोई वसूली न की जाए। संशोधित बिल जारी किया जाए। यदि शिकायतकर्ता से कोई अतिरिक्त राशि वसूली गई हो तो उसे वापस किया जाए। साथ ही विवादित बिल के आधार पर लगाए गए सरचार्ज, विलंब शुल्क, ब्याज और अन्य शुल्क भी हटाया जाएं।
आयोग ने कहा कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर ज्यादा समय लगा तो राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।